ऐसा क्या है जो परमपिता परमात्मा को नहीं मालूम है?, ओ तो घट – घट का वासी है,उसे तो सब कुछ मालूम है।फर्क है प्यारे!तो बस हमारे – आपके नजरिए की।आप हजार,लाख,करोड़ चोरी कर लो,और ए जानो की कोई देखा नहीं तो ए आपके – हमारे स्वविचार हैं,आदमी नहीं देखा जरूर सत्य है,परंतु प्यारे!जो अदृश्य है न परमपिता परमात्मा,मेरा श्री कृष्ण ओ तो बंद आंखों से भी सब कुछ देखता है।
..और यह सब संभव होगा तो भगवान की भक्ति से, संतों की सानिध्य से,भगवान के प्रेम में डूब जाओ।प्यारे!नदी में तैरना नहीं आता है और जब नदी में स्नान करने जाओगे तो निश्चित ही डूब जाओगे।लेकिन परमपिता परमात्मा एक ऐसा सागर है की, उसमें जब – जब डूबोगे,जितनी बार डूबोगे कुछ ना कुछ प्राप्त करके ही लौटोगे।Website: http://satyarath.com/wp-admin
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