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सोनभद्र -मांची में जल, जंगल, जमीन के लिए लगा लाल सलाम का नारा ।

 

 

मांची में जल, जंगल, जमीन के लिए लगा लाल सलाम का नारा ।

 राबर्ट्सगंज विधानसभा क्षेत्र के मांची में जन समस्याओं को लेकर आयोजित हुआ भाकपा का जन चौपाल।

नगवां बांध को स्थापित कराने का ग्रामीण आज भी झेल रहे हैं विस्थापन का दंश।

 

सोनभद्र। वैनी । खलियारी /सत्यनारायण मौर्य/संतेश्वर सिंह

Mo 9580757830

शुक्रवार, सदर विधानसभा क्षेत्र के सुदूर क्षेत्र मांची गांव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी व खेत मजदूर यूनियन के बैनर तले विगत गुरुवार की देर शाम तक चला ग्रामीणों का जन चौपाल । जहां विभिन्न समस्याओं के साथ जल, जंगल, जमीन व मौलिक अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए उपस्थित विभिन्न गांवों के ग्रामीणों ने पार्टी के प्रति अपनी एकजुटता दिखाते हुए लाल सलाम के नारे का आगाज़ किया और पार्टी के बैनर तले अपनी समस्याओं को लेकर लड़ाई को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई । जन चौपाल में नगवां बांध के विस्थापितों और जलमग्न हुए गांव के लोग उपस्थित रहे । जहां उपस्थित लोगों ने अपनी व्यथा और दर्द को बयां करते हुए कहा कि बांध निर्माण के दौरान उन्हें पास के जंगल क्षेत्रों में ज़मीन दे कर बसाया गया था। लेकिन उन्हें उस जमीन पर मालिकाना हक आज तक नहीं दिया गया है। आज स्थिति यह है कि उस जमीन को वन विभाग अपनी बात जमीन बता कर उन्हें कई प्रकार से प्रताड़ित कर रहा है। वन विभाग उनकी खेती को जेसीबी मशीन से नष्ट कर उन्हें बेदखल करने की पूरी कोशिश कर रहा है और मानसिक व आर्थिक शोषण करते हुए मुकदमे दर्ज कर रहा है। जबकि नौ गांव के सैकड़ों की संख्या ग्रामीणों ने नगवां बांध को स्थापित कराने में उन्होंने अपने पूर्वजों की जमीन और अपने बने बनाए घर गृहस्थी का त्याग कर दिया है। आज स्थिति विपरीत हो गई है, लोग अपने को बेघर समझ कर बंजारे की तरह जीवन यापन करने पर मजबूर हैं। लोगों के पास मतदाता परिचय पत्र है, राशनकार्ड है, आधार कार्ड है, वह सभी प्रकार के चुनावों में वोट भी देते आ रहे हैं, लेकिन सवाल बना हुआ कि उनके रहने वाली वह जमीन कहां है ? वह किसी स्थाई जमीन के मालिक नहीं है जिस आधार पर उपरोक्त कागजात बना दिया गया, वह मतदाता तो है पर उसके मकान का क्या पता है , यह किसी को पता नहीं , जो एक गंभीर सवाल है। ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए कहा कि हम ग्रामीण आज भी नगवां बांध के निर्माण के दौरान से विस्थापित होकर विस्थापन का दंश झेल रहे हैं। इस क्षेत्र में वन विभाग द्वारा वनाधिकार कानून का अधिनियम के तहत सही से क्रियान्वयन नहीं किया जा रहा है। वन विभाग और संबंधित अधिकारी तीन पीढ़ी का रिकॉर्ड मांग रहे हैं, जबकि वन अधिकार अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। ग्रामीणों ने वन विभाग के कर्मचारियों पर लगाम लगाने की मांग की और विस्थापन नीति और वनाधिकार का लाभ दिलाने की बात कही, नहीं तो वह इसके लिए लामबंद हो कर लाल झंडे के नीचे बड़े आंदोलन का रास्ता अख़्तियार करेंगे।

जहां जन चौपाल को भाकपा के जिला सचिव कामरेड आर के शर्मा, सहसचिव कामरेड देव कुमार विश्वकर्मा, खेत मजदूर यूनियन के नेता कामरेड चन्दन प्रसाद ( पूर्व प्रधान – डोरिया) व कामरेड राम जनम मौर्या ने संबोधित किया और ग्रामीणों की समस्यायों को प्रशासन तक पहुंचाने तथा समस्याओं के समाधान हेतु आंदोलन की बात कही। इस दौरान स्थानीय ग्रामीणों में कांता, सुरेश, अमरनाथ अगरिया, नंदू गुर्जर, रामराज, रामपति बिंद, नौरंग अगरिया, करमू अगरिया व नन्दू यादव ने भी अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम की अध्यक्षता मांची के प्रधान भुनेश्वर जी ने तथा संचालन सरोज मास्टर जी ने किया।

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