विशेष संवाददाता पुनीत मरकाम भानुप्रतापपुर कांकेर युक्तियुक्तकरण नीति के खिलाफ प्रदेशभर में शिक्षकों का आक्रोश, शिवसेना ने दिया आंदोलन को समर्थन, चंद्रमौली मिश्रा ने साधा सरकार पर निशाना 
भानुप्रतापपुर।
छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था में उथल-पुथल का माहौल बनता जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए युक्तियुक्तकरण नियम को लेकर शिक्षक समाज में भारी नाराजगी है। वहीं अब इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग लेना शुरू कर दिया है। शिवसेना के प्रदेश महासचिव चंद्रमौली मिश्रा ने इस नियम को शिक्षकों के साथ अन्याय बताते हुए इसे “गैर-व्यावहारिक और अव्यवस्थित” करार दिया है। साथ ही उन्होंने भाजपा सरकार पर सीधा हमला करते हुए कहा है कि यह नीति प्रदेश की शिक्षा प्रणाली को खोखला कर रही है और इसका खामियाजा सीधे तौर पर शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों को भुगतना पड़ रहा है।
शिक्षकों की नाराजगी चरम पर, धरना-प्रदर्शन में हजारों शिक्षक शामिल
मिश्रा ने प्रेस को जारी बयान में कहा कि सरकार का यह निर्णय केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि लाखों शिक्षकों की रोजी-रोटी और आत्मसम्मान से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने बताया कि प्रदेशभर में शिक्षक संगठन एकजुट होकर इस नीति के विरोध में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसमें हजारों की संख्या में शिक्षक सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारी शिक्षकों का कहना है कि सरकार बिना शिक्षक संगठनों से संवाद किए तानाशाही तरीके से यह नीति थोप रही है।
उन्होंने आगे कहा कि “इस फैसले से शिक्षकों का मनोबल टूट रहा है। जिन शिक्षकों ने वर्षों से सेवा की है, उन्हें अचानक इधर-उधर ट्रांसफर कर देना और उनका स्कूल बदल देना न केवल प्रशासनिक अव्यवस्था को बढ़ावा देता है, बल्कि इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई भी बुरी तरह प्रभावित होती है।”
शिवसेना का स्पष्ट रुख – ‘शिक्षकों के साथ अन्याय नहीं सहेंगे’
शिवसेना नेता ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी इस अन्यायपूर्ण नीति के विरोध में शिक्षकों के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा,
> “शिवसेना शिक्षकों के आंदोलन का पूर्ण समर्थन करती है। सरकार अगर शिक्षकों की बात नहीं सुनती है तो शिवसेना आंदोलन को और उग्र करेगी।”
उन्होंने प्रदेश सरकार को आगाह करते हुए कहा कि यदि जल्द ही युक्तियुक्तकरण नीति को समाप्त नहीं किया गया, तो शिवसेना प्रदेशभर में सड़क से विधानसभा तक आंदोलन करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा सरकार की यह नीति लोकतंत्र के मूल भावना के विरुद्ध है, जिसमें संवाद और सहभागिता की बजाय जबरन आदेश थोपे जा रहे हैं।
शिक्षकों की मांग – नीति हो रद्द, संवाद हो स्थापित
धरने पर बैठे शिक्षकों की प्रमुख मांग है कि सरकार इस युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से निरस्त करे और शिक्षकों की पदस्थापना से संबंधित किसी भी नए निर्णय से पहले शिक्षक संगठनों के साथ खुलकर चर्चा करे। शिक्षकों का कहना है कि पदस्थापना और स्थानांतरण एक सतत प्रक्रिया होनी चाहिए, न कि अचानक थोपे गए नियमों का परिणाम।
राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज, सरकार पर बढ़ा दबाव
चंद्रमौली मिश्रा के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल पहले ही सरकार की नीतियों पर सवाल खड़ा कर रहे हैं और अब शिवसेना जैसे दलों का समर्थन मिलना इस मुद्दे को और बड़ा बना रहा है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि यदि सरकार इस विषय पर ठोस निर्णय नहीं लेती है, तो जल्द ही राज्यभर में व्यापक आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी।


















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