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मरवाही वनमंडल में अवैध लकड़ियों के कटाई का बड़ा मामला, वन विभाग के अधिकारी दोषियों को बचाने में जुटे,

मरवाही वनमंडल में अवैध लकड़ियों के कटाई का बड़ा मामला, वन विभाग के अधिकारी दोषियों को बचाने में जुटे,

अवैध लकड़ी के खेल में विभागीय मिलीभगत, जंगलों की लूट का मामला, सिस्टम पर सवाल, दोषियों पर कार्रवाई की मांग, पर्यावरण और वन संपदा की सुरक्षा खतरे में….

सूरज यादव, गौरेला-पेंड्रा–मरवाही। छत्तीसगढ़ प्रदेश के जीपीएम जिले के मरवाही वन मंडल में अवैध लकड़ियों के कटाई और अवैध पैसे के लेन देन का गंभीर मामला सामने आया है, जिसने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आरोप है कि इस पूरे मामले में दोषियों को बचाने के लिए विभाग के जिम्मेदार अधिकारी सीसीएफ और डीएफओ खुले तौर पर ढाल बने हुए हैं। वनमण्डल मरवाही के अपने एक दिवसीय दौरे के दौरान मुख्य वन संरक्षक मनोज कुमार पाण्डेय ने अवैध जंगलों के कटाई और पैसे के लेन देन से जुड़े ठोस सबूत सामने आने के बावजूद वन विभाग के कर्मचारियों को बचाते हुए नजर आए। मीडिया से बातचीत के दौरान मुख्य वन संरक्षक ने अवैध रूप से पैसे के लेन देन के गंभीर मामले को व्यक्तिगत मामला बताया, वहीं मुख्य वन संरक्षक के द्वारा टाल मटोल कर संदिग्ध मामले को फाइलों में दबाने का कोशिश लगातार उनके विभाग के द्वारा किया जा रहा हैं।

अब तक न तो प्रभावी कार्रवाई हुई और न ही किसी बड़े आरोपी पर हाथ डाला गया। उलटे, “जांच” के नाम पर फाइलें घुमाई जा रही हैं और मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की जा रही है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा आम है कि लेन देन का यह खेल बिना विभागीय संरक्षण के संभव ही नहीं है। जंगल से कीमती लकड़ी का निकलना, परिवहन और बिक्री हर चरण में मिलीभगत के संकेत मिल रहे हैं।

बावजूद इसके, जांच की दिशा बार-बार बदली जा रही है ताकि असली गुनहगार कानून के शिकंजे से बाहर रहें। पर्यावरण और वन संपदा की सुरक्षा की जिम्मेदारी जिन अफसरों के कंधों पर है, उन्हीं पर सवाल उठना बेहद चिंताजनक है। यदि समय रहते निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच नहीं हुई, तो यह मामला न सिर्फ जंगलों की लूट का प्रतीक बनेगा, बल्कि सिस्टम पर जनता के भरोसे को भी गहरी चोट पहुंचाएगा।

अब निगाहें शासन-प्रशासन पर टिकी हैं, क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी कागजी जांच की भेंट चढ़ जाएगा?

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