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कानपुर : पति व परिवारजनों की लम्बी उम्र के लिए महिलाओं ने वट वृक्ष के नीचे एकत्र हो की वट सावित्री व्रत की पूजा अर्चना व सुनी सावित्री सत्यवान की पौराणिक कथा – मोहिनी गुप्ता 

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न्यूज रिपोर्टर विमल गुप्ता कानपुर यू०पी०

 06/06/2024

जनपद कानपुर देहात मोहम्मदपुर

 

• पति व परिवारजनों की लम्बी उम्र के लिए महिलाओं ने वट वृक्ष के नीचे एकत्र हो की वट सावित्री व्रत की पूजा अर्चना व सुनी सावित्री सत्यवान की पौराणिक कथा – मोहिनी गुप्ता 

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कानपुर देहात। भारतवर्ष में महिलाओं ने अपने तपोबल बुद्धिबल व प्रबल मनोबल से देवी देवताओं को भी नतमस्तक किया है ।उनमें से एक आध्यात्मिक कथा सावित्री और सत्यवान की भी आती है। पूरी कथा आगे सुनते है उससे पहले पूजन- विधि जान लेते हैं । वट वृक्ष की पूजा अर्चना करने आयी मोहिनी गुप्ता ने बताया कि परंपरागत विधि के अनुसार प्रातः स्नान आदि करने के पश्चात पूजन सामग्री लेकर वट वृक्ष के पास आते हैं पिसी हल्दी सिंदूर चावल फूल धूप नौवैद्य आदि से पूजन करते हैं ।इच्छा अनुसार महिलाएं परिक्रमा भी करती हैं और अपनी मनोकामना के लिए भगवान विष्णु से प्रार्थना करती हैं । वट वृक्ष का पूजन और सावित्री सत्यवान की कथा का स्मरण करने के विधान के कारण ही यह व्रत वट सावित्री व्रत के नाम से जाना जाता है । जिसकी कथा इस प्रकार है । राजर्षि अश्वपति की एकमात्र संतान थीं सावित्री। सावित्री ने वनवासी राजा द्युमत्सेन के पुत्र सत्यवान से विवाह किया था ।लेकिन जब नारद जी ने उन्हें बताया कि सत्यवान की आयु आधी है तो भी सावित्री ने अपना फैसला नहीं बदला और सत्यवान से सब कुछ जानबूझकर शादी कर ली ।

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सावित्री सभी राजमहल के सुख और राजवैभव त्याग कर सत्यवान के साथ उनके परिवार की सेवा करते हुए वन में रहने लगी। जिस दिन सत्यवान के महाप्रयाण का दिन था ।उस दिन वह लकड़ियां काटने जंगल गए हुए थे ।अचानक बेहोश होकर सत्यवान गिर पड़े।उसी समय यमराज सत्यवान के प्राण लेने आए। तीन दिन से उपवास में रह रही सावित्री को पता था कि क्या होने वाला है ।इसलिए बिना विकल हुए उन्होंने यमराज से सत्यवान के प्राण न लेने की प्रार्थना की लेकिन यमराज नहीं माने। तब सावित्री उनके पीछे-पीछे ही जाने लगी ।कई बार मना करने पर भी वह नहीं मानी तो सावित्री के साहस और त्याग से यमराज प्रसन्न हुए । और कोई तीन वरदान मांगने को कहा सावित्री ने सत्यवान के ट्रस्ट इन माता-पिता के नेत्रों की ज्योति मांगी उनका छीना हुआ राज्य मांगा और अपने पति के लिए 100 पत्रों का वरदान मांगा तथा उसको खाने के बाद यमराज समझ गए कि सावित्री के पति को साथ ले जाना अब संभव नहीं इसलिए उन्होंने सावित्री को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद दिया और सत्यवान को छोड़कर वहां से अंतर्ध्यान हो गए। उस समय सावित्री अपने पति को लेकर वट वृक्ष के नीचे ही बैठी थी इसलिए इस दिन महिलाएं अपने परिवार और जीवनसाथी की दीर्घायु की कामना करते हुए वट वृक्ष को भोग अर्पण करती हैं उस पर धागा लपेटकर पूजा करती हैं। पूजा के दौरान गाँव की बहुत सी महिलाएं उपस्थित रही।

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