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झोपडी़ वाला स्कूलः माउंट आबू की बर्फीली हवाओं में ठिठुरते बच्चे, जंगली जानवरों का भी भय

हर्षल रावल
30 दिसंबर, 2024
सिरोही, राज.

झोपडी़ वाला स्कूलः माउंट आबू की बर्फीली हवाओं में ठिठुरते बच्चे, जंगली जानवरों का भी भय


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सिरोही। राजस्थान के सिरोही जिले की पहचान प्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू से होती है और इसी माउंट आबू की तलहटी में बसे एक गांव का सरकारी स्कूल झोपड़े में चल रहा है। बेदर्दी का आलम ये है कि जिस माउंट आबू का पारा दिसंबर में माइनस में पहुंचता है और यहां की बर्फीली हवाएं हाड़ कंपा देती है, उसकी गोद में बसे गांव के बच्चे चारों तरफ से खुले झोपड़े में पढ़ने को विवश हैं।
माउंट आबू की तलहटी में बसे एक गांव का सरकारी स्कूल झोपड़े में चल रहा है। पानी व सड़क की सुविधा तक नहीं है। दो वर्ष पूर्व भवन का शिलान्यास हुआ था। अब तक कार्य भी आरंभ नहीं हुआ है। जिला मुख्यालय से महज 30 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत कृष्णगंज के गांव सिमटी खेड़ा फली में झोपड़े में प्राइमरी स्कूल चल रहा है। चारों ओर जंगल से घिरे पहाड़ी क्षेत्र में विचरण करते वन्यजीवों का भय बच्चों को प्रतिदिन सताता है। फिर चार वर्ष में सरकार यहां स्कूल भवन बनाना तो दूर बिजली, जल और मार्ग भी उपलब्ध नहीं करा पाई है। जबकि दो वर्ष पूर्व स्कूल भवन के लिए नेता यहां शिलान्यास कर चुके हैं। लेकिन भवन निर्माण के लिए माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य होने से इसकी अनुमति दिलाने में सफल नहीं हो पाई है।

बारिश में करनी पड़ती है छुट्टी, कुत्ते कर चुके हमला:-
स्कूल भवन नहीं होने से वातावरण में परिवर्तन के साथ बच्चों को पीड़ा झेलनी पड़ती है। बारिश होते ही झोपड़ा टपकने के कारण स्कूल की छुट्टी करनी पड़ती है। गर्मी के दिनों में आंधी-तूफान के दौरान झोपड़ा गिरने या बिखरने से हादसे की आशंका के भय से छुटटी करनी पड़ती है। भीषण गर्मी व लू चलने पर भी छुटटी करनी पड़ती है। अभी सर्दी के मौसम में देर सुबह तक कड़ाके की ठंड रहती है, जिसमें बच्चे झोपड़े में बैठते ही ठिठुरने लगते हैं। ऐसे में बच्चों के बीमार होने की चिंता रहती है। वन क्षेत्र होने से भालू, तेंदुआ, जंगली कुत्तों समेत अन्य जंगली जानवरों के हमले का खतरा बना रहता है। ऐसे में खुले स्थान जंगल में पढ़ाना असुरक्षा का वातावरण उत्पन्न करता है।

स्कूल रिकॅार्ड भी थैले में रखना पड़ता है:-
आदिवासी क्षेत्र बाहुल्य सिमटी खेड़ा फली में 14 सितंबर 2021 को राजकीय प्राथमिक विद्यालय स्वीकृत कर उसका संचालन आरंभ किया गया था। स्कूल के समीप स्वयं का भवन नहीं होने से यहां के निवासी जेपाराम देवासी ने अपने घर में स्कूल चलाने की अनुमति दी। तीन वर्ष पश्चात उनके बेटे का विवाह होने के पश्चात उन्होंने स्कूल को खाली करवा दिया। बच्चे कहां पढ़ने जाएं इसको देखते हुए ग्रामीणों झोपड़ा बनाया, जिसमें करीब दो वर्ष से स्कूल चल रहा है। इस बीच 26 अगस्त 2023 को स्कूल भवन का शिलान्यास भी किया गया। लेकिन सामग्री लाने के मार्ग के विवाद में कार्य अटक गया। सरकार बदलने के एक वर्ष भी यह विवाद नहीं सुलझने से मासूम बच्चे तपती गर्मी, बारिश में टपकती छत और अब सर्दी में ठिठुरते हुए पढ़ाई को मजबूर है। स्कूल भवन नहीं होने से 67 नामांकन संख्या से घटकर अब 37 तक पहुंच गया है। सिमटी खेड़ा फली के शिक्षक जेठाराम चौधरी ने बताया कि विद्यालय में बिजली, जल, मार्ग और भवन की समस्या है। यहां शिक्षण के लिए दो शिक्षक कार्यरत है। स्कूल रिकॅार्ड भी थैले में रखना पड़ता है।

स्थानीय विधायक हैं मंत्री, लेकिन एक वर्ष से अनुमति नहीं दिला पाए:-
सिरोही विधानसभा क्षेत्र से जुडे़ इस मामले में स्थानीय विधायक व पंचायती राज विभाग के राज्य मंत्री ओटाराम देवासी अपनी सरकार होने के बावजूद एक वर्ष से वन विभाग से स्कूल निर्माण की अनुमति दिलाने में नाकाम रहे हैं। सिमटी खेड़ा के ग्रामीणों ने यहां तक आरोप लगाया कि चुनाव जीतने के पश्चात ओटाराम देवासी स्कूली बच्चों का स्थिति तक पूछने नहीं आएं है।

उधर, सिरोही-जालोर लोकसभा सांसद लुंबाराम चौधरी ने दो दिन पहले दिशा बैठक में इस मामले पर शिक्षा विभाग व वन विभाग के अधिकारियों को खरी-खरी सुनाई थी। जिसके पश्चात अब इस पर कार्य होने की आशा जगी है।

वन क्षेत्र होने से अटका है कामः डीईओ:-
सिमटी खेड़ा फली स्कूल के भवन का बजट मंजूर हो चुका है और कार्य भी आरंभ किया गया था, लेकिन वन विभाग से एनओसी नहीं मिलने से कार्य अटक गया हैं। इसकी अनुमति के लिए लगातार अधिकारियों से पत्र व्यवहार किया जा रहा है। -जितेंद्र लोहार, जिला शिक्षा अधिकारी, सिरोही

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