सत्यार्थ न्यूज़ भीलवाड़ा
अब्दुल सलाम रंगरेज
यूआईटी भीलवाड़ा की भूखंड आवंटन प्रक्रिया पर आगामी आदेश तक कोर्ट का स्टे

भीलवाड़ा
यूआईटी भीलवाड़ा द्वारा दिए जा रहे भूखंडों की फॉर्म भरने की तिथि कल अंतिम तिथि 15 जुलाई 2025 कर दी गई थी। लेकिन अभिभाषक संघ और वकीलों ने भूखंड हेतु पांच प्रतिशत वकीलों के लिए आरक्षित करने की मांग की थी। वकीलों की उक्त मांग पर ध्यान नहीं दिए जाने पर वकीलों द्वारा नगर विकास न्यास द्वारा भूखंड आवंटन का विरोध किया जा रहा था। जिला कलेक्टर भीलवाड़ा और नगर विकास न्यास अध्यक्ष को भी लिखकर प्रतिवेदन दिया गया था।
सात दिवस के भीतर कोई कार्रवाई नहीं होने पर अभिभाषक संघ ने इसके लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया। और आज भूखंड आवेदन प्रक्रिया पर अदालत द्वारा स्टे रोक लगा दी गई है।
जिला अभिभाषक संस्था के अध्यक्ष राजेश शर्मा ने बताया कि अधिवक्ताओं को आरक्षित कोटे में भूखंड आवंटन मामले में कोर्ट ने आज भीलवाड़ा यूआईटी की भूखंडों की आवंटन की लॉटरी में भीलवाड़ा कोर्ट ने स्टे दिया है। उन्होंने कहा कि हम दूसरों के न्याय दिलाते हैं लेकिन हमको न्याय नहीं मिला इसलिए यह कदम उठाना पड़ा।
जिला अभिभाषक संघ के अध्यक्ष राजेश शर्मा ने बताया कि यूआईटी ने जिला अभिभाषक संस्था की ओर से दायर याचिका पर जवाब पेश नहीं किया। इस पर अदालत ने आगामी आदेश तक लॉटरी प्रक्रिया पर स्थगन आदेश जारी किए ।

वही आमजन का भी आरोप है कि आठ आवासीय कॉलोनियों में आर्थिक दृष्टि और अल्प आय वर्ग के लोगों के लिए भूखंड मांग के अनुरूप कम आरक्षित किए गए हैं। जबकि मध्यम व उच्च वर्ग एवं नौकरी पेशा व व्यापारी वर्ग के लिए कहीं अधिक होने के साथ बड़ी साइज भी रखी गई है।
लोगों की यह भी शिकायत है कि न्यास आवेदन के साथ आय श्रेणी के आधार पर पंजीयन राशि वसूल रही है। आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्ग से दस हजार रुपए, अल्प आय वर्ग के लिए बीस हजार रुपए, मध्य आय वर्ग ए से तीस हजार व मध्य आय वर्ग बी से चालीस हजार व उच्च आय वर्ग के आवेदक से पचास हजार रुपए लिया जा रहा है। इस प्राप्त राशि से न्यास को ब्याज भी अच्छा मिला मिलेगा। ऐसे में पंजीयन से प्राप्त राजस्व भी लाखों को पार कर जाएगी।
3081 भूखंडों के आवंटन लॉटरी के जरिए करने के लिए न्यास अभी तक पचास हजार से आवेदन फार्म बेच चुकी है। कमाई के नजरिए न्यास प्रति आवेदन दो हजार रुपए की कीमत में देकर जनता से करीब दस करोड़ रुपए अभी तक कमा चुकी है। शिकायत है कि आवेदन फॉर्म की कीमत दो हजार रुपए रखी गई है, जो कि मूल लागत से दस गुना से अधिक है।
कांग्रेस, एसडीपीआई एवं अन्य राजनीतिक दलों द्वारा भी आवेदन प्रक्रिया में फॉर्म की राशि एवं साथ ही जमा की जाने वाली राशि को लेकर विरोध किया जा रहा था।
फिलहाल अभिभाषक संस्था की ओर से दायर याचिका पर यूआईटी की ओर से जवाब पेश नहीं किए जाने पर अदालत ने आगामी आदेश तक रोक लगा दी है।

















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