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सिरोही जिले के जावाल गांव के हठयोगी बाबा 12 वर्षों से कर रहे हैं कठिन तप, महाकुंभ में आकर्षण का केंद्र बन चुके थे।

संवाददाता:- हर्षल रावल
सिरोही/राज.

सिरोही जिले के जावाल गांव के हठयोगी बाबा 12 वर्षों से कर रहे हैं कठिन तप, महाकुंभ में आकर्षण का केंद्र बन चुके थे।


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सिरोही। राजस्थान प्रदेश के सिरोही जिले के जावाल गांव स्थित आश्रम के हठयोगी महंत रामगिरी महाराज इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। हाल ही में प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में उनके साथ हुई एक घटना ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया। दरअसल, एक यूट्यूबर के अजीबो गरीब प्रश्न पूछने पर उन्होंने क्रोध में आकर उसे चिमटे से पीट दिया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिससे वे सोशल मीडिया पर काफी चर्चित हो गए।

12 वर्षों से एक हाथ उठाए हैं महंत रामगिरी महाराज:-
महंत रामगिरी महाराज की पहचान केवल इस घटना से नहीं जुड़ी, बल्कि वे अपनी कठोर तपस्या के लिए जाने जाते हैं। वे पिछले 12 वर्षों से अपना एक हाथ ऊपर उठाए हुए हैं, जो एक असाधारण योग साधना मानी जाती है। इस कठिन तपस्या के पीछे उनका एक दृढ़ संकल्प है। उनका कहना है कि जब तक गौ हत्या बंद नहीं होगी और भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित नहीं किया जाएगा, तब तक वे अपना हाथ नीचे नहीं करेंगे। उनकी इस प्रतिज्ञा के कारण उनका हाथ अब बेहद कमजोर और काला पड़ चुका है और हाथ उंगलियां भी मुड़नी आरंभ हो गयी हैं।

महाकुंभ में विशेष भागीदारी:-
महाकुंभ में महंत रामगिरी महाराज ने अन्य साधु-संतों के साथ शाही स्नान और योग साधना की। उन्होंने कहा कि यह 144 वर्षों पश्चात आया महाकुंभ उनके लिए एक विशेष अवसर था। इस दौरान उन्होंने समाज के लोगों से अपील की कि वे सनातन धर्म की रक्षा करें और नशामुक्त जीवन अपनाएं।

सनातन धर्म के प्रचार में अग्रणी:-
महंत रामगिरी महाराज अपने अनुयायियों को गौ सेवा, नारी सम्मान और सनातन धर्म के प्रचार के लिए प्रेरित करते हैं। वे कहते हैं कि नशे के कारण समाज के युवाओं का भविष्य नष्ट हो रहा है, इसलिए सभी को शराब, अफीम और सिगरेट जैसी बुरी आदतों को त्यागकर धर्म की सेवा करनी चाहिए। उनका यह संदेश अब लोगों तक तेजी से पहुंच रहा है। महंत रामगिरी महाराज का यह अनोखा तप और दृढ़ संकल्प उन्हें एक विशेष पहचान दिला रहा है।


भारत को हिन्दू राष्ट्र एवं गौमाता को राष्ट्रीय पशु घोषित करें सरकार:-
महंत रामगिरी महाराज पिछले 12 वर्षों से अपना एक हाथ ऊपर रखे हुए हैं। इस कारण से उनका हाथ काला होने के साथ कमजोर भी हो गया है। सर्दी, गर्मी, बारिश हर मौसम में उनका हाथ ऊपर ही रहता है। उन्होंने बताया कि साधु जीवन में आने के दौरान उन्होंने प्रण लिया था कि जब तक बूचड़खानों में गौ-माता का कटने का सिलसिला बंद नहीं होगा और देश हिन्दू राष्ट्र घोषित नहीं होगा, तब तक एक हाथ उपर ही रहेगा। उन्होंने सरकार से मांग की है कि भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करे और गौमाता को राष्ट्रीय पशु घोषित करे। हठयोगी बाबा ने पिछले 20 वर्षों से कुछ भी अन्न ग्रहण नहीं किया हैं। वह कहते हैं कि मेरे गुरू भी इसी प्रकार की कठिन तप पिछले 45 वर्षों से कर रहे हैं। उनका भी यही संकल्प हैं।

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