*राजकीय पशु अस्पताल नगवां चपरासी के सहारे, इंजेक्सन लगाने से गाय की मौत,*
*पशु पालक ने जिलाधिकारी सोनभद्र से प्रभारी डॉक्टर के विरुद्ध कठोर कार्रवाई और मुआवजा की मांग*
*सोनभद्र*/ बैनी

सोनभद्र विकासखंड नगवां ब्लॉक के वैनी में स्थित राजकीय पशु अस्पताल चपरासी के सहारे चल रहा है चपरासी द्वारा गलत इलाज किए जाने से एक दुधारू पशु गाय की मौत हो गई है पशुपालक सदमे में है सरकार से मुआवजे की मांग और डॉक्टर के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।
जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत सिकरवार के पूर्व प्रधान भोला प्रसाद चौरसिया की गाय पिछले दो-तीन दिन से बीमार चल रही थी पूर्व प्रधान द्वारा गाय के इलाज हेतु राजकीय पशु अस्पताल वैनी के प्रभारी डॉक्टर को फोन कर इलाज के लिए कहा प्रभारी डॉक्टर ने बाहर होने का हवाला देकर राजकीय पशु अस्पताल से चपरासी को इलाज के लिए भेज दिया चपरासी द्वारा पशु को जैसे ही इंजेक्शन लगाया कुछ ही देर बाद दुधारू गाय जो लगभग 10 लीटर दूध दिया करती थी उसकी मौत हो गई जिससे पशुपालक दुखी और सदमे में है।
पूर्व प्रधान भोला प्रसाद चौरसिया का कहना है कि चपरासी ने उनसे इलाज के नाम पर₹500 भी लिए और गलत इंजेक्शन लगाने से उनके पशु की मौत हो गई है उन्होंने बताया कि मेरी गाय कुछ ही दिन हुए मैं उसे ₹60000 में खरीद कर लाया था और यहां पर यह गाय 10 लीटर दूध प्रतिदिन देती थी जिससे मेरा और मेरे परिवार का भरण पोषण हो रहा था लेकिन गलत इलाज के कारण पशु की मौत हो जाने से आर्थिक तंगी जैसे हालात उत्पन्न हो जाएंगे भोला प्रसाद चौरसिया ने कहा कि डॉक्टरों की लापरवाही से मेरे पशु की मौत हुई है और उसकी जिम्मेदार प्रभारी डॉक्टर हैं।
सूत्रों की माने तो राजकीय पशु अस्पताल के प्रभारी डॉक्टर महीने में एक दो बार ही अपनी उपस्थिति दर्ज करते हैं और यह राजकीय पशु अस्पताल पूरी तरह से सरकारी होने के बावजूद भी पशुपालकों से पैसे की डिमांड करता है। कहने को तो इस अस्पताल में एक प्रभारी डॉक्टर फार्मासिस्ट कंपाउंड और एक चपरासी सहित अन्य संविदा कर्मी भी कार्यरत है फिर भी मौके पर अगर कोई पशुपालक दवा लेने जाता है तो मौके पर चपरासी या कंपाउंड ही मिलते हैं जिससे पशुओं का अच्छे से इलाज नहीं हो पाता है पशु अस्पताल में भारी भ्रष्टाचार व्याप्त है पशुओं में सीमन चढ़ाने के नाम पर भी पैसे वसूले जाते हैं इलाज करने अगर डॉक्टर गांव में गए तब भी पशु पालकों से पैसे वसूले जाते हैं।
आपको बता दें की हर वर्ष बरसात से पहले सरकार द्वारा पशुओं को बीमारी से बचाने हेतु गांव में निशुल्क टीकाकरण किया जाता है लेकिन राजकीय पशु अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा गांव में पशुओं को टीका लगाना जरूरी नहीं समझा जाता है जिससे पशु बीमार होते हैं और पशुपालक मजबूरी में प्राइवेट डॉक्टर से इलाज करवा कर काफी पैसे खर्च करते हैं फिर भी पशुओं की मौत हो जाती है ऐसे में सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं में शिथिलता बरती जाती है।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी सोनभद्र से मुआवजा राशि दिलवाने और राजकीय पशु अस्पताल के प्रभारी डॉक्टर के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।
















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