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महर्षि वाल्मीकि जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं।

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सत्यार्थ न्यूज़ : संस्कृत के आदि कवि, “रामायण” महाकाव्य के रचयिता “महर्षि वाल्मीकि जी” की गोस्वामी तुलसीदास जी ने “श्री रामचरितमानस” के प्रारम्भिक चौथे श्लोक में निम्न स्तुति हनुमान जी के संग की है –

सीताराम गुण ग्राम पुण्यारण्य विहारिणौ।

वन्दे विशुद्ध विज्ञानौ कवीश्वरकपीश्वरौ।।

श्रीसीताराम जी के गुण समूह (गुण ग्राम) रूपी पुण्यवन में सहज ही विहार करना जिनका स्वभाव है और जो विशुद्ध (अमल, दोष रहित) विज्ञान से परिपूर्ण हैं। मैं उन कवीश्वर महर्षि वाल्मीकि तथा कपिश्रेष्ठ हनुमान् जी की सादर वंदना करता हूँ।।

पुनः महर्षि वाल्मीकि जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं।

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