शरद पूर्णिमा को महारास रचाया जिसमें भोले बाबा भी गोपी बनकर आए महारास रचाया, मथुरा में जाकर कंस का वध किया। उज्जैन के सांदीपनि आश्रम ६४कलाओ की विद्या सीख द्वारिका आयें तत्पश्चात रुक्मिणी जी विवाह श्री कृष्ण जीके साथ हुआ इस प्रकार भगवान के विभिन्न अवतारों कीअनेक कथाओं का वर्णन करते हुए। इसी क्रम में आज सुदामा चरित्र श्रोताओं को श्रवण कराने के पश्चात हवन-पूजन कर विशाल भण्डार किया जाएगा।
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