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श्री रामायण प्रचार मंडल उधना सूरत द्वारा आयोजित शिव महापुराण कथा के सातवें और अंतिम दिन की कथा में रविवार को पंडित संदीप महाराज ने बाणासुर की तपस्या की कथा का सुनाया प्रसंग देखें फ़ोटो पढ़े खबर

सत्यार्थ न्यूज श्रीडूंगरगढ़- सवांददाता ब्युरो चीफ

श्री रामायण प्रचार मंडल उधना सूरत द्वारा आशानगर में आयोजित शिव महापुराण कथा के आयोजन में सातवें और अंतिम दिन की कथा में रविवार को पंडित संदीप महाराज ने सुनाया कि बाणासुर ने भगवान शिव की तपस्या की जिससे खुश होकर भगवान शिव ने वरदान में सहस्र बाहु बल दिया और साथ ही यह भी वचन दिया कि जब भी कोई संकट आएगा तो उससे मैं स्वयं रक्षा करूँगा और शिवगण उसके नगर में सुरक्षा के लिए निवास करने लगे। शोणितपुर के राजा वाणासुर की पुत्री उषा का स्वप्न में राजकुमार अनिरुद्ध के साथ मिलन होता है और अनिरुद्ध से प्रेम करने लगती है। महामंत्री कुंमाण्ड की पुत्री चित्रलेखा उषा की सहेली थी और योग विद्या में पारंगत थी, किसी भी बताये हुए हुलिये का हूबहू चित्र बना सकती थी। उषा ने कहा शादी तो वे अपने सपने में आने वाले राजकुमार से ही करेगी। योग की शक्ति से चित्रलेखा उसी रात द्वारिका गई और अपने योग बल से अनिरुद्ध को सुप्तावस्था में ही पलंग सहित उठाकर आकाश मार्ग से राजकुमारी उषा के शयनकक्ष में लेकर आ गई। राजकुमारी उषा अनिरुद्ध को देखते ही पहचान गई। राजकुमारी उषा ने अनिरुद्ध से कहा मैं आपके बिना जीवित नहीं रह सकती। सपने में ही सही हम दोनों ने प्रेम किया है और ओखीमठ जो वर्तमान में केदारनाथ के पास है में गन्धर्व विवाह कर लिया। बाणासुर को अपनी पुत्री और अनिरुद्ध के प्रेम का पता चला तो बाणासुर ने अनिरुद्ध को नागपाश से बांध लिया। अनिरुद्ध भगवान कृष्ण का पौत्र है, भगवान कृष्ण ने शिवजी की अनुमति से गुरुड़ का आह्वान करते हैं और अनिरुद्ध को नागपाश से मुक्त करा लेते है। भगवान कृष्ण और बाणासुर का युद्ध होता है और सुदर्शन चक्र से भगवान कृष्ण ने उसके सहस्र बाहु काट दिए और उसका अंत कर दिया। भगवान शिव के पांच मुख-सद्योजात वामदेव तत्पुरुष,अघोर और ईशान हुए और प्रत्येक मुख में तीन-तीन नेत्र बन गए। तभी से वे ‘पंचानन’ या ‘पंचवक्त्र’ कहलाने लगे। भगवान शिव के इन पंचमुख के अवतार की कथा पढ़ने और सुनने का बहुत माहात्म्य है। द्वादश ज्योर्तिलिंगों की कथा सुनने से मनुष्य की अपमृत्यु नही होती है। भगवान शिव सृष्टि का सर्जन, सृष्टि का पालन, सृष्टि का विनाश, अपने मे समाहित करना विरोभाव, अनुग्रह इस पांच प्रकार की कृपा कर देते हैं। कथा स्थल पर रविवार 11 मई को वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए राष्ट्र हित में वीर सैनिकों के लिए रक्तदान शिविर का आयोजन सुबह 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक रखा गया है एवं साथ ही वीर जवानों की सुरक्षा के लिए सुबह 8:15 बजे से हवन रखा गया है। श्री रामायण प्रचार मंडल व अन्य विभिन्न संस्थाओं द्वारा लोगों से बड़े पैमाने पर रक्तदान करने का आह्वान किया गया है।

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