विश्व जनसंख्या दिवस 2025: भारत में जनसंख्या की स्थिति
लेखक: हरिशंकर पाराशर

हर वर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य जनसंख्या वृद्धि और इससे जुड़े सामाजिक, आर्थिक, और पर्यावरणीय मुद्दों के प्रति जागरूकता फैलाना है। भारत, जो 2023 में चीन को पीछे छोड़कर विश्व का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन चुका है, के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है। संयुक्त राष्ट्र की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भारत की जनसंख्या 1.46 अरब तक पहुंचने का अनुमान है, जो विश्व की कुल जनसंख्या का लगभग 17.5% है। यह स्थिति भारत के लिए अवसर और चुनौतियों का एक अनूठा मिश्रण प्रस्तुत करती है।
* भारत की जनसंख्यकीय स्थिति
2011 की जनगणना के अनुसार, भारत की जनसंख्या 1.21 अरब थी, जो 2024 तक बढ़कर 1.44 अरब से अधिक हो चुकी है। संयुक्त राष्ट्र की अनुमानित रिपोर्ट के अनुसार, 2025 तक यह आंकड़ा 1.46 अरब तक पहुंच सकता है। भारत का जनसंख्या घनत्व 1496 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर (जैसे सारण, बिहार में) जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से उच्च है, जबकि ग्रामीण और दियारा क्षेत्रों में यह कम है। उत्तर प्रदेश, लगभग 20 करोड़ की आबादी के साथ, देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है, जबकि सिक्किम (6,07,688) सबसे कम आबादी वाला राज्य है।
भारत की जनसंख्या में युवा वर्ग का बड़ा हिस्सा है, जिसमें 10-24 आयु वर्ग में 26% लोग शामिल हैं। यह युवा शक्ति देश के आर्थिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन हो सकती है, बशर्ते इसे शिक्षा, स्वास्थ्य, और रोजगार के अवसरों के साथ सशक्त किया जाए। हालांकि, प्रजनन दर में कमी (वर्तमान में प्रति महिला 1.9 जन्म, जो प्रतिस्थापन दर 2.1 से कम है) भविष्य में जनसंख्या वृद्धि की गति को धीमा कर सकती है।
जनसंख्या वृद्धि की चुनौतियां
बढ़ती जनसंख्या के कारण भारत कई चुनौतियों का सामना कर रहा है:
1. *संसाधनों पर दबाव*: बढ़ती आबादी के कारण जल, भोजन, और ऊर्जा जैसे संसाधनों की कमी एक गंभीर समस्या बन रही है।
2. *पर्यावरणीय प्रभाव*: जनसंख्या वृद्धि के साथ वाहनों, उद्योगों, और निर्माण कार्यों में वृद्धि हुई है, जिससे वायु प्रदूषण और पर्यावरणीय क्षरण बढ़ा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 90% आबादी असुरक्षित हवा में सांस ले रही है, जिससे अस्थमा और अन्य सांस की बीमारियां बढ़ रही हैं। [
3. *स्वास्थ्य और शिक्षा*: घनी बस्तियों में स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा की पहुंच सीमित है, जिससे जीवन स्तर प्रभावित होता है।
4. *बेरोजगारी*: जनसंख्या वृद्धि के अनुपात में रोजगार के अवसरों की कमी बेरोजगारी को बढ़ावा दे रही है।
* विश्व जनसंख्या दिवस 2025: थीम और महत्व
विश्व जनसंख्या दिवस 2025 की थीम है, “युवाओं को एक निष्पक्ष और आशापूर्ण विश्व में अपने मनचाहे परिवार बनाने के लिए सशक्त बनाना।” यह थीम युवाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, और प्रजनन स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने पर केंद्रित है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य परिवार नियोजन, लैंगिक समानता, और मातृ-शिशु स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर ध्यान देना है। भारत में आशा कार्यकर्ताओं, गैर-सरकारी संगठनों, और स्वास्थ्य संस्थानों द्वारा रैलियों, शिविरों, और जागरूकता अभियानों के माध्यम से इन मुद्दों को जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है।
* समाधान और भविष्य की दिशा
भारत में जनसंख्या नियंत्रण के लिए परिवार नियोजन कार्यक्रमों को और hedging करें। जागरूकता अभियान, गर्भनिरोधक उपायों को बढ़ावा देना, और शिक्षा की पहुंच बढ़ाना आवश्यक है। साथ ही, प्रजनन स्वास्थ्य और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की जरूरत है। सरकार की योजनाएं जैसे बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और आयुष्मान भारत इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
विश्व जनसंख्या दिवस 2025 भारत के लिए एक अवसर है कि वह अपनी जनसंख्यकीय चुनौतियों पर गंभीरता से विचार करे। एक विशाल युवा आबादी भारत के लिए एक ताकत है, लेकिन इसके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, और रोजगार के अवसरों का समान वितरण आवश्यक है। परिवार नियोजन और जागरूकता अभियानों के माध्यम से जनसंख्या वृद्धि को संतुलित करना भारत के सतत विकास के लिए अनिवार्य है। इस दिशा में सामूहिक प्रयासों से ही भारत एक समृद्ध और संतुलित भविष्य की ओर अग्रसर हो सकता है।
हरिशंकर पाराशर
11 जुलाई, 2025
















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