संवाददाता:-हर्षल रावल
सिरोही/राज.
राजस्थानी मायड़ भाषा को अमेरिका में मान्यता, नेपाल में पहचान…पर भारत में प्रतिक्षा! कब मिलेगी राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता

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सिरोही। राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए राजस्थानी लोगों ने अपने-अपने स्तर पर मान्यता के लिए आवाज बुलंद की है। राजस्थानी भाषा के लिए संगठन, संस्था और कमेटियों ने भी धरना प्रदर्शन कर चुकी हैं। राजस्थानी जनता आज भी आशा लगाएं बैठे हैं कि हमारी मायड़ राजस्थानी भासा को मान्यता मिलेगी।
राजस्थानी भाषा की समृद्धि जिन तरीकों से आठ करोड़ राजस्थानियों को समृद्ध बनाने का कार्य कर रही है, उनमें जोधपुर के राजघराने की महत्वपूर्ण भूमिका है। स्वयं राज परिवार के मुखिया महाराजा गजसिंह राजस्थानी में ही अपनी बात कहते हैं और जिन तरीकों से वे स्वयं लगातार प्रयास कर रहे हैं कि उनसे एक बड़ा वातावरण बना हुआ है। इसके अतिरिक्त सात समंदर पार अमेरिका में एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका के अध्यक्ष प्रेम भंडारी भी लगातार प्रयास कर रहे हैं।
आशा है कि शीघ्र से अतिशीघ्र इसकी मान्यता मिलनी चाहिए। इसमें सोचने वाली बात यह है कि अमेरिका में इस भाषा को मान्यता मिल चुकी है, लेकिन अपने देश में इसको आज भी मान्यता के लिए प्रतिक्षा करनी पड़ रही है। जेएनवीयू राजस्थानी विभाग के विभागाध्यक्ष गजेसिंह राजपुरोहित भी लगातार धरना प्रदर्शन करके इसकी मान्यता की मांग को उठा चुके हैं।
2003 में तत्कालीन राज्य सरकार द्वारा राजस्थानी भाषा को 8वीं अनुसूची में सम्मिलित करते हुए संवैधानिक दर्जा दिए जाने हेतु सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास करके केन्द्र सरकार को भेजा गया था। भाषाविद् एस. महापात्रा जी की अगुवाई में एक कमेटी भी बनाई गई थी, जिसने राजस्थानी भाषा को समृध्द व संवैधानिक दर्जा देने के लिए पात्र बताया था।
गौरतलब है कि राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता प्रदान कर इसे भारत के संविधान की 8वीं अनुसूची में जोड़ने का संकल्प राजस्थान विधानसभा द्वारा 03 सितंबर 2003 को ही पारित किया जा चुका है। लेकिन 12 वर्ष बीत गए, अभी तक राजस्थानी भाषा को लेकर राज्य सरकार इस विषय पर गंभीर दिख रही है और ना ही केंद्र की सरकार इस विषय को लेकर चिंतित हैं।
यदि कोई चिंतित हैं तो राजस्थान के भाषा प्रेमी। उन्हें आज भी प्रतिक्षा हैं कि सरकारें हमारी मायड़ भाषा को संवैधानिक मान्यता देगी।
यदि राजस्थानी भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में सम्मिलित किया जाता है, तो यह भाषा सरकारी परीक्षाओं, शिक्षण संस्थानों और सरकारी दस्तावेजों में उपयोग के लिए मान्य हो जाएगी। इससे भाषा को संरक्षित करने के साथ-साथ इसे भविष्य की पीढ़ियों तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी।

