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गाजियाबाद से बाया फर्रुखाबाद होते हुए सीधे कानपुर के लिए भर सकेंगे फर्राटे : एनएचएआई

न्यूज रिपोर्टर विकाश बाबू शाक्य

गाजियाबाद से सीधे बाया फर्रुखाबाद होते हुए कानपुर के लिए भर सकेंगे फर्राटे : एनएचएआई

 

सत्यार्थ न्यूज उत्तर प्रदेश : नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने अब गाजियाबाद से सीधे कानपुर तक फर्राटे भरने की तैयारी शुरू कर दी है। दरअसल एनएचएआई गाजियाबाद टू कानपुर एक्सप्रेस-वे प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। एनएचएआई का अलीगढ़ खंड इस एक्सप्रेस-वे की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर रहा है। इस प्रोजेक्ट को ग्रीन फील्ड का नाम दिया गया है। प्रस्तावित एक्सप्रेस वे गाजियाबाद और हापुड़ को कनेक्ट करेगा और सीधे कानपुर रिंग रोड पर ले जाकर मिला देगा।

मसूरी से शुरू होगा नया एक्सप्रेस-वे, डीएमई और ईपीई भी जुडेंगे
गाजियाबाद से कानपुर तक प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे को दिल्ली – मेरठ एक्सप्रेस-वे के साथ ही ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे से कनेक्ट करते हुए मसूरी से शुरू किया जाएगा। आगे जाकर एक्सप्रेस-वे हापुड़ बाईपास पर फिर कनेक्ट होगा, ताकि गाजियाबाद के अलावा मेरठ, दिल्ली और हरियाणा की ओर से आने वाले वाहन भी सीधे एक्सप्रेस-वे पर जा सकें। हापुड़ बाईपास पर कनेक्टिविटी देकर गढ़, गजरौला और अमरोहा की ओर से आने वाले वाहनों को भी एक्सप्रेस-वे का एक्सेस मिल सकेगा। मेरठ की ओर से आने वाले वाहनों को भी हापुड़ बाईपास पर कनेक्ट होना आसान होगा।

380 किमी लंबा एक्सप्रेस- वे इन जिलों को जोड़ेगा
380 किमी का यह एक्सप्रेस-वे गाजियाबाद और कानपुर की बीच की दूरी को समेटकर साढ़े पांच घंटे की कर देगा। अभी गाजियाबाद से कानपुर की यात्रा करने में करीब 11 घंटे का समय लगता है। ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे पर 15 हजार करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है। शुरूआत में यह एक्सप्रेस-वे केवल चार लेन का होगा, हालांकि भूमि अधिग्रहण आठ लेन वाले एक्सप्रेस-वे के हिसाब से किया जाएगा ताकि भविष्य में कोई परेशानी न आने पाए। एक्सप्रेस-वे के साथ अंडरपास, फ्लाईओवर और सर्विस रोड की भी व्यवस्था रहेगी ताकि स्थानीय लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो। गाजियाबाद और हापुड़ के बाद एक्सप्रेस-वे से गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, कासगंज, फर्रूखाबाद, कन्नौज, कानपुर और उन्नाव जैसे जिलों को जोड़ेगा।

आपस में कनेक्ट होंगे तमाम एक्सप्रेस-वे
ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे लखनऊ और कानपुर के बीच निर्माणाधीन एक्सप्रेस-वे से उन्नाव और कानपुर के बीच में कनेक्ट होगा। दूसरी ओर एनएचएआई ने दिल्ली – मेरठ एक्सप्रेस-वे को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने की तैयारी शुरू कर दी है। इससे दिल्ली एनसीआर के लोगों को गंगा एक्सप्रेस-वे को एक्सेस करने में आसानी होगी। ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे और दिल्ली – मेरठ एक्सप्रेस- वे को ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे की सीधी कनेक्टिविटी जब पहले ही मिल चुकी होगी।

क्या होता है ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे

ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे निर्माण शहरों से हटकर किया जाता है। दो शहरों के बीच दूरी कम करने के लिए इसे सीधा रखने का प्रयास किया जाता है। जंगल से सीधे गुजरने के कारण ही इस ग्रीन फील्ड का नाम दिया जाता है। शहरों से कुछ दूरी पर रहने क‌े कारण ऐसे एक्सप्रेस-वे स्थानीय ट्रैफिक से बचे रहते हैं, जिससे लंबी दूरी के वाहनो को अधिक गति पर दौड़ाया जा सकता है। गति कम होने या यूं कहें कि वाहन फंसने के कारण प्रदूषण ज्यादा होता है, ग्रीन फील्ड में वैसा होने की संभावना भी नहीं रहती।
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