कन्हारगांव आश्रम में मरम्मत में हुई अनियमितता, टाइल्स व लाइट टूटा पड़ा
कांकेर/ भानुप्रतापपुर
संवाददाता देवव्रत टांडिया

भानुप्रतापपुर। आदिवासी विकास शाखा के माध्यम से क्षेत्र के आश्रम एवं छात्रावास भवनों में हुए मरम्मत के नाम पर प्रति वर्ष शासकीय राशि का बंदरबांट किया जा रहा है, अधिकारी व ठेकेदार मिल कर थोड़ा मोड़ा मरम्मत कार्य कर बाकी राशि को डकार जाते हैं। जिसके बाद आश्रम छात्रावास की समस्या जस की तस बनी रहती हैं।

शिक्षा विभाग के द्वारा भी भानुप्रतापपुर ब्लाक में स्थित पुराने व जर्जर प्राथमिक तथा मिडिल स्कूल भवनों का मरम्मत कार्य खंड शिक्षा अधिकारी के माध्यम से लगभग 150 स्कूलों का करोड़ो राशि कराया गया है उसमें भी कई अनियमितता हैं। पुराने व जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत हेतु करोड़ो की राशि जारी की गई है लेकिन देखने से ऐसा लगता है कि सारे कार्य केवल कागजों तक ही सीमित हैं। बड़े पैमाने पर मरम्मत कार्य मे शासकीय राशि का दुरुपयोग किया गया है। कमीशनखोरी के चलते कम कार्य कराकर अधिक राशि अहरण कर लिया गया है। यदि इसकी निष्पक्ष जांच की जाए तो कई अधिकारी कर्मचारी व ठेकेदारों का भ्रष्टाचार की पोल खुल जायेगी।

ज्ञात हो कि भानुप्रतापपुर ब्लाक के ग्राम कन्हारगांव में स्थित बालक आश्रम में आदिवासी विकास शाखा के अंतर्गत लगभग 6 लाख की लागत से मरम्मत कार्य कराया जाना था लेकिन ठेकेदार द्वारा थोड़ा मोड़ा कार्य कराकर पूरी आहरण कर लिया है, वहीं आश्रम के अधीक्षक से राजनैतिक दबाव बनाकर पूर्णता प्रमाण पत्र में भी हस्ताक्षर करा लिया गया है। आधा अधूरा मरम्मत कार्य कराया ठेकेदार को राशि का भुगतान करा दिया जाता हैं और अधिकारी इंजीनियर अपना कमीशन ठेकेदार से ले लेते हैं। आश्रम भवन में हुए मरम्मत कार्य मे घोर लापरवाही व अनियमितता बरती गई हैं।
मामले की जांच कर दोषियों पर कार्यवाही की मांग

शिकायतकर्ता ने बताया कि आश्रम भवन की मरम्मत कार्य की जांच की मांग मुख्यमंत्री से लिखित शिकायत कर की जाएगी। मरम्मत कार्य इस्टीमेट व एमबी के आधार पर आश्रम एवं छात्रावासों में मरम्मत कार्य हुआ है या नहीं इसकी जांच करायी जाए तथा जो भी नई सामाग्री लगाई गई है उसका भौतिक सत्यापन कराया जाय। जांच में जो भी दोषी पाये जाते है उनपर कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए।
और तो और इंजीनियर साहब को भी पता नहीं क्या काम करवाना है उसे,
इंजीनियर : विशेश्वर कोमा
क्या क्या मरम्मत कार्य किया जाना था व स्वीकृति राशि भी फाइनल देखने के बाद पता चलेगा।



















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