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अंगदान करें-जीवनदाता बने,अंगदान करके आप भी बचा सकते हैं दूसरों की जिंदगी

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अंगदान करें-जीवनदाता बने,अंगदान करके आप भी बचा सकते हैं दूसरों की जिंदगी

पलवल-03 अगस्त
कृष्ण कुमार छाबड़ा

भारतीय अंगदान दिवस के अवसर पर पलवल डोनर्स क्लब ने पातली गेट स्थित दयानन्द सीनियर सेकंडरी स्कूल मे अंगदान जागरूकता अभियान चलाया । कार्यक्रम का संयोजन क्लब के मुख्य संयोजक आर्यवीर लाॅयन विकास मित्तल और सह संयोजक अल्पना मित्तल ने किया। विकास मित्तल और अल्पना मित्तल ने बच्चों को जागरुक करते हुए बताया कि हर साल 3 अगस्त को भारतीय अंगदान दिवस मनाया जाता है। जिसका उद्देश्य है लोगों को अंगदान के लिए प्रोत्साहित करना होता हैं।अंगदान एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी व्यक्ति के स्वस्थ अंगों और टिशुज को जरूरतमंद व्यक्तियों में प्रत्यारोपित कर दिया जाता है और उनको नई जिंदगी देकर बचाया जा सकता है। एक अंगदानी 8 लोगों की जान बचा सकता है और 75 जिंदगियां सुधार सकता है। अंगदान के जरिए गुर्दे, लिवर, दिल, फेफड़े, पैंक्रियास, आंखों का कॉर्निया, चमड़ी आदि दान कर लोगों की जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
अंग दान दो प्रकार से होता है। अंगदान और टिशू दान। अंगदान में शरीर के अंदरूनी हिस्सों का दान किया जाता है। जबकि ऊतक यानी टिशू दान में आमतौर पर आंख, कान, त्वचा, हड्डी और ह्दय वॉल्व से जुड़ा है। सामान्य तौर पर व्यक्ति की मौत के बाद ही अंगदान किया जाता है, लेकिन कुछ अंगदान और टिशू दान जीवित रहने के दौरान भी कर सकते हैं। उन्होने यह भी बताया कि अंगदान कम होने का सबसे बड़ा कारण यह भी है कि हमारे समाज में अलग-अलग तरह के भ्रम या अंधविश्वास प्रचलित हैं, जैसे कुछ लोग समझते हैं कि अंगदान धर्म व प्रकृति के खिलाफ है। अगले जन्म में बिना अंग के पैदा होंगे। अंगदान के बाद उन्हें मोक्ष नहीं प्राप्त होगा। मृतक का शरीर का आकार संस्कार के लिए खराब न हो जाए। हमें इस तरह की सोच को बदलना होगा। परंतु कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अपने मृत परिजन के अंगदान करते वक्त यह सोचते हैं कि उनके द्वारा किये गये अंगदान  से किसी को मां मिलेगी, किसी को भाई, किसी को बहन और किसी को पिता को नया जीवन मिल सकता हैं। इसलिए हम यह काम जरूर करेंगे। हम सभी को अंगदान के लिए आगे आना चाहिए ताकि जो लोग अस्पतालों में अंगदान का इंतजार करते-करते दम तोड़ रहे हैं उनकी जिंदगी को बचाया जा सके। कार्यक्रम के दौरान अंगदान से संबंधित प्रश्नोत्तरी का भी आयोजन किया गया। जिसमें विजेता बच्चो को पुरस्कृत किया गया।
कार्यक्रम के अन्त में स्कूल के प्रधानाचार्य डा. बिजेन्द्र कुमार गौड़ ने संस्था का धन्यवाद करते हुए कहा कि हम सभी को जीते जीते रक्तदान और जाते जाते अंगदान करना चाहिए।
इस कार्यक्रम के दौरान सैकड़ों बच्चों सहित उप प्रधानाचार्य सुभाषचंद, महेश चन्द शर्मा, महेन्द्र शास्त्री, बिमलेश, ममता, कमलेश, बिमला, श्वेता, सीमा आदि उपस्थित रहे।

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