गोपाल चतुर्वेदी/मथुरा।
समाजवादी पार्टी का जिला संगठन वेंटिलेटर पर!
उत्तर प्रदेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी का जिला संगठन पूरी तरह निष्क्रिय
मथुरा। देश में लोकसभा चुनाव के लिए रणभेदी बज चुकी है, एक तरफ सत्ताधारी पार्टी भारतीय जनता पार्टी अपनी वापसी के लिए हर हथकंडे को अपनाए हुए हैं इसी श्रृंखला में भाजपा ने विपक्षी एकता को तोड़ने के लिए हर संभव प्रयास जारी कर रखा है इतना ही नहीं अपने पार्टी के मंत्री और सांसदों को भी मामूली विवाद के चलते बाहर का रास्ता दिखाना शुरू कर दिया है
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इससे भारतीय जनता पार्टी में सभी स्तर से विरोध के स्वर भी मुखर होने लगे हैं। उत्तर प्रदेश में लोकसभा के चुनाव की बात करते हैं तो इस समय भारतीय जनता पार्टी अपने सहयोगियों के साथ मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है , वहीं प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी भले ही कितनी ही तैयारी कर रही हो लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ ठीक नहीं है क्योंकि समाजवादी पार्टी का गठबंधन देश की कभी सबसे बड़ी पार्टी रही कांग्रेस के साथ गठबंधन है और आगामी चुनाव उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी कांग्रेस और उनके सहयोगी मिलकर संयुक्त रूप से भारतीय जनता पार्टी को पराजित कर अपना परचम लहराने को पूरी शक्ति लगाए हुए हैं।
हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण लोकसभा क्षेत्र की सीट मथुरा की इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी के चुनाव चिन्ह पर लगातार दो बार जीत का परचम लहराने वाली ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी पर दाव लगाया है।
भारतीय जनता पार्टी मथुरा में बहुत ही सशक्त और मजबूत हो चुकी है थोड़ा बहुत जो खतरा था वह जाटों की राजनीति से था मथुरा चौधरी चरण सिंह की राजनीति का प्रमुख स्थान रहा है चौधरी चरण सिंह की राष्ट्रीय लोक दल अपना परचम लहराती रही है अधिकांश विधायक जिला पंचायत अध्यक्ष और विभिन्न पदों पर राष्ट्रीय लोकदल अपना कब्जा करती रही है। इस लोकसभा सीट पर जाट राजनीति कभी हावी रही है ।
राजनीतिक और आर्थिक स्थिति इस जनपद में जाट जाति के लोगों की बहुत ही मजबूत रही है भारतीय जनता पार्टी के द्वारा चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देने का जो पासां फेंका गया था ।
उससे भले ही चौधरी चरण सिंह की राजनीतिक विरासत को संभालने वाले जयंत चौधरी प्रभावित हो गए हैं और उन्होंने भाजपा की दास्ता को स्वीकार कर लिया हो लेकिन जयंत चौधरी का यह फैसला जिले के जाट समुदाय को नागवार गुजारा है , जिसका व्यापक विरोध शुरू हो गया है।
उत्तर प्रदेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी की स्थिति का हम अवलोकन करें तो वह है वेंटिलेटर पर दिखाई दे रही है जिला संगठन और उसके पदाधिकारी कुंभकरण की तरह चिर निद्रा में हैं।
यह इसलिए है सपा गठबंधन के प्रत्याशी के रूप में इस लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी का चुनाव लड़ना लगभग तय हैं। समाजवादी पार्टी की महानगर अध्यक्ष श्रीमती रितु गोयल और उनकी टीम के अलावा समाजवादी पार्टी पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के महानगर अध्यक्ष रमेश सैनी पार्टी को ऊर्जावान बनाये हुए हैं हाल ही में पार्टी के द्वारा समाजवादी युवजन सभा के जिला अध्यक्ष पद पर अल्पसंख्यक समुदाय के युवा को जिम्मेदारी दी गई है । उससे भी पार्टी के निराशाजनक कार्यकर्ताओं को ऊर्जा स्रोत होने की उम्मीद है । मजे की बात है समाजवादी पार्टी का जो जिला संगठन है और उनके सैकड़ो की संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता है वह अपनी पार्टी और संगठन के प्रति उदासीन बने हुए हैं।बताया जाता है कि विगत निकाय चुनाव के वक्त सपा के अधिकांश जिम्मेदार नेताओं ने पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के विरोध में काम कर पार्टी को नुकशान पहुंचाया था। ऐसी स्थिति में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी के सामने विपक्षी एकता कितना टिक पाएगी , यह तो आगामी लोकसभा चुनाव के परिणाम ही बता पाएंगे!
















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