न्यूज रिपोर्टर मनोज मूंधड़ा बीकानेर श्रीडूंगरगढ़
जानिए योग एक्सपर्ट ओम कालवा के साथ सनातन भारतीय हिन्दू संस्कृति की अति महत्वपूर्ण जानकारियां।

श्री डूंगरगढ़। कस्बे के अनुभवी योग एक्सपर्ट ओम कालवा ने जानकारी देते हुए बताया। देश दुनियां समाज की पहचान उनकी संस्कृति से होती है अतः हर नागरिक का कर्त्तव्य बनता है कि अपनी संस्कृति का ज्ञान होना जरूरी है। इसी कड़ी में सनातन भारतीय हिन्दू संस्कृति की बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारियां जो आप सभी के लिए प्रेरणा स्रोत साबित होगी।
• दोपक्ष-कृष्ण पक्ष, शुक्ल पक्ष
* तीन ऋण-देव ऋण, पितृ ऋण, ऋषि ऋण
• चार युग- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग, कलयुग
* चार धाम – द्वारिका, बद्रीनाथ, जगन्नाथपुरी, रामेश्वरम धाम
• चार पीठ – शारदा पीठ (द्वारिका), ज्योतिष पीठ (जोशी मठ बद्री धाम), गोवर्धन पीठ (जगनाथ पुरी), श्रृंगेरी पीठ
• चार वेद-ऋग्वेद, अर्थ र्वेद, यजुर्वेद, सामवेद
• चार आश्रम – ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ, सन्यास
• चार अंतःकरण-मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार
* पंचगव्य – गाय का घी, दूध, दही, गोमूत्र, गोबर
• पंचतत्व-पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश
• छह दर्शन – वैशेषिक, न्याय, सांख्य, योग, पूर्व मीमांसा, दक्षिण मीमांसा
• सप्त ऋषि – विश्वामित्र, जमदाग्नि, भरद्वाज, गौतम, अत्री, वशिष्ठ और कश्यप
* सप्तपुरी – अयोध्या पुरी, मथुरा पुरी, मायापुरी (हरिद्वार), काशी, कांची (शिन कांची- विष्णु कांची), अवंतिका, द्वारिका पुरी
• आठयोग (अष्टांग) यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि
• दस दिशाएं-पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, ईशान, नेऋत्य, वायव्य, अग्नि, आकाश, पाताल
* बारह मास – चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, अश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ, फाल्गुन • पंद्रह तिथियां – प्रतिपदा, द्वितीय, तृतीय, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी,
द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, पूर्णिमा, अमावस्या
• स्मृतियां मनु, विष्णु, अत्री, हारीत, याज्ञवल्क्य, उशना, अंगीरा, यम, आप स्तम्ब, सर्वत, कात्यायन, ब्रहस्पति, पराशर, व्यास, शांख्य, लिखित, दक्ष, शातातप, वशिष्ठ
• हाथ की पांचों अंगुलियो के संस्कृत भाषा में नाम कनिष्ठा (जल), अनामिका (पृथ्वी), मध्यमा
(आकाश), तर्जनी (वायु), अंगुष्ठ (अग्नि) • पांच जगह हंसना मना है श्मशान, अर्थी के पीछे, शौक में, मंदिर में, कथा में
* हिंदू धर्म में 33 करोड़ नहीं (33 कोटि देवी, देवता है कोटि प्रकार, देव भाषा संस्कृति में कोटि के दो अर्थ
होते हैं। प्रकार व करोड़
• 12 प्रकार-आदित्य, धाता, मित, आर्यमा, शक्रा, वरुण, अंश भाग, विवास्वान, पूष, सविता, तवास्था, विष्णु
* 8 प्रकार-वासुः, धर ध्रुव, सोम, अह, अनिल, अनल, प्रत्युष, प्रभाष
* 11 प्रकार – रूद्र, हरबहुरूप, त्रयंबक, अपराजित, बृषाकापि, शंभू, कपार्दी, रेवात, मृगव्याध, शर्वा, कपाली
* 2 प्रकार – अश्विनी, कुमार
कुल- 12+8+11+2=33 कोटि

नोट : हमारे चैनल के साथ जुड़े रहे और आपको मिलती रहेगी देश दुनियां की तरोताजा जानकारियां वो भी योग एक्सपर्ट ओम कालवा के साथ।


















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