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अलवर – बांघोला बांध बुझाता था कभी राजगढ़ कस्बे की प्यास अब खुद ही प्यास

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न्यूज़ रिपोर्टर जितेंद्र कुमार यादव

जिला अलवर

बांघोला बांध बुझाता था कभी राजगढ़ कस्बे की प्यास अब खुद ही प्यास

 

राजगढ़ कस्बे में बांदीकुई मार्ग स्थित नया बात से भैरू घाटी की और आने वाली सड़क के माध्यम प्राचीन बाघोला बांध देख रेख के अभाव में अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है राजगढ़ के प्रथम शासक गुर्जर वंशीय महाराज बाघ sing ने सन 145 ईस्वी में बाघोला बांध का निर्माण कराया था बाघोला बांध आज भी भागना अवस्था मैं मौजूद है उसकी बड़ी-बड़ी पाल की दीवारें और उसका विशाल उदर की गाथा सुन रही है बांध के पाल के नीचे बनी बड़े-बड़े पत्थरों की सीढ़ियां है जो की क्षतिग्रस्त हो चुकी है कीवदती हैं महाराजा बाद सिंह कलादाता के महान शांतेश्वर योगीराज भू रशीद के अन्य भक्त थे उन्होंने अपने गुरु योगीराज से गंगा स्नान जाने की चर्चा की और इस पर उन्होंने आशीर्वाद दिया कि मैं तुम्हें यहीं पर गंगा ला दूंगा तुम एक बांध का निर्माण करोओ स्थान समय व लगन आदि शोध का निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ बाबा भूरा सिद्ध के वचन थे कि यह निर्माण रात रात में चकिया चलने से पूर्व समाप्त हो जाए अन्यथा बाध अधूरा रह जाएगा और गंगा नहीं आएगी कहते हैं कि महात्मा ने अपनी अलौकिक शक्ति इसमें लगा दी दिव्य शक्ति कार्य करने लगी बांध का निर्माण कार्य समाप्त होने लगा भाग्य वर्ष किसी महिला ने समय से पूर्व ही पीसने के लिए चक्की चला दी दिव्य शक्तियां सवेरा जान के निकट लौट गई और निर्माण कार्य वहीं रुक गया वह बांध अधूरा रह गया गंगा नहीं आई आज भी उक्त बांध की ऊंची ऊंची दीवारें खड़ी है और बांध वीरान है एडवोकेट सुरेंद्र माथुर किट्टू का कहना है कि प्रशासन को बाघोला बांध के मूल स्वरूप को लाने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए

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