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बीकानेर-बच्चों को जीवन जीने के संस्कार देवें जीवन को ढोने के नहीं- स्वामी प्रतापपुरी

सवांददाता नरसीराम शर्मा बीकानेर श्रीडूंगरगढ़

बच्चों को जीवन को जीना सिखाएं ढोना नहीं- स्वामी प्रतापपुरी

श्रीडूंगरगढ़ आए पोकरण विधायक, पौधारोपण कर दी प्रकृति के साथ जीने की प्रेरणा।

श्रीडूंगरगढ़ 28 जुलाई 2024। बच्चों को जीवन जीने के संस्कार देवें जीवन को ढोने के नहीं। अभिभावक व गुरूजन उन्हें बतावें की जीवन अनमोल है इसका सदुपयोग करना है। हमारे ऋषियों व सनातन धर्म ने सदैव जीवन जीने की कला सिखाई है। सनातन से इतर जीवन जीने वाले लोग जीवन को ढो रहें है। ये बात रविवार सुबह हाइवे पर खाखी धोरा के पास स्थित सुभाष चंद्र शास्त्री के कृषि फ़ार्म पर आयोजित कार्यक्रम में धर्मगुरू व पोकरण विधायक स्वामी प्रतापपुरी महाराज ने कही। स्वामीजी ने कहा कि व्यक्ति के कर्म सात्विक होंगे तो उन्हें सकारात्मक ऊर्जा मिलेगी। उन्होंने हर हाल में कर्तव्य का पालन करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि किशोर और युवा भारत का भविष्य है और वे अपने कर्तव्य का बोध करें। कर्तव्य का पालन करना ही धर्म का निर्वहन है और इसी के माध्यम से जीवन का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है वहीं कर्तव्य निर्वहन नहीं करना ही पाप है। उन्होंने उदाहरण देकर समझाते हुए कहा कि व्यक्ति जिस पथ पर है उसके कर्तव्य का निष्ठापूर्ण पालन करें। अपने कर्तव्य को जानते हुए पूरा नहीं करने से ही विभिन्न रिश्तों में झगड़े और तनाव पनपता है। उन्होंने कहा कि जीवन को समझने के लिए संगत पर ध्यान देवें और केवल अच्छे लोगों का ही संग करें। स्वामी प्रतापपुरी जी ने यहां आयोजित यज्ञ में भी भाग लिया और उपस्थित जनसमूह को आशीर्वाद दिया। उन्होंने सेसोमू छात्रावास के बच्चों के साथ सहजन व गुलमोहर के पौधे लगाते हुए बच्चों को प्रकृति के साथ सहयोगी बनकर जीने की प्रेरणा दी। यज्ञ के मुख्य यजमान सुभाष शास्त्री ने सभी का आभार जताया। आर्यस्थली के निदेशक अमित आर्य ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ संपन्न करवाया। कार्यक्रम में भाजपा नेता विनोदगिरी गुसाई पहुंचे और स्वामीजी का शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया। कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष जगदीश स्वामी, जेपीएस स्कूल के निदेशक कुंभाराम घिंटाला, सेसोमू स्कूल के प्रधानाचार्य सुब्रत कुंडु, दयानंद विद्या निकेतन के प्रधानाचार्य विनोद बेनीवाल,परमेश्वर भादू, राजू ज्याणी, पवन गोयतान, हरिराम सारण, अनील ओला सहित अनेक मौजिज लोग व मातृशक्ति शामिल हुई।

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