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बीकानेर-बीकेएस अयंगर यूरोप में योग फैलाने में वे सबसे आगे थे : कालवा

सवांददाता मीडिया प्रभारी मनोज मूंधड़ा बीकानेर श्रीडूंगरगढ़

बीकेएस अयंगर यूरोप में योग फैलाने में वे सबसे आगे थे : कालवा

श्रीडूंगरगढ़ कस्बे की ओम योग सेवा संस्था के निदेशक योगाचार्य ओम प्रकाश कालवा ने सत्यार्थ न्यूज चैनल पर 81 वां अंक प्रकाशित करते हुए अयंगर योगा के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया। अयंगर के गुरु टी. कृष्णमाचार्य थे, जिन्हें आधुनिक योग के पितामह के रूप में जाना जाता है। बीकेएस अयंगर की 1966 की पुस्तक लाइट ऑन योगा जिसे अक्सर ‘योग की बाइबिल’ कहा जाता है। लाइट ऑन योग, लाइट ऑन प्राणायाम लाइट ऑन योग सूत्र ऑफ पतंजलि’ लाइट ऑफ योगा’ का 18 भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। बेल्लूर कृष्णमचारी सुंदरराज अयंगार ( १४ दिसम्बर १९१८ – २० अगस्त २०१४) भारत के अग्रणी योग गुरु थे। उन्होंने अयंगारयोग की स्थापना की तथा इसे सम्पूर्ण विश्व में मशहूर बनाया। सन २००२ में भारत सरकार द्वारा उन्हें साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में पद्म भूषण से तथा 2014 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। ‘टाइम’ पत्रिका ने 2004 में दुनिया के सबसे प्रभावशाली 100 लोगों की सूची में उनका नाम शामिल किया था। अंयगार ने जिन लोगों को योग सिखाया, उनमें जिद्दू कृष्णमूर्ति, जयप्रकाश नारायण, येहुदी मेनुहिन जैसे नाम सम्मिलित हैं। आधुनिक ऋषि के रूप में विख्यात अयंगार ने विभिन्न देशों में अपने संस्थान की 100 से अधिक शाखाएं स्थापित की। यूरोप में योग फैलाने में वे सबसे आगे थे। कर्नाटक के बेल्लूर में 1918 में पैदा हुए अयंगार 1937 में महाराष्ट्र के पुणे चले आए और योग का प्रसार करने के बाद 1975 में योगविद्या नाम से अपना संस्थान शुरू किया जिसकी बाद में देश विदेश में कई शाखाएं खोली गयीं। अयंगर योगव्यायाम के रूप में योग का एक रूप है जिसमें आसन के अभ्यास के माध्यम से भौतिक शरीर के संरचनात्मक संरेखण पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। यह योग की अन्य शैलियों से तीन तरीकों से भिन्न है: सटीकता, अनुक्रम और प्रॉप्स का उपयोग। हर आसन में शरीर संरेखण में सटीकता की मांग की जाती है।

निवेदन

ओम योग सेवा संस्था श्री डूंगरगढ़ द्वारा जनहित में जारी।

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