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बीकानेर- कोटासर में श्री मद् भागवत कथा का तीसरे दिन ध्रुव व विदुर चरित्र की कथा का प्रसंग सुनाया, प्रेम भाव के भूखे होते है भगवान – पं. प्रकाश तिवाड़ी

सवांददाता मीडिया प्रभारी मनोज मूंधड़ा बीकानेर श्रीडूंगरगढ़

कोटासर गांव के भोमियाजी मंदिर में चल रहे संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन ध्रुव व विदुर चरित्र की कथा का प्रसंग सुनाया कथा में ध्रुव चरित्र की कथा का महत्व बताते हुए कथावाचक पंडित प्रकाश तिवाड़ी ने बताया कि ध्रुव की सौतेली मां सुरुचि के द्वारा अपमानित होने पर भी उसकी मां सुनीति ने धैर्य नहीं खोया जिससे एक बहुत बड़ा संकट टल गया। परिवार को बचाए रखने के लिए धैर्य संयम की नितांत आवश्यकता रहती है। भक्त ध्रुव द्वारा तपस्या कर श्रीहरि को प्रसन्न करने की कथा को सुनाते हुए उन्होंने बताया कि भक्ति के लिए कोई उम्र बाधा नहीं है। भक्ति को बचपन में ही करने की प्रेरणा देनी चाहिए क्योंकि बचपन कच्चे मिट्टी की तरह होता है उसे जैसा चाहे वैसा पात्र बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा अगर ध्रुव पांच साल की उम्र में भगवान को पा सकता है,तो फिर हम कैसे पिछड़ सकते हैं। अगर सच्चे मन से भगवान की भक्ति की जाए तो भगवान खुद अपने भक्तों से मिलने पहुंच जाते है। विदुर प्रसंग में भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम की व्याकुलता के बारे में उन्होंने विस्तार से बताते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण विदुरजी की कुटिया में भोजन करने गए और वहां केले के छिलकों का भोग स्वीकारा। इससे पहले वे दुर्योधन के महल में छप्पन भोग का त्याग कर आए थे। भगवान तो प्रेम के भूखे होते हैं और विदुर-विदुरानी ने भगवान को प्रेम से भोजन करवाया तो उन्होंने केले के छिलके भी बड़े प्रेम से खाए।

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