किसान आंदोलन के जनक रूपा की कृपा जी धाकड़ को दी श्रद्धांजलि
5 जून से विभिन्न संगठनों द्वारा दी जा रही श्रद्धांजलि—
भीलवाड़ा जिले के बिजोलिया किसान आंदोलन से प्रेरित होकर रूपा जी कृपा जी धाकड़ ने 1921- 22 में तत्कालीन जागीरदार अनूप सिंह द्वारा किसानों पर लगाए अनुचित टैक्स लगाने के खिलाफ थे। भीलवाड़ा की सीमा पर मेनाल क्षेत्र में किसानों ने संगठित होकर मीटिंग रखी।उन्होंने किसानों के ऊपर लगाए गए टैक्स को हटाने के लिए निवेदन किया।उसके लिए वहां के तत्कालीन जागीरदार के बीच एवं विजय सिंह पथिक जी की मध्यस्थता में अजमेर में समझौता भी हुआ था लेकिन बाद में वह समझौता लागू नहीं हो पाया। मजबूर होकर यहां के किसानों ने सत्याग्रह की शुरुआत की। बिजोलिया के किसान सत्याग्रह की सफलता के साथ-साथ आसपास के इलाकों में किसान संगठित होने लग गए थे। उन्होंने बिजोलिया के पास मेवाड़ क्षेत्र में बेगूं नाम का एक बड़ा ठिकाना है। दूसरे ठिकानों की तरह इस ठिकाने में भी बेगार और अनुचित लगाने प्रचलित थी। यहाँ के किसान जागीरदारों के इन अत्याचारों से मुक्ति पाना चाहते थे। उन्होंने ठिकाने से इस सम्बन्ध में बहुत प्रार्थना की परन्तु ठिकाने से उनकी एक भी माँग मानने से इन्कार कर दिया। अंग्रेज भी किसान आंदोलन को कुचलना चाहते थे।बेगू किसान आंदोलन का नेतृत्व रामनारायण चौधरी कर रहे थे।उन्होंने तत्कालीन जागीरदार से बात कर किसानों की समस्याएं बताई। अंग्रेजों के दबाव के चलते समझौता लागू नहीं हो पाया।बदले में ठिकाना दमन पर उतर गया। मंडावरी में शान्ति से बैठे लोगों पर गोलियां चला दी थी। सरकार ने मिस्टर ट्रैंच को बेगूं के किसानों के मामले पर विचार करने के लिए नियुक्त किया था। ट्रैंच से मिलने के लिए 500 किसान गाँव गोविन्दपुरा में इकट्ठे हुए थे। रूपाजी और किरपा जी उन किसानों का नेतृत्व कर रहे थे। लोग ट्रैच से मिल ही नहीं सके। सारा गाँव घेर लिया गया ट्रेच फौज के आगे-आगे चल रहा था। फौज की इस चढ़ाई के समाचार सुनकर रूपाजी और किरपाजी़ स्थिति को समझने के लिए घरों से बाहर आए। बाहर आते ही फौज ने उन पर गोलियां चलानी शुरू करदी। दोनों का शरीर वहीं छलनी हो कर धराशायी हो गया। दोनों नेता यही ब्रह्मलीन हो गए। रूपाजी और किरपाजी दोनों जाति से धाकड़ थे। गोविंदपुरा में उनका स्मारक बनाया हुआ है। यहां इस वर्ष जून माह की 5 व6 तारीख को 2 दिन तक उनकी समृत्ति में मेला लगा। हर वर्ष यहां सामाजिक संगठन व जनप्रतिनिधि व समाज के लोग श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए पहुंचते हैं।
















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