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त्याग, तपस्या और सेवा की साक्षात प्रतिमूर्ति थे ब्रह्मलीन .स्वामी श्यामसंदर शास्त्री -स्वामी हरिहरानंद

पारुल राठौर हरिद्वार

त्याग, तपस्या और सेवा की साक्षात प्रतिमूर्ति थे ब्रह्मलीन .स्वामी श्यामसंदर शास्त्री -स्वामी हरिहरानंद


श्री गरीबदासीय आश्रम के ब्रह्मलीन परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर डा.स्वामी श्यामसुंदरदास शास्त्री महाराज की 104वीं जयंती के अवसर पर संत महापुरूषों के सानिध्य में जगजीतपुर स्थित श्री गरीबदासी संस्कृत महाविद्यालय में समारोह पूर्वक विद्वत सम्मेलन का आयोजन किया गया। समारोह में संत समाज और अतिथीयों ने ब्रह्मलीन स्वामी श्यामसुंदरदास शास्त्री महाराज का भावपूर्ण स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। डा.पदम प्रसाद सुवेदी के संचालन में आयोजित

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आश्रम के अध्यक्ष आचार्य स्वामी डा.हरिहरानंद ने कहा कि पूज्य गुरूदेव ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर डा.स्वामी श्यामसंदर शास्त्री महाराज त्याग, तपस्या और सेवा की साक्षात प्रतिमूर्ति थे। पूज्य गुरूदेव के सानिध्य में प्राप्त शिक्षाओं का अनुसरण करते हुए उनके द्वारा स्थापित आश्रम की सेवा पंरपरांओं को आगे बढ़ा रहे हैं। मेयर किरण जैसल ने कहा कि ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी डा.श्यामसुंदरदास शास्त्री महाराज विद्वान और तपस्वी संत थे। मानव कल्याण में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

स्वामी रविदेव शास्त्री ने कहा कि पूज्य गुरूदेव ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी श्यामसुंदरदास शास्त्री आज भले ही स्थूल रूप से संसार में उपस्थित नहीं है। लेकिन उनकी शिक्षाएं, विचार और कृतित्व सदैव समाज को प्रेरणा देते रहेंगे। सभी को उनके दिखाए मार्ग का अनुसरण करने का संकल्प लेना चाहिए। महंत दिनेश दास, महंत सुतिक्ष्ण मुनि, महंत शिवम महाराज, महंत राम, महंत अनंतानंद, महाविद्यालय की प्रधानाचार्य प्रेरणा गर्ग, प्रो.भोला झा, श्री गरीबदासीय आश्रम के प्रबंधक संजय वर्मा, लोकनाथ सुवेदी, डा.पदम प्रसाद सुवेदी, डा.विष्णु दत्त राकेश, हरिगोपाल शास्त्री, राकेश, डा.डंबर प्रसाद, मुकेश पाराशर, केशव बलियानी, दुर्गा प्रसाद आदि ने भी ब्रह्मलीन स्वामी डा.श्यामसुंदरदास शास्त्री को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर सैकड़ों की संख्या में संतजन, संस्कृत महाविद्यालय के छात्र व श्रद्धालु भक्त उपस्थित रहे।

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