सत्यार्थ न्यूज़ से सुसनेर की खास रिपोर्ट
प्रभारी मंत्री के आश्वासन एवं पत्रोच्चार के बावजूद नही सुधरी सुसनेर सिविल अस्पताल की व्यवस्था, डॉक्टरों की कमी से मरीज हो रहे परेशान
5 डॉक्टरों के भरोसे पूरा अस्पताल, ओवर टाइम कर रहे, फिर भी स्वास्थ्य व्यवस्थाए लाचार

सुसनेर। विगत दिवस सुसनेर प्रवास पर आए आगर जिले के प्रभारी मंत्री नागरसिंह चौहान का सुसनेर नगर व क्षेत्र की जनता जनार्दन की ओर से भाजपा मंडल महामंत्री पवन शर्मा द्वारा नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि राहुल सिसोदिया एवं पार्षद प्रदीप सोनी के साथ क्षेत्र के नागरिकों के हित मे सिविल हॉस्पिटल में डॉक्टर की मांग को लेकर एक मांग पत्र दिया था। जिसको प्रभारी मंत्री चौहान ने संवेदनशीलता के साथ लेकर व मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ला को लेटर के माध्यम से सुसनेर सिविल हॉस्पिटल में डॉक्टर की नियुक्ति हेतु लेटर जारी किया था। जिसमे में भी सिविल अस्पताल सुसनेर में रिक्त पदों की पूर्ति करने का अनुरोध किया गया था। ताकि क्षेत्रवासियों को आवश्यक उपचार स्थानीय स्तर पर समय पर प्राप्त हो सकें। परन्तु प्रभारी मंत्री के पत्रोच्चार एवं आश्वासन को एक सप्ताह से भी ज्यादा अधिक समय व्यतीत होने के बावजूद सिविल अस्पताल की व्यवस्था जस की तस है। एक दर्जन डॉक्टरों की स्वीकृति वाले अस्पताल में प्रभारी मंत्री की पहल एवं समाचार पत्रों में खबरे प्रकाशित होने के बावजूद एक भी डॉक्टर की व्यवस्था में इजाफा नही हुआ है। जिसे क्षेत्रवासियों में आक्रोश व्याप्त है।
स्मरण रहे कि विधानसभा सुसनेर के आसपास के 122 गांवों एवं इंदौर कोटा मार्ग पर आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं में घायल होने वाले मरीजों की स्वास्थ्य सेवा करने वाले सुसनेर अस्पताल को लंबे एवं सतत प्रयासों से तकालीन विधायक राणा विक्रमसिंह ने सिविल अस्पताल का दर्जा दिलवाकर यहां 9 करोड़ की लागत से इसका नवीन भवन निर्माण की स्वीकृति करवा कर इस अस्पताल में उपचार के उपकरणों एवं संशाधनों की व्यवस्था करवाई थी। इससे पूर्व क्षेत्र के अनेक जनप्रतिनिधियों ने इस अस्पताल को सिविल अस्पताल का दर्जा दिलवाने के प्रयास किया था परन्तु उनको सफलता नही मिली थी। अब पूर्व विधायक राणा के प्रयासों से सिविल अस्पताल का दर्जा मिलने एवं सारी सुविधाएं दिलवाने के बाद उनके चुनाव हारते ही इस अस्पताल के बुरे हाल हो गए है।
चाहे अब प्रशासन इस अस्पताल की व्यवस्थाओ को बेहतर बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर बेहतर सुविधाओं का ढिंढोरा भले ही पीट रहा हो, लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही बया कर रही है। पूर्व विधायक राणा के प्रयासों से यहां करोड़ो रूपये खर्च कर कई संसाधन व सुविधाएं तो उपलब्ध है लेकिन इन संसाधनों का उपयोग कर मरीजो को लाभ देने के लिए डॉक्टर न के बराबर है। ऐसे ही हालात जिले की सुसनेर विकास खंड में बने हुए है। शासन ने सुसनेर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को सिविल का दर्जा भले ही दे दिया हो, लेकिन सिविल अस्पताल सुसनेर आज भी डॉक्टरो की कमी से जूझ रहा है। डॉक्टर के आभाव में सारी सुविधाएं व संसाधन बेकार है। हालात ये है कि वर्तमान में सुसनेर सिविल अस्पताल में एक भी विशेषज्ञ डॉक्टर नही है। विकास खंड के सवा सौ गॉव की डेढ़ लाख आबादी सिर्फ 5 डॉक्टरों के भरोसे है। जबकि यहां डॉक्टरों के एक दर्जन के करीब पद स्वीकृत है परन्तु वर्तमान में सुसनेर सिविल अस्पताल में मात्र 5 डॉक्टर तैनात है। जिसमे से एक सीबीएमओ है जो कार्यालयीन कार्यो में व्यस्त है। शेष 4 डॉक्टर में से 2 महिला एवं 2 पुरूष डॉक्टर है। जिनके ऊपर ही पूरे अस्पताल का भार है। सिविल अस्पताल में प्रतिदिन जिला अस्पताल के लगभग 350 से 400 मरीज ओपीडी में अपना उपचार कराने आते है। इनमें से 25 से 30 मरीज वार्ड में भर्ती रहते है। अस्पताल में