प्रदेश जिला पंचायत सदस्य संगठन उत्तराखंड की मंगलवार शाम आयोजित वर्चुअल बैठक में जिला योजना समिति के गठन और पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकारों को लेकर तीखा असंतोष सामने आया। प्रदेश अध्यक्ष भास्कर सम्मल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए संगठन ने बड़ा आंदोलन छेड़ने के संकेत दिए। कार्यकारिणी अध्यक्ष राजेंद्र सिंह रांगड़ ने बैठक की शुरुआत करते हुए कहा कि प्रदेश में अब तक जिला योजना समिति के चुनाव न होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अनदेखी है। सदस्यों ने आरोप लगाया कि कई जनपदों में बिना समिति गठन के ही जिला योजना बैठकों का आयोजन किया जा रहा है, जो नियमों के विपरीत है। विशेष रूप से चमोली और रुद्रप्रयाग में बैठक न होने तथा अन्य जिलों में नियमों को दरकिनार करने पर कड़ी नाराजगी जताई गई।
बैठक में यह मुद्दा भी उठा कि जिला पंचायत अध्यक्षों को उनकी गरिमा के अनुरूप भूमिका न देकर केवल सदस्य के रूप में शामिल किया जा रहा है, जिसे पंचायत व्यवस्था का अपमान बताया गया। चमोली के सदस्य सुरेश कुमार बिष्ट ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजने का प्रस्ताव रखा, जिसे सर्वसम्मति से मंजूरी मिली। वहीं उर्मिला बिष्ट ने विकास कार्यों की सीमा ₹2.5 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख करने की मांग की।
बागेश्वर के बलवंत सिंह नेगी ने जिला योजना में पंचायत सदस्यों की योजनाओं की अनदेखी पर रोष जताते हुए निधियों के समान वितरण की मांग रखी। प्रदेश महामंत्री अनूप राज ने मुख्यमंत्री से शीघ्र वार्ता का प्रस्ताव रखा, जबकि प्रदेश सचिव दीपेंद्र कोहली ने योजनाओं की पात्रता से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
संगठन की प्रमुख मांगें:
जिला योजना समिति के चुनाव शीघ्र कराए जाएं,
जिला पंचायत सदस्यों का मानदेय ₹30,000 प्रतिमाह किया जाए,
विधायक निधि की तर्ज पर जिला पंचायत निधि लागू की जाए,
पंचायत कल्याण कोष बनाकर आकस्मिक स्थिति में ₹5 लाख सहायता दी जाए,
कोटेशन आधारित कार्यों की सीमा ₹2.5 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख की जाए,
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 11 मई सुबह 11 बजे प्रदेश के सभी जिलों में एक साथ जिलाधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री और पंचायती राज मंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा। साथ ही संगठन द्वारा एक समान प्रेस विज्ञप्ति जारी कर पूरे प्रदेश में एकजुटता का संदेश दिया जाएगा। अंत में प्रदेश अध्यक्ष भास्कर सम्मल ने कहा कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन प्रदेशव्यापी आंदोलन के लिए बाध्य होगा। बैठक में चमोली, टिहरी, रुद्रप्रयाग, अल्मोड़ा, बागेश्वर, ऊधमसिंहनगर, पौड़ी, उत्तरकाशी, चंपावत, पिथौरागढ़ और देहरादून समेत विभिन्न जनपदों के दर्जनों सदस्य व पदाधिकारी वर्चुअली शामिल थे।
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