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शिक्षा मित्रों  की आंखों में आंसू और दिल में दर्द, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं वादा खिलाफी के विरुद्ध लखनऊ मे गरजेंगे शिक्षा मित्र

रिपोर्टर (रावेंद्र केसरवानी, रोहन प्रयागराज उत्तर प्रदेश)  शिक्षा मित्रों  की आंखों में आंसू और दिल में दर्द, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं

वादा खिलाफी के विरुद्ध लखनऊ मे गरजेंगे शिक्षा मित्र

कौंधियारा। परिषदीय विद्यालयों में नौनिहालों का भविष्य सवार रहे शिक्षामित्र करीब डेढ़ लाख की संख्या में हैं। यह शिक्षामित्र समायोजन निरस्त होने के बाद 40 हजार रुपये वेतन से सीधे 10 हजार रुपये मानदेय पर काम करने को मजबूर हो गए।
विकासखंड कौंधियारा के अंतर्गत शिक्षा मित्र पद पर कार्य कर रहे अब्दुल मोकीत सिद्दीकी जोकि ब्लाक अध्यक्ष पद पर भी कार्यरत हैं, जिन्होंने शिक्षा मित्रों की दुःख भरी पीड़ा बताते हुए कहा कि शिक्षामित्रों का उदय 1999 मे भाजपा सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री रहे मुरली मनोहर जोशी के द्वारा जनपद प्रयागराज से हुआ था । फिर बसपा सरकार में दो वर्षीय दूरस्थ बीटीसी प्रशिक्षण कराया गया और सपा सरकार मे 2014 मे शिक्षा मित्रों के जीवन की सुखमय शुरुआत हुई सब कुछ ठीक चलता रहा और 2017 में सुप्रीमकोर्ट के द्वारा यह कह कर समायोजन निरस्त कर दिया कि शिक्षा मित्र खुली भर्ती से नही आए हैं, और नही इनके पास टीईटी की योग्यता ही है । इस परिपेक्ष्य में अब्दुल मोकीत ने यह बताया कि समायोज से पूर्व लगभग हजारों की संख्या मे शिक्षा मित्र टीइटी क्वालीफाइड था और उसी कटेगरी में वह भी आते हैं। सात बार टेट पास कर चुके मोकित का कहना है कि सरकार की गलत नीतियो की वजह से आज दर दर भटकने को मजबूर हो रहा है शिक्षा मित्र । उन्होंने यह भी बताया कि समायोजन निरस्त होने के बाद माननीय कोर्ट ने कहा था कि सरकार उम्र में छूट के साथ साथ वेटेज देकर खुली भर्ती मे मौका दे । उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पहली 68500 की भर्ती के विज्ञापन में चालीस से पैतालीस प्रतिशत पासिंग मार्क्स की अनिवार्यता थी, जबकि परीक्षा तीस से तैतीस प्रतिशत पर कराई और परीक्षा के बाद माननीय कोर्ट द्वारा कहा गया कि खेल के बीच मे नियम नही बदल सकता और पूरी भर्ती चालीस से पैतालीस प्रतिशत पर करने का आदेश पारित कर दिया ।जिसमे लगभग 27000 अभ्यर्थी न मिलने के कारण शीट खाली रह गई और दूसरी बड़ी भर्ती 69000 की निकाली गई,जिसमे विज्ञापन के समय कोई पाशिंग मार्क का जिक्र नही था ।जिसमें शिक्षा मित्रों में काफी खुशी की लहर थी, जबकि परीक्षा के दो दिन बाद पासिंग मार्क्स साठ से पैसठ प्रतिशत रख दिया गया । मरता शिक्षा मित्र अपने भविष्य को सुरक्षित एवं संरक्षित कराने हेतु माननीय न्यायालय की शरण मे गए जिसमे माननीय न्यायालय द्वारा यह आदेश पारित कर दिया जाता है कि सरकार का नीतिगत फैसला है, खेल के बीच मे नियम बदल सकता है । अब माननीय न्यायालय के दोहरे आदेश से शिक्षा मित्र सरकार और न्यायालय में सामंजस्य स्थापित करने मे लगा हुआ है । अब्दुल मोकीत ने बताया कि इस महंगाई के दौर मे जुलाई 2017 से आज तक एक रुपया तक नही बढ़ सका ।जिससे शिक्षा मित्र अपना जीविकोपार्जन नही कर पा रहा है। पूरे उतर प्रदेश का मरता शिक्षा मित्र आत्म हत्या करने पर मजबूर है । अब्दुल मोकीत ने बताया कि 5 सितम्बर को लखनऊ इको गार्डेन मे होने वाले आजीविका बचाओ कार्यक्रम मे शिक्षामित्र अपने सर पर कफन बांध कर आर – पार करने की तैयारी कर रहा है । आगामी दिवसों में प्रदेश सरकार शिक्षा मित्रो का खोया सम्मान वापिस नही करती तो आगामी चुनावों में इसका असर जरूर दिखलाई पड़ेगा।

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