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भीलवाड़ा-वाह रे पुलिस–निर्दोष का आबकारी नियम में बनाया मुकदमा-

सत्यार्थ न्यूज़ भीलवाड़ा ब्यूरो

अब्दुल सलाम रंगरेज

वाह रे पुलिस–निर्दोष का आबकारी नियम में बनाया मुकदमा-

कोर्ट ने अभियुक्त को किया उन्मोचित_

 

भीलवाड़ा पुलिसकर्मियों द्वारा पद का दुरुपयोग कर झूठा मुकदमा बनाकर युवक की गिरफ्तारी का मामला न्यायालय मजिस्ट्रेट संख्या 3 में पहुंचा और विकास सुवालका के अधिवक्ता मुकेश सुवालका ने न्यायालय के समक्ष जो तथ्य रखें उसे पुलिस की असलियत सामने आई। और सीसीटीवी फुटेज में पुलिसकर्मियों के दावे की पोल खोल दी।
जिस युवक विकास सुवालका को 16 नवंबर 2023 की रात को 11:30 बजे पुलिस कार से थाने में उठाकर ले जाती है तब युवक के पास में न शराब थी ना कोई सामग्री। लेकिन 1 घंटे बाद इस युवक विकास को सड़क पर बीयर की बोतल शराब के साथ गिरफ्तार कर आबकारी नियम में सुभाष नगर थाने के तत्कालीन उप निरीक्षक दिलीप सहल व पुलिसकर्मियों ने यह कारनामा कर गिरफ्तार कर लिया।
मामला जब न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या तीन की अदालत में पहुंचा तो पुलिस के इस झूठ का खुलासा हुआ। ऐसे में विद्वान न्यायाधीश ने पुलिस द्वारा झूठा मुकदमा बनाकर गिरफ्तार किए गए विकास सुवालका को मामले से उन्मोचित कर दिया। वही दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा। जिस पर उक्त पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई।
असलियत आई सामने–
पुलिसकर्मियों द्वारा झूठा मुकदमा बनाकर गिरफ्तारी करने पर मामला जब न्यायालय में मजिस्ट्रेट संख्या तीन में पहुंचा तो विकास सुवालका के अधिवक्ता मुकेश सुवालका ने न्यायालय के समक्ष जो तथ्य रखे उसमें पुलिस की असलियत सामने आई और सीसीटीवी फुटेज में पुलिसकर्मियों के झूठे दावों की पोल खुल गई। तथ्यों में बताया गया की 16 नवंबर 2023को पुलिसकर्मी रात्रि के समय बिना वारंट के अवैध रूप से 11:30 पीएम पर सादा पोशाक में विकास के निवास पर पहुंचे और अवैध रूप से मकान में जाकर विकास को घर से उठाकर ले गए जिसकी सीसीटीवी फुटेज न्यायालय में पेश की गई। फुटेज में स्पष्ट नजर आ रहा था कि जीप में बिठाते वक्त उसके पास ना तो शराब के पव्वे थे ना बियर की बोतले, लेकिन पुलिस ने 1 घंटे बाद ही निर्दोष युवक को शराब के झूठे मामले में गिरफ्तार कर लिया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर युवक
को आबकारी एक्ट में गिरफ्तार करने के लिए जप्त करके दर्शाई गई शराब कौन लेकर आया था?

सभी साक्ष्य व प्रार्थना पत्र पर न्यायालय ने पाया कि अनुसंधान अधिकारी द्वारा दी गई संपूर्ण जानकारी पुलिस कार्रवाई के विपरीत है ।तथा अभियुक्त के विरुद्ध कोई प्रथम दृष्ट्या मामला आरोप लगाए जाने हेतु उसके पास से उक्त बोतले बरामद की हो ऐसा कोई दस्तावेज पत्रावली पर उपलब्ध नहीं होने व गिरफ्तारी के समय पत्रावली व रिपोर्ट में विरोधाभास प्रकट होता है । चूंकि प्रकरण अभियुक्त के विरुद्ध दर्ज किया गया है अभियुक्त की उक्त जांच राजस्थान आबकारी अधिनियम 19 / 54 कि उक्त धारा 239 में उनमोचित किया जाता है। वही न्यायालय द्वारा दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए।

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