आयातित तुअर दाल पर मंडी टैक्स समाप्त: मध्य प्रदेश के दाल मिल उद्योग को मिला नया जीवन

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ऐतिहासिक निर्णय से कटनी के दाल मिल उद्योग में फिर लौटेगी रौनक*
सत्यार्थ न्यूज़ संवाददाता
*कटनी, मध्य प्रदेश।* मध्य प्रदेश के दाल मिल उद्योग, जो पिछले कई वर्षों से मंडी टैक्स के बोझ तले दम तोड़ रहा था, अब पुनर्जनन की राह पर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अन्य राज्यों से आयातित तुअर दाल पर लगने वाले 1.7 प्रतिशत मंडी टैक्स को पूरी तरह समाप्त करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस निर्णय से कटनी, जो मध्य प्रदेश का दाल मिल उद्योग का केंद्र है, सहित पूरे प्रदेश के दाल मिल संचालकों और हजारों श्रमिकों के चेहरों पर फिर से रौनक लौटने की उम्मीद जगी है।
### *लंबे समय से बीमार दाल मिल उद्योग को राहत*
पिछले एक दशक में मध्य प्रदेश का दाल मिल उद्योग भारी संकट से जूझ रहा था। अन्य राज्यों, जैसे महाराष्ट्र और राजस्थान, से तुअर दाल आयात करने पर दाल मिल संचालकों को दोहरा कराधान झेलना पड़ता था। पहले संबंधित राज्य में 1 प्रतिशत मंडी शुल्क और 1 प्रतिशत आढ़त शुल्क देना पड़ता था, और फिर मध्य प्रदेश में 1.7 प्रतिशत मंडी टैक्स। इस तरह कुल 3.7 प्रतिशत कराधान से दाल प्रसंस्करण की लागत बढ़ जाती थी, जिसके कारण मध्य प्रदेश के दाल मिल संचालक प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहे थे। परिणामस्वरूप, लागत बढ़ने और घाटे के कारण पिछले 5-7 वर्षों में कटनी की आधी से अधिक दाल मिलें बंद हो गईं, और शेष बची मिलें भी बंद होने की कगार पर थीं।
कटनी, जो कभी 250 दाल मिलों के साथ देश के दाल प्रसंस्करण का प्रमुख केंद्र था, वहां अब केवल 70 मिलें ही मुश्किल से चल रही थीं। इन मिलों में 24×7 काम होता था और हजारों श्रमिकों को रोजगार मिलता था। मंडी टैक्स के कारण उद्योगपतियों का पलायन शुरू हो गया था, और कई ने छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में अपनी इकाइयां स्थापित कर ली थीं, जहां मंडी टैक्स में छूट या कम शुल्क की सुविधा थी।
### *मुख्यमंत्री के निर्णय ने खोले समृद्धि के द्वार*
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना ने इस गंभीर समस्या का समाधान करते हुए अधिसूचना जारी की, जिसमें अन्य राज्यों से आयातित तुअर दाल पर मंडी टैक्स को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया। इस निर्णय से दाल मिल संचालकों को दोहरे कराधान से मुक्ति मिलेगी, जिससे प्रसंस्करण लागत में कमी आएगी। इससे न केवल मौजूदा मिलें फिर से पटरी पर आएंगी, बल्कि बंद पड़ी लगभग 125 दाल मिलों की चिमनियां फिर से धुआं उगलने लगेंगी।
इस निर्णय से कटनी के दाल मिल उद्योग की 3,000 टन प्रतिदिन की प्रसंस्करण क्षमता को नया बल मिलेगा। पूरे देश में दाल मिलिंग की कुल क्षमता 7,000 टन प्रतिदिन है, जिसमें कटनी का योगदान लगभग 43 प्रतिशत है। यह निर्णय न केवल स्थानीय उद्योग को पुनर्जनन देगा, बल्कि मध्य प्रदेश के दाल मिल उद्योग को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाएगा।
### *विधायक-सांसद के प्रयासों को मिली सार्थकता*
इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए कटनी के विधायक संदीप जायसवाल और सांसद वीडी शर्मा के अथक प्रयासों को श्रेय दिया जा रहा है। दाल मिलर्स और तुअर दाल मिल संघ ने लंबे समय से इस मांग को उठाया था, और विधायक-सांसद ने इसे मुख्यमंत्री तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तुअर दाल मिल संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र तीर्थानी, मनीष गेई, प्रेम बत्रा, अनिल केवलानी, देवराज केवलानी, समाजसेवी प्रकाश आहूजा, श्याम पंजवानी, और निरंजन पंजवानी ने मुख्यमंत्री, विधायक, सांसद, प्रभारी मंत्री जगदीश देवड़ा, और कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना सहित पूरे मंत्रिमंडल का आभार व्यक्त किया है।
### *पिछले वादों का टूटा भरोसा, अब मिली राहत*
यह पहली बार नहीं है जब दाल मिल उद्योग ने मंडी टैक्स से राहत की मांग की थी। वर्ष 2022 में तत्कालीन कृषि मंत्री कमल पटेल ने घोषणा की थी कि 1 अप्रैल 2022 से आयातित तुअर दाल पर मंडी टैक्स हटा लिया जाएगा, लेकिन यह वादा केवल एक अप्रैल फूल बनकर रह गया। बाद में 2023 में चुनावी वर्ष के दौरान दस महीनों के लिए टैक्स हटाया गया, लेकिन फिर इसे पुनः लागू कर दिया गया। इससे दाल मिलर्स का विश्वास टूट गया था। हालांकि, अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में इस स्थायी समाधान ने उद्योगपतियों और श्रमिकों में नई उम्मीद जगाई है।
### *श्रमिकों के लिए रोजगार, उद्योग के लिए नया जीवन*
इस निर्णय का सबसे बड़ा लाभ कटनी और मध्य प्रदेश के हजारों श्रमिकों को होगा, जिनकी रोजी-रोटी दाल मिल उद्योग से जुड़ी थी। बंद पड़ी मिलों के फिर से शुरू होने से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, बल्कि उद्योगपतियों का अन्य राज्यों में पलायन भी रुकेगा। तुअर दाल मिल संघ ने कहा कि यह निर्णय न केवल दाल उद्योग को नया जीवन देगा, बल्कि मध्य प्रदेश से अन्य राज्यों में निर्यात को भी बढ़ावा देगा।
### *निष्कर्ष*
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह निर्णय मध्य प्रदेश के दाल मिल उद्योग के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। कटनी, जो देश के दाल प्रसंस्करण का हब है, अब फिर से अपनी खोई हुई पहचान हासिल करने की राह पर है। यह निर्णय न केवल आर्थिक समृद्धि लाएगा, बल्कि हजारों परिवारों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगा। दाल मिलर्स और श्रमिक समुदाय ने इस ऐतिहासिक कदम के लिए राज्य सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का हृदय से आभार व्यक्त किया है।















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