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पैराडाइज स्कूल मे छत्रपति शिवाजी को याद किया गया 

छ.ग. विशेष संवाददाता :- राजेन्द्र मंडावी                                                                                   पैराडाइज स्कूल मे छत्रपति शिवाजी को याद किया गया 

 

 

कांकेर। पैराडाइज हायर सेकेण्डरी स्कूल में वीर छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर उन्हें याद किया गया तथा भारतीय इतिहास में उनके योगदान को याद किया गया। कक्षा 7वीं की छात्रा तेजस्वी देवागंन ने शिवाजी महाराज के जीवन के बारे में बताते हुये कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज भारत के सबसे बहादुर और बुद्धिमान राजाओं में से एक थे। उन्होंने बचपन से ही वीरता एवं स्वराज्य शिक्षा तथा छोटी उम्र से ही यु़द्ध कौशल और प्रशासन की शिक्षा लेनी शुरू कर दी थी। अंग्रेजी भाषा में विविका कोर्राम ने बताया कि छत्रपति शिवाजी महाराज बचपन से ही बहुत ही सुलझे एवं चतुर बुद्धिमान योद्धा थे, वह केवल वीर योद्धा नही बल्कि एक दयालु और न्यायप्रिय शासक भी थे वे सभी धर्मो का सम्मान करते थे और हमेशा अपने प्रजा की भलाई के लिए कार्य करते थे। उनके राज्य में महिलाओं और गरीबों की रक्षा की जाती थी। उन्होंने एक मजबूत नौसेना बनाई, इसलिए उन्हें ’’भारतीय नौसेना का जनक’’ भी कहा जाता है। छात्रपति शिवाजी महाराज हमें साहस, ईमानदारी और नेतृत्व की सीख देते हैं। हमें उनके आदर्शो को अपनाना चाहिए और हमेशा सच्चाई और न्याय के मार्ग पर चलना चाहिए। प्राइमरी कक्षाओं से सिम्मी सिन्हा कविता एवं स्लोगन के माध्यम से एवं यशस्वी पोर्ते ने भाषण के द्वारा शिवाजी महाराज के बारे में बताया। प्राइमरी एवं मिडिल कक्षाओं के लिये प्रश्नउत्तरी कार्यक्रम रखा गया।

इस वीरता एवं राष्ट्र-प्रेम से प्रेरित कार्यक्रम को संपन्न कराने मे प्राचार्य रश्मि रजक, उप प्राचार्य हरिन्द्र गोलुगुरी, एडमिनिस्ट्रेटर हमीद खान, कोऑर्डिनेटर पूनम जीत कौर वरिष्ठ शिक्षक प्रीति झा, पवित्र बराई, रूबी खान, दीपांजली गोगोई, एस.मर्सी, शबाना परवीन, मेघा सेवा, अवतार सिंह, कृष्णापद कुंभकार, भारती सेठिया, प्रतीक सिह, संगीता भारती, जीतूदास माण्डले, सुचिस्मिता खान, इतिश्री गोलुगुरी, अनिल कुमार ढाके, उज्जवल निर्मलकर, शांति लीना नेताम, रीया सोनी, सुन्नदा शर्मा, शिखा मेहरा, लक्ष्मीनारायण नामदेव, अपूर्वा ठाकुर, रामेश्वरी साहू, यामुना बिलोधिया, सुकदेव सरकार, पार्वती गजबल्ला, तुलसी निषाद, देवश्री साहू, सपना पाण्डे, संतोष ठाकुर, आदि शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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