राजस्थानी भाषा को मान्यता देने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी और भाषा को लेकर आम जनता में जागरूकता की कमी भी एक बड़ी बाधा है। राजस्थानी भाषा को मान्यता देने के लिए राजनीतिक स्तर पर ठोस प्रयास नहीं किए गए हैं।
राजस्थानी भाषा के महत्व और इसके संरक्षण की आवश्यकता के बारे में आम जनता में जागरूकता की कमी है। हिंदी भाषा का व्यापक उपयोग और प्रभाव भी राजस्थानी भाषा के विकास में एक बाधा है।
क्यों नहीं मिल रही है मान्यता:-
राजस्थान सरकार का दोहरा बर्ताव – एक तरफ तो राजस्थान की सरकार मान्यता दिलाने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजती है, तो वहीं दूसरी तरफ राजस्थान के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं को कराने वाली संस्था राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) के पाठ्यक्रम से हटा देती है यानी इसे भाषा ही नहीं मानती। राज्य सरकार का ऐसा दोहरा बर्ताव इसमे बाधा बना हुआ है।
प्राथमिक और माध्यमिक स्कूली पाठ्यक्रम में नहीं होना:-
राजस्थानी भाषा का राजस्थान के स्कूल पाठ्यक्रम में माध्यमिक की कक्षाओं तक कोई अस्तित्व ही नहीं है, वही उच्च माध्यमिक विद्यालयों में जिला स्तर पर एक दो सरकारी स्कूल में होती है, जिससे यह संदेश जाता है कि लोगों की राजस्थानी भाषा के प्रति कोई रुचि नहीं है।
अखबार और मीडिया :-
राजस्थान मे राजस्थानी भाषा में कोई प्रचलित अखबार नहीं है। ना ही आज के डिजिटल युग में भी कोई ऐसी वेबसाइट जहां से आप राजस्थान के समाचार किसी अखबार की वेबसाइट की भांति तुरंत राजस्थानी में पढ़ सके।
भाषा को मान्यता मिलने से होने वाले लाभ:
सांस्कृतिक संरक्षण:
राजस्थानी भाषा को मान्यता मिलने से राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण होगा।
साहित्यिक विकास :-
राजस्थानी भाषा में साहित्य का विकास होगा और यह भाषा साहित्य और कला के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बनाएगी।
रोजगार के अवसर :-
राजस्थानी भाषा को मान्यता मिलने से रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे, खासकर शिक्षा, पर्यटन और साहित्य के क्षेत्र में।
आत्म-सम्मान :-
राजस्थानी भाषा को मान्यता मिलने से राजस्थान के लोगों में अपनी भाषा और संस्कृति के प्रति आत्म-सम्मान बढ़ेगा।
शिक्षा में सुधार :-
राजस्थानी भाषा में शिक्षा प्रदान करने से बच्चों को अपनी मातृभाषा में सीखने में सरलता होगी और उनकी शिक्षा में सुधार होगा।

राजस्थानी भाषा को मान्यता मिलने में कई चुनौतियाँ हैं, लेकिन भाषा को मान्यता मिलने से होने वाले लाभों को देखते हुए, इन चुनौतियों का सामना करना और राजस्थानी भाषा को मान्यता दिलाने के प्रयास जारी रखने चाहिए। राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित किये जाने के लिये केंद्र सरकार से समय-समय पर आग्रह किया जाता रहा है। इस संबंध में वर्ष 2003, 2009, 2015, 2017, 2019, 2020 व 2023 में मुख्यमंत्रियों द्वारा केंद्र सरकार को निवेदन किया गया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रकरण भारत सरकार के स्तर पर विचाराधीन है।
पूर्व में एक उत्तर लिखा था, जिसमें राजस्थानी भाषा को मान्यता नहीं मिलने के कारण हो रहीं प्रदेश के लोगों की पहचान और संस्कृति विलुप्त का जिक्र किया था, सभी राज्य अपनी भाषा के समर्थन में हिंदी का विरोध कर रहे हैं तो हम राजस्थानियों पर हिंदी क्यों थोपी जा रही हैं , हमें हमारा हक कब मिलेगा ? यह हैं राजस्थान के लोगों का अपने भाषा के प्रति दु:ख और कष्ट जिसे वह वर्षों से सह रहे हैं।


















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