न्यूज़ रिपोर्टर का नाम – शिवम सिंह
स्थान – बांदा
जानवरो को पानी पीने मे हो रही है किल्लत, नहरो मे नही आ रहा है पानी
इंसानो को तो मिल जाता है पीने का पानी लेकिन जानवरो को पानी है दूभर
बांदा। अभी एक महीने का समय नहरों में पानी आने का बाकी है। ऐसी भीषण गर्मी से पशु पक्षी बेहाल हैं। तालाब और पोखरो के सूख जाने से बेजुबान पशु पक्षी भी प्यास से छटपटा रहे हैं। कस्बे में दो मुख्य नहर बांदा रोड एवं बिसंडा रोड में स्थित है जो सूखे पड़े हुए हैं। हालत यह है कि तालाबों में धूल उड़ रही है, जिससे गर्मी में पशु पक्षियों को प्यास बुझाने के लिए भटकना पड़ रहा है। चुनाव ड्यूटी से खाली हुए प्रशासनिक अफसर का दावा है कि जल्द ही तालाबों में पानी हो जाएगा, हालांकि यह दावा कब पूरा होगा,यह स्पष्ट नहीं है। इसके साथ ही साथ कस्बे से सटे हुए ग्रामीण क्षेत्र में स्थित नहरों का भी यही हाल है। नहरों में पानी ना होने एवं उड़ती हुई धूल से किसानों को मवेशियों की प्यास बुझाने के लिए हैंडपंप का सहारा लेना पड़ रहा है। प्रशासन की ओर से बनाए गए अमृत तालाब एवं आदर्श तालाबों की स्थिति भी बदहाल है। किसी में ऊंची ऊंची खरपतवार उगी हुई है तो कोई बिना पानी के मुंह चिढ़ा रहा है। केन कैनाल के अवर अभियंता मुकेश सरोज ने कहा बांध में पानी नहीं है। 3 जुलाई से बरियारपुर में पानी आ जाने से नहरों में पानी छोड़ा जाएगा।














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