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बीकानेर-25 दिसंबर 2024 बुधवार तुलसी पूजन दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं सहित देखें आज का पंचांग व राशिफल और जानें कुछ खास बातें पंडित नरेश सारस्वत रिड़ी के साथ

सवांददाता नरसीराम शर्मा बीकानेर श्रीडूंगरगढ़

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है। शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है। पंचांग में सूर्योदय सूर्यास्त,चद्रोदय-चन्द्रास्त काल,तिथि,नक्षत्र,मुहूर्त योगकाल,करण,सूर्य-चंद्र के राशि,चौघड़िया मुहूर्त दिए गए हैं।

🙏जय श्री गणेशाय नमः🙏
🙏जय श्री कृष्णा🙏

🌞आज का पंचांग🌞

दिनांक – 25 दिसम्बर 2024
दिन – बुधवार
विक्रम संवत – 2081
शक संवत -1946
अयन – दक्षिणायन
ऋतु – शिशिर ॠतु
मास – पौष (गुजरात-महाराष्ट्र मार्गशीर्ष)
पक्ष – कृष्ण
तिथि – दशमी रात्रि 10:29 तक तत्पश्चात एकादशी
नक्षत्र – चित्रा शाम 03:22 तक स्वाती
योग – अतिगण्ड रात्रि 09:47 तक तत्पश्चात सुकर्मा
राहुकाल – दोपहर 12:39 से दोपहर 02:00 तक
सूर्योदय 07:14
सूर्यास्त – 06:03

चोघडिया,दिन

लाभ 07:27 – 08:45 शुभ
अमृत 08:45 – 10:02 शुभ
काल 10:02 – 11:20 अशुभ
शुभ 11:20 – 12:37 शुभ
रोग 12:37 – 13:55 अशुभ
उद्वेग 13:55 – 15:12 अशुभ
चर 15:12 – 16:29 शुभ
लाभ 16:29 – 17:47 शुभ

चोघडिया, रात

उद्वेग 17:47 – 19:30 अशुभ
शुभ 19:30 – 21:12 शुभ
अमृत 21:12 – 22:55 शुभ
चर 22:55 – 24:37* शुभ
रोग 24:37* – 26:20* अशुभ
काल 26:20* – 28:03* अशुभ
लाभ 28:03* – 29:45* शुभ
उद्वेग 29:45* – 31:28* अशुभ
(*) समय आधी रात के बाद, लेकिन अगले दिन के सूर्योदय से पहले.
दिशाशूल – उत्तर दिशा मे

व्रत पर्व विवरण – तुलसी पूजन दिवस,विश्व गुरू भारत कार्यक्रम (25 दिसम्बर से 01 जनवरी तक)*
विशेष-

एकादशी व्रत के लाभ

25 दिसम्बर 2024 बुधवार को रात्रि 10:29 से 26 दिसम्बर, गुरुवार को रात्रि 12:43 तक एकादशी है।

विशेष – 26 दिसम्बर, गुरुवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखे।

जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है,उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।

जो पुण्य गौ-दान सुवर्ण-दान,अश्वमेघ यज्ञ से होता है। उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है।

एकादशी करनेवालों के पितर नीच योनि से मुक्त होते हैं और अपने परिवारवालों पर प्रसन्नता बरसाते हैं ।इसलिए यह व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति बनी रहती है।
धन-धान्य,पुत्रादि की वृद्धि होती है।

कीर्ति बढ़ती है,श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है,जिससे जीवन रसमय बनता है।

परमात्मा की प्रसन्नता प्राप्त होती है। पूर्वकाल में राजा नहुष अंबरीष,राजा गाधी आदि जिन्होंने भी एकादशी का व्रत किया,उन्हें इस पृथ्वी का समस्त ऐश्वर्य प्राप्त हुआ।

भगवान शिवजी ने नारद से कहा है। एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं,इसमे कोई संदेह नहीं है।

एकादशी के दिन किये हुए व्रत,गौ-दान आदि का अनंत गुना पुण्य होता है।

एकादशी के दिन करने योग्य

एकादशी को दिया जलाके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें विष्णु सहस्त्र नाम नहीं हो तो १० माला गुरुमंत्र का जप कर लें अगर घर में झगडे होते हों,तो झगड़े शांत हों जायें ऐसा संकल्प करके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें तो घर के झगड़े भी शांत होंगे।

एकादशी के दिन ये सावधानी रहे

महीने में १५-१५ दिन में एकादशी आती है एकादशी का व्रत पाप और रोगों को स्वाहा कर देता है लेकिन वृद्ध,बालक और बीमार व्यक्ति एकादशी न रख सके तभी भी उनको चावल का तो त्याग करना चाहिए एकादशी के दिन जो चावल खाता है। तो धार्मिक ग्रन्थ से एक- एक चावल एक एक कीड़ा खाने का पाप लगता है।यह बात डोंगरे जी महाराज के भागवत में कहि थी।

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