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नवरात्रि के पावन पर्व के नौवें दिन शांता देवी के मंदिर श्रृंगीनारी धाम मे सुबह से ही श्रद्धालुओं का मेला पुलिसकर्मियों रहे मुस्तैद

संवाददाता- अंशु श्रीवास्तव

नवरात्रि के पावन पर्व के नौवें दिन शांता देवी के मंदिर श्रृंगीनारी धाम मे सुबह से ही श्रद्धालुओं का मेला पुलिसकर्मियों रहे मुस्तैद

जनपद – बस्ती
तहसील हरैया
थाना क्षेत्र – परसरामपुर
श्रृंगीनारी धाम

 बस्ती के हरैया तहसील में एक ऐसा देवी मन्दिर स्थित है जिसकी महिमा का गुणगान चारों तरफ फैला हुआ है. नवरात्रि में यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु आकर पूजा-अर्चना करते हैं. मान्यता है कि यहां जो भी मुराद भक्तों द्वारा मांगी जाती हैं, वो जरूर पूरी होती है.
धर्मनगरी अयोध्या और बस्ती जिले के श्रृंगीनारी धाम का रिश्ता भाई बहन का है, क्योंकि यहां पर श्रृंगीनारी धाम भगवान राम के बहन शांता जी के नाम पर बना है.
भगवान राम की बहन थी शांता धार्मिक मान्यता के अनुसार राजा दशरथ की एक पुत्री शांता थी और जब राजा दशरथ को कोई पुत्र नहीं हुआ तो उनकी पुत्री शांता वंश वृद्धि के लिए जंगल में जाकर पूजा अर्चना करने लगी. वहीं पर उनकी मुलाकात श्रृंगी ऋषि से हुई बाद में दोनों ने शादी कर ली. श्रृंगीनारी धाम की स्थापना श्रृंगी ऋषि ने किया था।
यह मान्यता है कि पौराणिक स्थल श्रृंगीनारी में मां शांता ने देवी का एक भव्य मंदिर स्थापित किया। मंदिर के प्रमाण त्रेता युग से मिलते हैं। लाखों लोगो के श्रद्धा व विश्वास का प्रतीक बन चुके इस मंदिर से मां के भक्तों को अगाध आस्था है। वर्ष के हर मंगलवार को यहां मेला लगता है।
त्रेता युग में मनोरमा नदी के तट पर राजा दशरथ ने मखौड़ा में पुत्रेष्ठ यज्ञ कराया, जो आषाढ़ माह के अंतिम मंगलवार को समाप्त हुआ था। यज्ञ के प्रधान आचार्य श्रृंगी ऋषि की पत्नी शांता देवी इसी स्थान पर 45 दिनों तक पिंडी स्थापित कर शक्ति की आराधना की थी, इन्हीं पिडिंयों वाले स्थान पर अब मंदिर स्थापित है।

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