*रेंजर की मिलीभगत से मांची क्षेत्र के वन संपदाओं का हो रहा दोहन,*
*पेड़ कटान, वन भूमि पर कब्जा, जंगली पत्थरों का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग*
*सोनभद्र*/सत्यनारायण मौर्य/संतेश्वर सिंह

सोनभद्र के मांची वन रेंज के अंतर्गत कई वन क्षेत्रों में रेंजर और बिट फारीश गार्ड के सह पर बड़े पैमाने पर वन संपदाओं का दोहन बदस्तूर जारी है। पूरे वन क्षेत्र में वन भूमि पर कब्जा, जंगली पत्थरों का विभिन्न विभागों द्वारा पक्के वर्ग के कार्यों में प्रयोग धड़ल्ले से हो रहा है जिसमे रेंज अधिकारी सहित कई दरोगा भी है शामिल फिर भी विभाग कार्यवाही की बजाय पीठ थप थपा रहा है भ्रष्ट वन अधिकारियों को जो गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है।
आप को बता दें कि मांची रेंजर और दरोगा के मिली भगत के द्वारा अपने बीट क्षेत्र के जंगलों में वन संपदाओं का दोहन चरम पर है जिसमे रेंजर की भूमिका अहम बताई जा रही है जिससे वन दरोगा के बीट क्षेत्र तड़पा के जंगलों और सोनभद्र चंदौली सीमा पर स्थित वन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर वन भूमि पर कब्जे हुए है कई बार इसकी शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी की गई लेकिन माची रेंजर नवीन राय द्वारा भ्रष्ट वन दरोगा को बार बार क्लीन चिट देकर अपनी भ्रष्ट मंशा को जाहिर किया है जिससे ये साफ होता है कि वन संपदाओं के दोहन में रेंजर की भूमिका काफी संदिग्ध प्रतीत हो रही है। शिकायतों के निस्तारण में विभाग द्वारा बार बार जांच अधिकारी नवीन राय को बनाना समझ से परे है जांच अधिकारी द्वारा हर बार भ्रष्ट वन दरोगा को बचाने का कार्य करते रहे है।
सूत्रों की माने तो वन विभाग द्वारा वन संपदाओं के दोहन से मिलने वाली काली कमाई से अपनी अपनी जेबें भरने के साथ ही उच्च अधिकारियों तक पहुंच रही है।
बहुत ही चिंता का विषय है कि अगर जंगल के रक्षक ही भक्षक बन जाएं तो कैसे होगी वन भूमि, पेड़ पशु सहित अन्य वन संपदाओं की सुरक्षा जबकि सरकार जंगलों को हरा भरा उनके विकास के लिए भारी बजट दे रही है साथ ही हर अधिकारी चाहे छोटे हों या बड़े एक निश्चित मानदेय भी दे रही है फिर भी वनों का दोहन बदस्तूर जारी है।
ऐसे भी सामाजिक संगठनों क्षेत्रवासियों ने जिलाधिकारी सोनभद्र का ध्यान आकृष्ट कराते हुए लापरवाह भ्रष्ट वन कर्मियों के कार्यों की उच्चस्तरीय समिति गठित कर जांच करवाकर दोषी लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।

















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