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अनावश्यक किताबें व वर्दी खरीदने के लिए मजबूर करने वाले स्कूलों पर होगी कार्रवाई कुमारी शैलजा

रिपोर्टर इंद्रजीत स्थान कालावाली
जिला सिरसा

अनावश्यक किताबें व वर्दी खरीदने के लिए मजबूर करने वाले स्कूलों पर होगी कार्रवाई कुमारी शैलजा

पानी की बोतलें खरीदने के लिए अभिभावकों पर दबाव नहीं बना सकते स्कूल संचालक

हरियाणा में निजी स्कूलों की मनमानी पर प्रदेश सरकार सख्त हो गई है। अभिभावकों को अनावश्यक किताबें, वर्दी और पानी की बोतल खरीदने के लिए मजबूर करने वाले निजी स्कूलों पर कार्रवाई होगी। बस्ते का बोझ भी निर्धारित मापदंडों से अधिक नहीं होना चाहिए। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) और मौलिक शिक्षा अधिकारियों (डीईईओ) को नियमों का पालन नहीं कर रहे निजी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। निदेशालय के पास शिकायत पहुंची है कि कुछ निजी स्कूल शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम 2009 तथा हरियाणा विद्यालय शिक्षा नियम एवं विनियमन 2013 तथा पुस्तकों, वर्दी तथा अन्य वस्तुओं की खरीद के संबंध में विभाग द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। इसलिए सभी डीईओ और डीईईओ अपने अधिकार क्षेत्र के विद्यालयों में नियमों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करें।

कोई निजी स्कूल अभिभावकों को एनसीईआरटी या सीबीएसई द्वारा अनुमोदित पुस्तकों की बजाय निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें

शिक्षा निदेशालय ने वार-वार ड्रेस बदलने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का दिया है आदेश

इससे ज्यादा नहीं होना चाहिए बस्ते का बोझ

कक्षा

वजन

1-2

1.5 किग्रा

3-5

2-3 किग्रा

6-7

4 किग्रा

8-9

4.5 किग्रा

दसवी

5 किग्रा

खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। किताबें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप होनी चाहिए। छात्रों को स्कूल में पेयजल उपलब्ध कराने की जगह घर से पानी की बोतलें लाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इससे स्कूल बैग का वजन बढ़ जाता है। शिक्षा निदेशालय की ओर से कहा गया है कि मानदंडों का उल्लंघन करने वाले किसी भी स्कूल के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए। ईमेल आइडी और टेलीफोन नंबर आमजन से साझा करें ताकि वे शिकायत दर्ज करा सकें। शिकायत पर कार्रवाई की रिपोर्ट तुरंत मुख्यालय भेजनी होगी।

अभिभावकों को दोनों हाथों से लूट रहे निजी स्कूल संचालक : कुमारी सैलजा

जागरण संवाददाता, सिरसा सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि नया शिक्षण सत्र शुरू हो चुका है और निजी स्कूल संचालक दोनों हाथों से अभिभावकों को लूट रहे हैं और सरकार हाथ पर हाथ रखकर तमाशा सांसद कुमारी सैलजा विज्ञप्ति देख रही है। अभिभावक बच्चों के भविष्य की खातिर चुप्पी साध जाते हैं। अगर सरकार ने सरकारी स्कूलों के हालात सुधारने पर ध्यान दिया होता तो अभिभावक लुटने को मजबूर न होते। अभिभावक निजी स्कूल प्रबंधन द्वारा बताई गई दुकानों से महंगे दाम में कापी-किताबें और वर्दी खरीदने पर मजबूर हैं। नर्सरी से लेकर आठवीं कक्षा तक तीन से सात हजार रुपये की कापी किताबें खरीद रहे हैं। शिक्षा विभाग खानापूर्ति के लिए ही निजी स्कूल संचालकों को पत्र जारी कर निर्देश देता है जबकि सब मिले हुए हैं। अभिभावक शिकायत भी करता। रता है तो आज तक किसी भी स्कूल संचालक

के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में अभिभावक महंगी कापी-किताबें खरीदने को मजबूर हैं। शिक्षा विभाग के नियमानुसार एनसीईआरटी की पुस्तकें चलाना अनिवार्य है, लेकिन प्राइवेट स्कूल वालों द्वारा मोटी कमाई करने के चक्कर में अपनी किताबों का निजी प्रकाशन करवाते हैं या निजी प्रकाशकों की ही किताबें स्कूल में पढ़ाते हैं। सांसद ने कहा कि पब्लिशर से मिलकर 100 रुपये वाली किताब का मूल्य 500 लिखवाया जाता है इसमें से 30 प्रतिशत स्कूल संचालकों का, 20 प्रतिशत कमीशन बुक सेलर का होता है, 15 प्रतिशत मार्केटिंग पर खर्च किया जाता है। अगर स्कूल संचालक जिद पर अड़ जाए तो उसका कमीशन 30 से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया जाता है। एनसीईआरटी की पुस्तकों में कमीशन का कोई खेल नहीं होता है अगर उस पर 100 रुपये मूल्य अंकित है तो वह 100 रुपये में बिकेगी। नर्सरी कक्षा का सेट 3400 रुपये में पड़ता है वहां कक्षा आठ का सेट 7800 रुपये में पड़ता है।

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