एक्सीडेंट, मेडिकल, पोस्टमार्टम, इमरजेंसी, पुलिस करवाई, एमएलसी, सब कुछ इन 5 डॉक्टरों के जिम्मे है। डॉक्टरो की कमी के चलते महिला डॉक्टरों को नाईट ड्यूटी करना पड़ रही है। हालात यह है कि एक डॉक्टर को ओवर टाइम भी काम करना पड़ रहा हैं फिर भी व्यवस्था बनाने में परेशानी आ रही है। अगर ऐसे में एक डॉक्टर भी अवकाश पर चला जाता है तो अस्पताल की व्यवस्थाए पूरी तरह गड़बड़ा जाती है। लेकिन क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों व जिम्मेदार अधिकारियों का स्वास्थ सम्बन्धी जन समस्या की और कोई ध्यान नही है। मरीजो की सुने तो अस्पताल में समय पर डॉक्टर नही मिल पाते है एक समय मे एक डॉक्टर के होने से उपचार के लिए लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ता है। इस दौरान अगर इमरजेंसी केस आ जाए तो घण्टो इंतज़ार भी करना पड़ता है।
पोस्टमार्टम के लिए डेथ बॉडी लेकर इंतज़ार करते रहे थे परिजन
हाल ही में कुछ समय पूर्व तहसील के डोंगरगढ़ गाँव मे जनपद सदस्य देवीलाल पिता बालचंद गुर्जर के द्वारा घर में फांसी लगाकर आत्म हत्या करने के मामले में पोस्टमार्टम के लिए परिजनों को घण्टो इंतजार करना पड़ा था। डॉक्टरों की कमी और मरीजों की भीड़ के चलते पोस्टमार्टम के लिए कोई डॉक्टर उपलब्ध नही हुआ था। ऐसे में जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद शव का पोस्टमार्टम हो सका था। जिसके बाद परिजनों को शव उपलब्ध हुआ था। डॉक्टरो की कमी से पोस्टमार्टम में देरी के कारण अस्पताल में पदस्थ 2 डॉक्टरो को नोटीस की मार भी झेलना पड़ी थी।
पत्रकारों के आंदोलन के बाद हुई थी व्यवस्था, फिर जस की तस
सुसनेर अस्पताल में डॉक्टर की समस्या शुरू से रही है। डॉक्टरों की समस्याओं को लेकर कई बार आंदोलन भी हुए है। मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ द्वारा डॉक्टरो की मांग को लेकर कई बार ज्ञापन, धरना प्रदर्शन, पुतला दहन सहित आंदोलन किए गए। जिसके बाद अस्पताल में वैकल्पिक तौर पर डॉक्टरो का अटैचमेंट भी किया गया लेकिन कुछ दिनों बाद ही स्थित जस की तस बन जाती है। जो कि आज भी ऐसी ही है। आज भी अस्पताल डॉक्टरो की कमी से जूझ रहा है जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ा रहा है। संसाधन होते हुए भी मरीजों को अन्य शहरों में इलाज के लिए जाना पड़ रहा है। जिससे मरीजों को अर्थ व समय दोनों का नुकसान झेलना पड़ता है।
इनका कहना-
“सिविल अस्पताल सुसनेर में चिकित्सा विशेषज्ञ का एक पद स्वीकृत है ओर वो भी खाली है, शल्य चिकित्सा विशेषज्ञ का एक पद पद स्वीकृत है वो भी खाली है, स्त्री रोग विशेषज्ञ एक स्वीकृत है वो भी रिक्त है, शिशु रोग विशेषज्ञ एक पद स्वीकृत है वो भी खाली है, निश्चेतना विशेषज्ञ का एक पद स्वीकृत है वो भी खाली है, दंत शल्य चिकित्सक का एक पद स्वीकृत है वो भी खाली है। चिकित्सा अधिकारी के 6 पद स्वीकृत है पांच की पूर्ति है इसमे से भी एक खाली पद पड़ा हुआ है। याने कुल 12 पद स्वीकृत है जिसमे 7 पद वर्षों से खाली पड़े हुए है परन्तु जिमेदारो का मांग के बावजूद ध्यान नही जाता है। वही विशेषज्ञ चिकित्सको के सभी स्वीकृत पांच पद खाली है। अगर जनहित में शीध्र पदों की पूर्ति नही की जाती है तो पत्रकारों को क्षेत्र की जनता के साथ पुनः आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।”- विष्णु भावसार, पत्रकार, सुसनेर
जल्द ही हो जाएगी डॉक्टर की पूर्ति-
“सुसनेर अस्पताल में डॉक्टरों की कमी है शासन स्तर से संविदा नियुक्ति की जा रही है। जैसे ही डॉक्टर की नियुक्ति होती है सुसनेर अस्पताल में डॉक्टर की पूर्ति कर दी जाएगी। “- डॉ राजेश गुप्ता, सीएचएमओ आगर
फ़ोटो 1 – शासकीय सिविल अस्पताल सुसनेर में डॉक्टरों की कमी के कारण हो रहे लोग परेशान।
फोटो 2 – प्रभारी मंत्री को अस्पताल में डॉक्टरों की पूर्ति की मांग करते पवन शर्मा।

















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