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एल सी एल ओ कर्मचारी यूनियन हरियाणा (सीटू ) के प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगो को लेकर खेल मंत्री गौरव गौतम को सौंपा ज्ञापन

एल सी एल ओ कर्मचारी यूनियन हरियाणा (सीटू ) के प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगो को लेकर खेल मंत्री गौरव गौतम को सौंपा ज्ञापन

पलवल, 24 अगस्त
कृष्ण कुमार छाबड़ा

एल सी एल ओ कर्मचारी यूनियन हरियाणा (सीटू ) के प्रतिनिधिमंडल ने महासचिव पवन डागर के नेतृत्व में रविवार को खेल मंत्री गौरव गौतम से मुलाकात कर मांगों बारे ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि सिटीजन रिसोर्स इन्फोर्मेशन डिपार्टमेंट (क्रीड) विभाग के लिए नव चयनित करीब चार हजार एलसीएलओ (लोकल कमेटी लोकल ऑपरेटर) को 11 महीने से न काम मिला और न ही वेतन दिया जा रहा है। नौकरी का विज्ञापन और परीक्षा क्रीड पंचायत लोकल आपरेटर (सीपीएलओ) की पोस्ट के लिए लिया गया। चयन होने के बाद विभाग ने ऑफर लेटर में दो केटेगरी बनाकर बेरोजगारों के साथ धोखाधड़ी की गई। प्रतिनिधिमंडल में महासचिव पवन डागर के अलावा अजय चौधरी, सुशीला, पूजा, निशा, अनीश ख़ान, अमित, योगेश व तौफ़ीक़ ख़ान शामिल थे। खेलमंत्री गौरव गौतम ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि शीघ्र विभाग के आला अधिकारियों से बातचीत करके मामले का हल किया जाएगा। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल से मंगलवार को पुनः मुलाकात करने को कहा। यूनियन ने सरकार की बेरुखी के खिलाफ 26 अगस्त को पंचकुला में राज्य स्तरीय प्रदर्शन का किया ऐलान। अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा व सीटू हरियाणा के महासचिव जयभगवान व प्रधान सुरेखा ने एलसीएलओ का पदनाम बदलकर सीपीएलओ बनाने और खाली पड़ी पंचायतों में एडजस्ट कर तृतीय श्रेणी के कर्मचारी के वेतनमान देने की मांग और पंचकूला में आयोजित धरने का पुरजोर समर्थन किया।

यूनियन के महासचिव पवन डागर, विजय चौधरी ने बताया कि सरकार ने सिटीजन रिसोर्स इन्फोर्मेशन डिपार्टमेंट (CRID) और परिवार पहचान पत्र अथोरिटी के अंतर्गत करीब सात हजार क्रीड पंचायत लोकल आपरेटर (सीपीएलओ) का चयन किया था। इन कर्मचारियों की नियुक्ति हरियाणा की 7000 ग्राम पंचायतों के ग्राम सचिवालयों में होनी थी, जहां बैठकर ये फैमिली ID से जुड़े कार्य, जैसे आय प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, पेंशन वेरिफिकेशन इत्यादि का कार्य करते। लेकिन चयन के बाद इसमें से करीब साढ़े तीन हजार को सीपीएलओ (क्रिड़ पंचायत लोकल ऑपरेटर) का ऑफर ऑफ अप्वाइंटमेंट पत्र दिया और आधे को पदनाम बदलकर एलसीएलओ (लोकल कमेटी लोकल ऑपरेटर) का ऑफर ऑफ अप्वाइंटमेंट दिया। जबकि विज्ञापन सीपीएलओ (क्रीड़ पंचायत लोकल ऑपरेटर) का था। इस तरह, चार हजार एलसीएलओ में से मार्च 2024 में करीब 2700 की लोकल पंचायतों में ज्वाइनिंग हो गई और 1300 की ज्वाइनिंग ही नहीं हुई। लेकिन विधानसभा चुनाव के बाद पद ग्रहण करने वाले 2700 को भी काम नहीं दिया गया और 1300 की तो ज्वाइनिंग ही नही हुई। इसलिए पिछले करीब एक साल से सीपीएलओ पद के लिए चयनित, जिनका पदनाम बदलकर एलसीएलओ बनाया, को ना तो कोई मानदेय/वेतन मिल रहा है और न ही कोई काम दिया जा रहा है। जबकि सीपीएलओ को केवल 6000 वेतनमान दिया जा रहा है, जो न्यूनतम मजदूरी से भी काफी कम है।

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि हम भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री, वर्तमान मुख्यमंत्री लेकर सभी अन्य अधिकारियों एवं मंत्रियों से मुलाकात कर चुके हैं। लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि इस भर्ती के लिए एक हजार रूपए फार्म फीस थी और करीब दस लाख युवाओं ने आवेदन किया था। इससे सरकार के पास करीब 100 रुपए प्रति फॉर्म फीस एकत्रित हुई। पहले प्री एग्जाम हुआ और उसको क्लीयर करने के उपरांत ही नकारात्मक अंकों के साथ मेन एग्जाम हुआ। जिसके बाद करीब सात हजार सीपीएलओ का चयन किया गया। लेकिन विभाग ने आधे को सीपीएलओ (क्रीड पंचायत लोकल ऑपरेटर या अटल सेवा केन्द्र आपरेटर (ASKO) का और आधे को एलसीएलओ (लोकल कमेटी लोकल ऑपरेटर) की ऑफर ऑफ अप्वाइंटमेंट पत्र दिया। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह गलत और बेरोजगारों के साथ धोखा है। क्योंकि विज्ञापन में वेतन का उल्लेख नहीं किया गया और चयन के बाद पदनाम बदलना पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि सरकार ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव में फायदा उठाने के लिए यह रोजगार देने का ड्रामा किया गया और अब कौशल कर्मियों की तरह उन्हें रोजगार से वंचित किया गया ।

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