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निजी अस्पताल में उपचार के दौरान विवाहिता की कथित मृत्यु का मामला

निजी अस्पताल में उपचार के दौरान विवाहिता की कथित मृत्यु का मामला

 

परिजनों ने चिकित्सक व अस्पताल प्रशासन पर लगाया लापरवाही का आरोप, हत्या का मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही की मांग, धरने पर बैठे मृतका के परिजन व जनप्रतिनिधि

एसडीएम बृजेश चौधरी व बानसूर विधायक देवी सिंह शेखावत की समझाईश से भी नहीं माने प्रदर्शनकारी

कस्बा स्थित एक निजी अस्पताल में रविवार शाम पथरी के ऑपरेशन के दौरान एक विवाहिता की मृत्यु का मामला गहराता ही जा रहा है। इस सम्बंध में मृतका के परिजनों ने सम्बंधित चिकित्सक समेत अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही व उन्हें गुमराह करने का आरोप लगाते हुये मामले में कड़ी कार्यवाही की मांग की। साथ ही धरने पर बैठ गये। यही नहीं सोमवार दोपहर शुरू हुआ यह प्रदर्शन दिन भर जारी रहा। जबकि देर शाम समाचार लिखे जाने तक भी मृतका के परिजन व प्रदर्शनकारी आरोपित चिकित्सक के विरूद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार किये जाने एवं अस्पताल के ऊपर कार्यवाही की मांग को लेकर अड़े रहे। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी अस्पताल के सामने ही धरने पर बैठ गये।

क्या है मामला :- इस सम्बंध में बानसूर क्षेत्र के ग्राम खेड़ा निवासी दिलीप सिंह पुत्र ग्यारसी लाल मेघवाल ने स्थानीय पुलिस थाने में रिपोर्ट दी है कि उसने अपनी पत्नी सरिता देवी (32) को विगत 28 सितम्बर की शाम करीब 6-7 बजे कोटपूतली के एक निजी अस्पताल में पथरी के ईलाज के लिये भर्ती कराया था। जिसकी कई जाँच करवाने के बाद 29 सितम्बर को शाम करीब 04.30-05 बजे अस्पताल के चिकित्सक समेत अन्य चिकित्सकों व स्टॉफ सदस्यों ने कहा कि जाँच सामान्य है। मरीज का ऑपरेशन करना पड़ेगा। जिसके लिये हम ऑपरेशन थियेटर में लेकर जा रहे है। करीब 3-4 घण्टे बाद चिकित्सक व ओटी के अन्य मरीज तो बाहर आ गये, लेकिन परिवादी की पत्नी सरिता के बारे में कोई संतोषप्रद जानकारी नहीं दी गई एवं ना ही उसके पति को अन्दर जाने दिया गया। इस पर पीड़ित ने अपने अन्य परिजनों को भी अस्पताल में बुला लिया। जिनके आने पर डॉक्टर ने कहा कि मरीज की स्थिति ज्यादा खराब है उसे किसी अन्य अस्पताल में दिखाओ एवं बिना सहमति के ही एम्बुलेंस बुलाकर मरीज को उसमें लिटा दिया। इस पर परिजन मरीज को चंदवाजी के निम्स अस्पताल लेकर पहुंचे तो वहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों का आरोप है कि सरिता की मृत्यु अस्पताल में ही चिकित्सकों की लापरवाही के चलते उपचार के दौरान हो गई थी। लेकिन अस्पताल प्रशासन ने उन्हें गुमराह करते हुये जबरन मरीज को रैफर कर दिया।

