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सुसनेर : शारदीय नवरात्रि 2024 घटस्थापना समय।

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27.9.2024

शुक्रवार 

सत्यार्थ न्यूज़ 

रिपोर्टर मनोज कुमार माली सुसनेर 

• सोयत रोड स्थित श्री चिंताहरण बालाजी मंदिर पुजारी पंडित विजय शर्मा के अनुसार।

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सुसनेर नगर के मिली जानकारी 

सोयत रोड स्थित श्री चिंताहरण बालाजी मंदिर पुजारी पंडित विजय शर्मा के अनुसार घटस्थापना पर इंद्र योग समेत बन रहे हैं ये अद्भुत संयोग प्राप्त होगा अक्षय फलइस वर्ष शारदीय नवरात्र 03 अक्टूबर से लेकर 11 अक्टूबर तक है। इसके अगले दिन यानी 12 अक्टूबर को दशहरा है। आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर हस्त और चित्रा नक्षत्र का संयोग बन रहा है। इन योग में मां दुर्गा की पूजा करने से अक्षय फल की प्राप्ति होगी।

हिंदु धर्म में शारदीय नवरात्र का विशेष महत्व है। इस दौरान जगत जननी आदिशक्ति मां दुर्गा और उनके नौ शक्ति रूपों की पूजा की जाती है। साथ ही उनके निमित्त नवरात्र का व्रत रखा जाता है। धार्मिक मत है कि जगत जननी मां दुर्गा की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। साथ ही घर में सुख, समृद्धि एवं खुशहाली आती है। शारदीय नवरात्र के पहले दिन यानी घटस्थापना तिथि पर दुर्लभ इंद्र योग का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही कई अन्य मंगलकारी योग बन रहे हैं। इन योग में जगत की देवी मां दुर्गा की पूजा करने से साधक को अक्षय फल की प्राप्ति होगी।

हिंदू पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्र की शुरुआत 03 अक्टूबर से हो रही है। आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 03 अक्टूबर को देर रात 12 बजकर 18 मिनट से शुरू होगी और 04 अक्टूबर को देर रात 02 बजकर 58 मिनट पर समाप्त होगी। सनातन धर्म में सूर्योदय से तिथि की गणना की जाती है। अतः गुरुवार 03 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र की शुरुआत होगी।

शारदीय नवरात्रि 2024 घटस्थापना समय

शारदीय नवरात्रि के शुभ अवसर पर घटस्थापना मुहूर्त 03 अक्टूबर को सुबह 06 बजकर 15 मिनट से लेकर सुबह 07 बजकर 22 मिनट तक है। वहीं, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक है। इन दोनों शुभ योग समय में घटस्थापना कर सकते हैं।

शारदीय नवरात्रि शुभ योग।

ज्योतिषियों की मानें तो शारदीय नवरात्र के पहले दिन यानी घटस्थापना के शुभ अवसर पर दुर्लभ इंद्र योग का निर्माण हो रहा है। इस योग का समापन 04 अक्टूबर को सुबह 04 बजकर 24 मिनट पर होगा। इसके अलावा, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर शिववास योग का निर्माण हो रहा है। इस दिन भगवान शिव कैलाश पर जगत की देवी मां गौरी के साथ विराजमान रहेंगे। इन योग में जगत जननी आदिशक्ति मां दुर्गा की पूजा करने से सकल मनोरथ सिद्ध होंगे।

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