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बीकानेर-पत्थर को भी बना देती है भगवान जानिए भक्ति योग के बारे में योग एक्सपर्ट ओम प्रकाश कालवा के साथ।

न्यूज रिपोर्टर मीडिया प्रभारी मनोज मूंधड़ा बीकानेर श्रीडूंगरगढ़

पत्थर को भी बना देती है भगवान जानिए भक्ति योग के बारे में योग एक्सपर्ट ओम प्रकाश कालवा के साथ।

श्रीडूंगरगढ़ कस्बे की ओम योग सेवा संस्था के निदेशक योग एक्सपर्ट ओम प्रकाश कालवा ने सत्यार्थ न्यूज चैनल पर 56 वां अंक प्रकाशित करते हुए बताया भक्ति योग के जनक
आदियोगी भगवान शिव और गुरु दत्तात्रेय को योग का जनक माना गया है। शिव के 7 शिष्यों ने ही योग को संपूर्ण धरती पर प्रचारित किया। कहते हैं कि शिव ने योग की पहली शिक्षा अपनी पत्नी पार्वती को दी थी।

भक्ति योग के तरीके

-कोई व्यक्ति अपने चुने हुए देवता या रूप की कल्पना करके इसका अभ्यास कर सकता है। कविता, गीत (जिसे कीर्तन के नाम से जाना जाता है) और नृत्य के माध्यम से खुद को देवता के प्रति समर्पित करना और अभिव्यक्त करना भी भक्ति योग का अभ्यास करने के विभिन्न तरीके हैं। भक्ति योग अभ्यास चिंतनशील होते हैं और दिल से किए जाते हैं। भक्ति के 9 तरीके श्रवण (परीक्षित), कीर्तन (शुकदेव), स्मरण (प्रह्लाद), पादसेवन (लक्ष्मी), अर्चन (पृथुराजा), वंदन (अक्रूर), दास्य (हनुमान), सख्य (अर्जुन) और आत्मनिवेदन (बलि राजा) – इन्हें नवधा भक्ति कहते हैं।

अर्थ

भक्ति योग: भक्ति का स्वरूप भक्ति योग का अर्थ है अपनी भावनाओं की तीव्रता का उपयोग करके अपनी सीमाओं से परे जाना। सद्गुरु समझा रहे हैं कि भक्त होना, अस्तित्व का सबसे बुद्धिमानी भरा तरीका है।

प्रकार

-भगवद गीता में कहा गया है कि भक्ति योगी के सभी चार प्रकार महान हैं क्योंकि भक्ति योग की उनकी खोज जल्द या बाद में आध्यात्मिकता के मार्ग पर यात्रा शुरू करती है, यह व्यक्ति को नकारात्मकता और बुरे कर्म से दूर रखती है, यह भक्ति योग के लक्ष्य की ओर आध्यात्मिक परिवर्तन का कारण बनती है,”ईश्वर को अपने भीतर सार के रूप में जानना ।

उद्देश्य

-भक्ति योग भक्ति का मार्ग है, प्रेम और ईश्वर के प्रेमपूर्ण स्मरण के माध्यम से ईश्वर को प्राप्त करने की विधि। अधिकांश धर्म इस आध्यात्मिक मार्ग पर जोर देते हैं क्योंकि यह सबसे स्वाभाविक है। अन्य योगों की तरह, भक्त, ईश्वर के भक्त का लक्ष्य ईश्वर-साक्षात्कार प्राप्त करना है – ईश्वर के साथ एकता।

भक्ति की ताकत

-भक्ति में वो शक्ति है जो पत्थर को भी बना देती है भगवान, इंसानियत का भाव जगा कर इंसान को बना देती है इंसान। जगत के कण- कण में भक्ति की असीम शक्ति है विद्यमान, हृदय में बसते ईश्वर जब माता-पिता में प्रभु का रूप देखती संतान।

निवेदन

-ओम योग सेवा संस्था श्री डूंगरगढ़ द्वारा जनहित में जारी।

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