पुलिस पर लगाया एम्बुलेंस को घेरने का आरोप :- यहीं नहीं मृतका के पति दिलीप सिंह ने स्थानीय थाना पुलिस पर भी एम्बुलेंस को घेरने का आरोप लगाया है। पीड़ित ने बताया कि जब वह अपनी पत्नी के शव को लेकर वापस आ रहे थे तो चौकी गोरधनपुरा पहुंचने पर पुलिस ने दोनों गाड़ी आगे एवं दो गाड़ी एम्बुलेंस के पीछे लगाकर जबरन राजकीय बीडीएम जिला अस्पताल में लेकर आ गये एवं मृतका के शव को पोस्टमार्टम के लिये मोर्चरी में रखवा दिया। पीड़ित ने यह भी बताया कि उसकी पत्नी सरिता की मृत्यु अस्पताल के चिकित्सकों एवं स्टॉफ सदस्यों की लापरवाही के कारण हुई है। पीड़ित परिवार द्वारा इसका कारण पुछने पर अस्पताल प्रशासन ने उन्हें कोई भी संतोषप्रद जवाब देने की बजाय गाली गलौच कर अस्पताल से बाहर निकाल दिया।

चिकित्सक के विरूद्ध कार्यवाही पर अड़े धरणार्थी :- घटना की सूचना मिलते ही मृतका के परिजनों समेत मेघवाल विकास समिति के जिलाध्यक्ष एड. सुबेसिंह मोरोड़िया, युवा कांग्रेस के पूर्व प्रदेश सचिव तारा पूतली, पार्षद उमेश आर्य, एनएसयुआई के नेता जीतू आर्य, आकाश भाईजी समेत सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी अस्पताल में एकत्रित हो गये। जिसके बाद नारे लगाते हुये राजकीय बीडीएम जिला अस्पताल में जमा हो गये। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मृतका के परिजनों व उनकी मांग किसी भी प्रकार के मुआवजे अथवा नौकरी की नहीं है। इस सम्बंध में वे अस्पताल प्रशासन व लापरवाह चिकित्सक के विरूद्ध मामला दर्ज कर कार्यवाही की मांग कर रहे है। राजकीय बीडीएम जिला अस्पताल में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी व महिलायें भी एकत्रित हो गई। जिन्होंने पुलिस व प्रशासन पर बिना परिजनों की सहमति के मृतका के पोस्टमार्टम के जबरन प्रयास का आरोप भी लगाया। इस दौरान कोटपूतली एसएचओ राजेश शर्मा, सरूण्ड एसएचओ मौहम्मद इमरान खान के नेतृत्व में भारी मात्रा में पुलिस जाप्ता भी राजकीय अस्पताल में जमा रहा।

एसडीएम व बानसूर विधायक पहुंचे मौके पर :- वहीं दुसरी ओर सोमवार देर शाम एसडीएम बृजेश चौधरी व बानसूर विधायक देवी सिंह शेखावत भी मौके पर पहुंचे। जहाँ उन्होंने प्रदर्शनकारियों व मृतका के परिजनों के समक्ष ही अस्पताल के निदेशक से घटना की जानकारी ली। साथ ही प्रदर्शनकारियों से पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद कार्यवाही की बात कहते हुये समझाईश कर शव के पोस्टमार्टम के लिये सहमति देने की बात कही। लेकिन प्रदर्शनकारी तत्काल मामला दर्ज कर कानूनी कार्यवाही के लिये अड़े रहे। साथ ही इस सम्बंध में एसडीएम को मृतका के ईलाज के दौरान का समस्त रिकॉर्ड कब्जा लेकर निष्पक्ष जाँच करने एवं अस्पताल की मान्यता रद्द कर सम्बंधित चिकित्सक व अस्पताल प्रशासन के विरूद्ध कार्यवाही की मांग भी की। देर शाम समाचार लिखे जाने तक प्रदर्शनकारी धरने पर बैठे रहे। इस दौरान मृतका के परिजनों समेत युवा कांग्रेस के विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष अशोक कसाना, पार्षद प्रतिनिधि दीपक कटारिया, शाहरूख टांक, धर्मवीर राठौड़, भूपसिंह पूतली, देशराज आर्य, गोलू पूतली, राजन शर्मा, राजू खटाना, अक्की सिंघल, रामजीलाल सैनी, कर्मवीर राजपूत, दुर्गेश सिंघल, दिलीप नयाबास, प्रवीण, राहुल समेत अन्य प्रदर्शनकारी धरने पर बैठे रहे।

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