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कालूस्कर जी आपका जाना, एक युग का अंत कर गया। आपका वह निश्चल व्यक्तित्व, हम सबके दिलों में भर गया।।

कालूस्कर जी आपका जाना, एक युग का अंत कर गया। आपका वह निश्चल व्यक्तित्व, हम सबके दिलों में भर गया।।
—-लायन अरुण कुमार सोनी

​सार्वजनिक वाचनालय तिलक चौक में स्व. कालूस्कर ‘उपेन्द्र’ जी को श्रद्धांजलि काव्य गोष्ठी आयोजित हुई।

​विदिशा। स्थानीय तिलक चौक स्थित ऐतिहासिक सार्वजनिक वाचनालय एवं पुस्तकालय द्वारा स्व. लक्ष्मीकांत कालूस्कर स्मृति कार्यक्रम श्रृंखला की प्रथम कड़ी के रूप में एक भव्य ‘सरस काव्य-गोष्ठी’ का आयोजन किया गया। वाचनालय परिसर में रविवार, 14 जून 2026 को आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में शहर के लब्धप्रतिष्ठ कवि, साहित्यकार और प्रबुद्ध नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
वाचनालय के आजीवन सदस्य एवं पूर्व लायंस अध्यक्ष लायन अरुण कुमार सोनी ने बताया कि​क्षइस विशेष और भावुक क्षण के अवसर पर वाचनालय के द्वितीय तल पर स्व. लक्ष्मीकांत कालूस्कर ‘उपेन्द्र’ सभागार पट्टिका का विधि-विधान से अनावरण किया गया। अनावरण मुख्य अतिथि डॉ. सुरेश गर्ग, दिल्ली से पधारे डॉ. वी. के. त्रिपाठी, वरिष्ठ साहित्यकार श्री सुल्खान सिंह हाड़ा, एडवोकेट सतीश खत्री तथा स्व. कालूस्कर जी के सुपुत्र श्री कदम्ब कालूस्कर द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
​अनावरण के उपरांत आयोजित मुख्य कार्यक्रम में वक्ताओं ने स्व. कालूस्कर जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला।
​डॉ. सुरेश गर्ग ने स्व. लक्ष्मीकांत कालूस्कर जी के वाचनालय के प्रति अनन्य समर्पण, अटूट निष्ठा और अद्वितीय योगदान को रेखांकित किया।
​श्री सुल्खान सिंह हाड़ा ने कालूस्कर जी के साथ बिताए पुराने दिनों को याद करते हुए भावपूर्ण संस्मरण साझा किए।
​डॉ. वी. के. त्रिपाठी ने कालूस्कर जी की स्मृतियों को नमन करते हुए एक सुमधुर गजल समर्पित की।
​वाचनालय के महामंत्री एडवोकेट सतीश खत्री ने संस्था के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि लगभग सौ वर्षों से सफलतापूर्वक संचालित इस प्रतिष्ठित सार्वजनिक वाचनालय में प्रख्यात साहित्यकार श्री कालूस्कर जी पिछले 35 वर्षों तक निरंतर महामंत्री के पद पर सुशोभित रहे और संस्था को नई ऊंचाइयों पर ले गए।
​स्मृति कार्यक्रम के दूसरे चरण में ‘सरस काव्य-गोष्ठी’ का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शीलचंद जी पालीवाल ने की, जबकि मंच का कुशल व रोचक संचालन श्री उदय ढोली ने अपने अनूठे अंदाज में किया।
​गोष्ठी का शुभारंभ सुश्री शुभा खत्री द्वारा प्रस्तुत सुमधुर माँ वाग्देवी सरस्वती वंदना से हुआ। इसके पश्चात नगर के प्रतिष्ठित रचनाकारों ने एक से बढ़कर एक रचनाओं, गीतों और गजलों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। रस-वृष्टि करने वाले रचनाकारों में मुख्य रूप से:
​सर्वश्री गोवर्धन जी राजौरिया, निसार मालवी, सुरेन्द्र श्रीवास्तव, विष्णु दुबे, हबीब नादाँ, संतोष भावसार, राजेन्द्र जैन, चाँद खाँ चाँद, संजय चतुर्वेदी, अरुण कुमार सोनी, शाहिद अली शाहिद, कृष्णकांत मूंदड़ा, श्रवण राठौर, सत्येन्द्र धाकड़, नज़ीर नूरी और अनुज भार्गव शामिल रहे। सभी कवियों की रचनाओं पर श्रोताओं ने करतल ध्वनि से दाद दी। लायन अरुण कुमार सोनी द्वारा कालूष्कर जी को कविता के माध्यम से दी गई श्रद्धांजलि काव्य की मंच एवं सभा में उपस्थित सभी साहित्य जगत की विभूतियों ने प्रशंसा की।
​इस साहित्यिक महाकुंभ में इतिहासकार व साहित्यकार श्री गोविंद देवलिया, सुनील जैन, राजेन्द्र श्रीवास्तव, ब्रज श्रीवास्तव सहित नगर के अनेक गणमान्य नागरिक, समाजसेवी, रचनाकार और साहित्यानुरागी महानुभाव उपस्थित रहे।
​कार्यक्रम के अंत में वाचनालय समिति के मंत्री श्री सतीश खत्री ने पधारे हुए सभी कवियों, अतिथियों और सुधी श्रोताओं के प्रति सहृदय आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास जताया कि वाचनालय की साहित्यिक गतिविधियों में नगरवासियों का ऐसा ही आत्मीय सहयोग भविष्य में भी निरंतर मिलता रहेगा।

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