न्यूज रिपोर्टर मनोज मूंधड़ा बीकानेर श्रीडूंगरगढ़
शरीर को रखें ठंडा शीतली प्राणायाम से जानिए योग प्रशिक्षक ओम प्रकाश कालवा के साथ।
श्रीडूंगरगढ़ कस्बे की ओम योग सेवा संस्था के निदेशक योग प्रशिक्षक ओम प्रकाश कालवा ने शीतली प्राणायाम के बारे में जानकारी देते हुए बताया। शीतली प्राणायाम में शीतल का मतलब होता है ठंडक और ये ठंडा करता है हमारे पैरा सिम्पथैटिक नर्वस सिस्टम को स्टिम्युलेट करके, जिससे बॉडी रिलैक्स होती है और शरीर की गर्मी बाहर निकलती है। आयुर्वेद के अनुसार शरीर में तीन दोष होते हैं- वात, पित्त और कफ।शीतली प्राणायाम, जिसे अक्सर “शीतल श्वास” कहा जाता है,एक श्वास अभ्यास है जो शरीर को ठंडा करता है और तंत्रिका तंत्र पर शांत प्रभाव डालता है। आयुर्वेद में,शीतली श्वास को गर्मियों के महीनों और दिन के सबसे गर्म हिस्सों के दौरान आपके शरीर में बनने वाली गर्मी को शांत करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
तरीका
-किसी भी आरामदायक ध्यान करने के आसन में बैठ जायें आँखें बंद कर लें और पूरे शरीर को शिथिल करने की कोशिश करें। जहां तक संभव हो सके तनाव के बिना जीभ को मुंह के बाहर बढ़ाएं नलीनुमा जीभ से धीरे-धीरे और गहरी सांस लें। साँस लेने के अंत में अपना मुँह बंद कर लें और धीरे-धीरे नाक से साँस बाहर छोड़ें यही प्रक्रिया प्रतिदिन 10 मिनट तक दोहराएं। शीतली अभ्यास के बाद प्रतिदिन 10 मिनट तक शीतकारी अभ्यास करें।
लाभ
-शरीर को ठंडा करता है। थकान दूर करता है, जिससे नींद अच्छी आती है। लिवर के फंक्शन को सही रखता है। स्किन रैशेज, दाने बहुत आते हैं, तो उसे भी दूर करता है। हाइपरटेंशन वालों के लिए फायदेमंद होता है।गुस्सा शांत करता है। तनाव, घबराहट दूर करता है।
एसिडिटी की समस्या भी दूर करता है।
प्राणायाम का अभ्यास करते समय न करें ये गलतियां
-प्राणायाम करने से 2 घंटे पहले तक कुछ खाने से बचें दमा और ब्लड प्रेशर के मरीजों को नहीं करना चाहिए अभ्यास सांस लेने से जुड़ी गलतियां न करें ध्यान के दौरान बचें गलतियों से शरीर में चोट लगने पर न करें ये गलती
नोट
-सभी प्रणायामों का अभ्यास अनुभवी योग प्रशिक्षक की देखरेख में ही करना चाहिए।
निवेदन
-ओम योग सेवा संस्था श्री डूंगरगढ़ द्वारा जनहित में जारी।





















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