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बीकानेर-श्री डूंगरगढ़ में आखा तीज का पर्व घरो में मटकी पुजन व खिचड़ा बनाकर, “भूमि पुत्र “किसानों ने बिजान करते हुए हलोतीया कर हर्षोल्लास के साथ मनाया

न्यूज रिपोर्टर पुखराज बोहरा बीकानेर श्री डूंगरगढ़
श्री डूंगरगढ़ कल अंचल में आखातीज पर्व धूमधाम के साथ मनाया गया। अक्षय तृतीया पर प्रत्येक घर खीचड़े इमलानी का पानी की महकार से महक उठा हर घर में बाजरे की खोडी कूटकर धान से खिचड़ा बनाया गया। घरों में(कोरी) नयी मटकी पूजन किया गया।अक्षय तृतीया के दिन माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की उपासना करने से जीवन में तरक्की होती है। अक्षय तृतीया के प्रदोषकाल में परशुराम जयंती मनाने का प्रावधान रहा है। अतः अक्षय तृतीया तिथि में होने वाली परशुराम जयंती शुक्रवार को ही शाम प्रदोष समय में मनाई गईं। वैसे तो अक्षय तृतीया पर विवाह, गृह प्रवेश और सभी तरह के मांगलिक कार्य आरंभ करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। परंतु, इस दिन सोना-चांदी खरीदना और जमीन-जायदाद के सौदे करना भी शुभ माना जाता है।
किसान वर्ग में हर्षोल्लास का माहौल छा गया अलसुबह चार बजे भूमिपुत्र किसानों ने खेतो की ओर रुख करते हुए वहीं किसानों ने कोरी मिट्टी के छोटी छोटी तलाई बनाकरसिंचित भूमि किसानों ने अगेती मूंगफली का बिजान करते हुए हलोतिया कर जमाने का शगुन लिया। गांव के बुजुर्ग किसान ने बताया कि खेतो मे पक्षियों की मीठी आवाज तथा मस्ती मे बैठे पशुओं एवं खेलते हुए खरगोश के जोड़े को देखते हुए आगामी अच्छे जमाने का शुभ संकेत है।बाजरी की खूब पैदावार हो ये प्रार्थनाएं की गई है। वही शहरी व ग्रामीण इलाकों में जगह–जगह जमकर पतंग बाजी हुई। अक्षय तृतीया साल के सबसे पवित्र दिनों में से एक होता है।अक्षय तृतीया के दिन कोई भी मंगल कार्य संपन्न किया जा सकता है. यह दिन नारायण-लक्ष्मी की आराधना और नई चीजों की खरीदारी के लिए भी उत्तम माना जाता है।अक्षय तृतीया को सनातन धर्म में बेहद खास त्योहार माना जाता है। अक्षय तृतीया के दिन माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की उपासना करने से जीवन में तरक्की होती है।
क्यों खास है अक्षय तृतीया?
अक्षय तृतीया को कई वजहों से साल का सबसे शुभ दिन माना जाता है।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत अक्षय तृतीया से ही हुई थी।भगवान विष्णु ने नर नारायण का अवतार भी इसी दिन लिया था।भगवान परशुराम का जन्म भी अक्षय तृतीया पर हुआ था। इस शुभ तिथि से ही भगवान गणेश ने महाभारत का काव्य लिखना शुरू किया था।
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नोखा में धूमधाम से मनाई आखातीजः लू पर भारी पतंगबाजों का हौंसला, छत्तों पर दिखा शहर, देर शाम तक दिखा युवाओं में जोश
नोखा नगरपालिका पार्षद देव जी चांडक परिवार तथा
नोखा शहर व ग्रामीण अंचल में अक्षय तृतीया का पर्व हर्षोल्लास से मनाया गया। भीषण गर्मी में भी लोगों ने दिनभर पतंगबाजी का जमकर आनंद लिया। महिलाएं बच्चे, युवा, पुरुष सुबह से ही पतंगे, लटाई आदि लेकर घरों की छतों पर चढ़ गए और मनोरंजन के डीजे सिस्टम भी लगा लिए। इसके साथ ही इस बार लोगों ने पतंगबाजी के दौरान आतिशबाजी पटाखे चलाकर भी आनंद लिया। लोगों ने पतंगबाजी की प्रतियोगिताओं में भी बढ़ चढ़कर भाग लिया।वहीं घरों में धार्मिक अनुष्ठान भी हुए। लोगों ने अपने घरों में इमलाणी खीचड़ा और सांगरी आदि का भोजन बनाया। वहीं घरों में कोरी मटकी में जल भरकर पूजा अर्चना की गई।डीजे पर गूंजते गीतों के बीच न तो लू की तपिश पतंगबाजों को परेशान कर रही थी और न ही किसी चीज की परवाह। सुबह से रात 8 बजे तक शहर छतों पर नजर आया। आखातीज पर सुबह ही पतंगबाजी के शौकीन छतों पर चढ़ गए।
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नोखा नगरपालिक पार्षद देव जी चांडक परिवार की नन्ही सी बच्ची ने भी पतंगबाजी का लुफ्त उठाया
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नोखा नगरपालिका पार्षद देव जी चांडक परिवार पतंगबाजी का आनंद लेते हुए
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मेहरिया मार्केट राठी परिवार पतंगबाजी का आनंद लेते हुए

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