रिपोर्टर ( रावेंद्र केसरवानी, रोहन प्रयागराज उत्तर प्रदेश) भूमिहीन खेतिहर मजदूरों में सरकारी जमीनो का आवंटन करो वरना कुर्सी खाली करो
डान के जमीन और उद्योगों के राष्ट्रीयकरण अभियान से जुड़ रहे हैं भूमिहीन खेतिहर मजदूर
(जारी प्रयागराज) डा. अम्बेडकर वेलफेयर नेटवर्क (डान) के तत्वाधान में यमुनापार की तहसील करछना, विकासखंड कौधियारा स्थित ग्रामसभा पवर में डान द्वारा सदस्यता अभियान चलाया गया। सदस्यता अभियान में पवर ग्रामसभा के सैकड़ो महिलाएं और पुरुष उपस्थित रहे। बैठक की अध्यक्षता डान के संस्थापक उच्च न्यायालय के अधिवक्ता आईपी रामबृज ने की।
बैठक को संबोधित करते हुए डान के संस्थापक आईपी रामबृज ने उपस्थित भूमिहीन खेतिहर मजदूरो को बताया कि प्रयागराज में सन सत्तर और अस्सी के दरमियान चकबंदी आई थी। चकबंदी के दौरान प्रत्येक ग्रामसभा में लगभग पचास से सौ बीघा तक की ग्रामसमाज की जमीने जैसे बंजरा, परती, उसर, सीलिंग की जमीने निकाल कर आई थी। तत्समय अनुसूचित जाति के भूमिहीन खेतिहर मजदूर अनपढ़ और निरक्षर थे जिसके चलते तहसील से लेखपाल, कानूनगो, तहसीलदार जब चकबंदी करके चले गए तो उसके एक सप्ताह से पन्द्रह दिन बाद क्षेत्रीय जमीदार जिनकी भूमिधरी जमीन से बंजर, परती व ऊसर जमीनें निकलकर आई उसे वो सब पुनः अपनी भूमिधारी जमीन में मिलकर आज भी जोत बो रहे हैं।
यमुनापार में डान का एकसूत्रीय कार्यक्रम केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार से है कि सर्वप्रथम जमीन और उद्योगों का राष्ट्रीयकरण किया जाए क्योंकि राष्ट्रीयकरण करने से जमीन सरकार की हो जाएगी और जमीन पर जो खेती-बारी करेगा जमीन सरकार के द्वारा उसे आवंटित की जाएगी जिसके बाबत भूमिहीन खेतिहर मजदूर उगाई गई फसल के एवज में कुछ प्रतिशत कर सरकार को देना पड़ेगा क्योंकि आज की तारीख में जो सरकारी जमीनें क्षेत्रीय स्तर पर है उन जमीनो को क्षेत्रीय भूमाफिया या कहें जमीदार कब्जा किए हुए हैं और प्लाटिंग कर विक्रय कर रहे है। डान केन्द्र और राज्य सरकार से मांग करता है कि यमुनापार के गांवो में ग्रामसमाज की जो जमीने है क्षेत्रीय भूमाफियाओं से खाली कराकर भूमिहीन खेतिहर मजदूरो में जिनके पास घर नहीं है उनमें आवासीय पट्टे तथा जिसके पास खेती बारी करने की जमीन नहीं है उनमें कृषि कार्य का पट्टा किया कराया जावे क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में भूमिहीन खेतिहर मजदूरों की स्थिति यह है कि ज्यादातर भूमिहीन खेतिहर मजदूर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति से आते हैं ज्यादातर लोगों के घर के अगवारे पिछवाड़े साग सब्जी भी उगाने की जमीन नहीं है। अगर किसी कारणवश भूमिहीन खेतिहर मजदूरों के एक साल, दो साल व तीन साल के बच्चे मर जाए या कहें गुजर जाए तो ऐसे भूमिहीन खेतिहर मजदूरों के पास इतनी भी जमीन नहीं है कि वे मृत बच्चे को अपनी भूमिधारी जमीन में दफना सके। ऐसे भूमिहीन खेतिहर मजदूर अपने मृत बच्चों को कही नहरा, कही बहरा तो कही नदी के किनारे दफनाने का काम करते हैं।
डान संस्थापक आईपी रामबृज का कहना है कि 26 नवम्बर को संविधान दिवस है। उत्तर प्रदेश सरकार संविधान दिवस से पूर्व भूमिहीन खेतिहर मजदूरों में जमीनों का आवंटन नहीं करती है तो लगभग दस हजार के करीब भूमिहीन खेतिहर मजदूर मुख्यमंत्री आवास पर अनशन के लिए बाध्य होंगे।
















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