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जिन माध्यमों से गोहत्या हो रही है, उन माध्यमों में प्रहार होना चाहिए- स्वामी गोपालानंद सरस्वती

जिन माध्यमों से गोहत्या हो रही है, उन माध्यमों में प्रहार होना चाहिए- स्वामी गोपालानंद सरस्वती

सुसनेर। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव द्वारा मध्य प्रदेश के निराश्रित गोवंश के संरक्षण हेतु सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में भारतीय नूतन संवत 2081 से घोषित “गोवंश रक्षा वर्ष” के तहत जनपद पंचायत सुसनेर की समीपस्थ ननोरा, श्यामपुरा, सेमली व सालरिया ग्राम पंचायत की सीमा पर मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित एवं श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा द्वारा संचालित विश्व के प्रथम श्री कामधेनु गो अभयारण्य मालवा में चल रहें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 237 वे दिवस पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि आज ही के दिन सीमा सुरक्षा बल (बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स) की स्थापना हुई है, BSF भारत का एक प्रमुख सशस्त्र पुलिस बल है एवँ विश्व का सबसे बड़ा सीमा रक्षक बल है। जिसका गठन 1 दिसम्बर 1965 में हुआ था। भारत की अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं पर निरंतर निगरानी रखना, भारत भूमि सीमा की रक्षा और अंतर्राष्ट्रीय अपराध को रोकना है और यह 6,385.39 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा करती है जो कि पवित्र, दुर्गम रेगिस्तानों, नदी-घाटियों और हिमाच्छादित प्रदेशों तक फैली है। सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों में सुरक्षा बोध को विकसित करने की जिम्मेदारी के साथ इनमें भक्तिभावना भी रहती है जिसके साक्षात दर्शन जैसलमेर भारत पाक सीमा पर स्थित तनोटराय
मंदिर में देखी जा सकती है ।
स्वामीजी ने आगे बताया कि आजकल हमारे घरों में गो हत्या का अंश पहुंच रहा है अभी हाल ही में मेरठ में पकड़े गये 10 हजार बछड़ों का गोमांस जिसमें बफैलो प्रेस मांस की सील लगाकर एक्सपोर्ट किया जा रहा था लेकिन उनकी हड्डियों का प्रयोग कैल्शियम एवं उनकी चर्बी का उपयोग साबुन, तेल एवं घी बनाने में व मांस का उपयोग हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए और चमड़े का उपयोग शॉप्ट लेदर के बेल्ट एवं जूते के रूप में हम हमारे घरों में उपयोग कर रहें है तो फिर हम कैसे गोमाता को बचाएंगे इसके लिए सबसे पहले इनके बहिष्कार का संकल्प लेना होगा और जिन जिन माध्यमों से गौहत्या हो रहीं है उन उन माध्यमों में प्रहार होना चाहिए ।
स्वामीजी ने आगे बताया कि गोमाता एवं नक्षत्रों के बीच गहरा सम्बन्ध है और भगवान सूर्य का तो गोमाता से गहरा नाता है और सूर्य की सवितु किरण के माध्यम से गोमाता अपनी सूर्यकेतु नाडी से लिक्यूड गोल्ड साल्ट के माध्यम से अपने गोबर , गोमूत्र एवं दूध के माध्यम से हमें गोल्ड देती है और गोमाता के दूध से बना घी का रंग इसलिए पीला होता है कि उसमें सोने की मात्रा होती है।

237 वें दिवस पर आगर से राधेश्याम उपाध्याय एवं बंशीलाल कुंभकार अपने परिवार व मेरु खेड़ी(झालावाड़) से हरकचन्द आदि अतिथि उपस्थित रहे

237 वे दिवस पर चुनरीयात्रा राजस्थान के जयपुर महानगर से

एक वर्षीय गोकृपा कथा के 237वें दिवस पर चुनरी यात्रा राजस्थान की राजधानी जयपुर के उद्योगपति मनोज गोयल एवं भारतीय किसान संघ के प्रांतीय मंत्री डॉ. लटुर सिंह गुर्जर की और से सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए अमावस्या के पुण्य दिवस पर गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।
चित्र 1 : गोकथा सुनाते स्वामी गोपालानंद सरस्वती।
चित्र 2 : गोकथा में उपस्थित गौभक्त।
चित्र 3,4 : गोकथा में गोमाता को चुनड़ ओढाते गोभक्त ।
चित्र 5,6 : चुनरी यात्रा में आए गोभक्तो को सम्मानित करते महोत्सव के कार्यकर्ता
चित्र 7 : गो पूजन करते गो भक्त ।
चित्र 8 : गोमाता के लिए चुनड़ लाते गोभक्त

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