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संत त्रिलोचन दास महाराज जैसे संत ही पूरे विश्व को सही दिशा व दशा दे सकते हैं: श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज

पारुल राठौर
जूना अखाड़ा

संत त्रिलोचन दास महाराज जैसे संत ही पूरे विश्व को सही दिशा व दशा दे सकते हैं: श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज

श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज जैसे महान संतों के कारण ही सनातन धर्म व भारत का परचम पूरे विश्व में सबसे ऊपर रहा और हमेशा रहेगाः संत त्रिलोचन दास महाराज


सचखंड नानक धाम, इंद्रापुरी लोनी के 45 वें स्थापना दिवस के दूसरे दिन विराट दास धर्म संत समागम का आयोजन किया गया। संत समागम में देश-विदेश के संत शामिल हुए। दास धर्म के प्रमुख संत त्रिलोचन दास महाराज की अध्यक्षता में हुए विराट दास धर्म संत समागम में मुख्य अतिथि श्री दूधेश्वर पीठाधीश्वर व जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमहंत नारायण गिरी महाराज रहे। श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने कहा कि सचखंड नानक धाम की स्थापना संत दर्शन दास ने 1973 में बटाला में की थी। सचखंड नानक धाम ईश्वर का ऐसा सच्चा घर है, जो मनुष्य का ईश्वर से साक्षात्कार कराता है और पूरे विश्व को मानव कल्याण की शिक्षा देता है।

महाराजश्री का सपना अखंड भारत की स्थापना करना था और अपने इस सपनेे को पूरा करने के लिए उन्होंने लोनी में जब सचखंड नानक धाम की स्थापना की तो यहां पर जंगल ही जंगल था, मगर महाराजश्री के कदम पडते ही यह पूरा क्षेत्र विश्व का प्रमुख आयात्मिक केंद्र बन गया। आज दास धर्म के प्रमुख संत त्रिलोचन दास महाराज देश ही नहीं पूरे विश्व में सनातन धर्म की पताका फहरा रहे हैं और पूरे विश्व को ज्ञान व मानवता कल्याण का मार्ग दिखा रहे हैं। संत त्रिलोचन दास महाराज को वे बचपन से देखते आए हैं और बचपन में ही उनको देखकर ऐसा लगता था कि मानवता के कल्याण के लिए एक महापुरूष ने जन्म ले लिया है। वे धर्म, जाति और संप्रदाय के भेदभाव से ऊपर उठकर मानवता की बात करते हैं। परस्पर सहयोग और भाईचारे का संदेश देते हैं और कहते हैं कि समाज की असली शक्ति उसकी एकता में ही है। संत त्रिलोचन दास महाराज जैसे संत ही पूरे विश्व को सही दिशा व दशा दे सकते हैं। संत त्रिलोचन दास महाराज ने श्रीमहंत नारायण गिरि का स्वागत करते हुए कहा कि श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज जैसे महान संतों के कारण ही सनातन धर्म,

भारत व यहां की संस्कृति का परचम पूरे विश्व में सबसे ऊपर रहा और हमेशा रहेगा। उनसे उन्हें हमेशा पिता के समान स्नेह व मार्गदर्शन मिला। उन्होंने कहा कि उनका प्रमुख उद्देश्य समाज में समरसता और भाईचारे का माहौल बनाना है। उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वक्फ बोर्ड को तत्काल समाप्त कर सनातन बोर्ड प्राथमिकता के साथ गठित करने की मांग की जिससे सनातन धर्म की रक्षा की जा सके। आज हमारे सनातन धर्म में प्रेरणा का स्रोत है। निर्मल अखाड़े के परमध्यक्ष श्री महंत ज्ञान देव सिंह शास्त्री ने कहा कि संत महापुरुष व्यक्तिगत मोक्ष प्राप्ति के लिए बल्कि समाज की भलाई और मानवता की सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित

 

करते हैं। कथा व्यास स्वामी अर्पित महाराज,अरुण चैतन्यपुरी, बाबा हरजीत सिंह रसूलपुर ;अयोध्या लंगर वाले, स्वामी भूपेंद्र गिरीए आध्यात्मिक गुरु स्वामी दीपांकर महाराज, भागवत आचार्य संजीव कृष्ण ठाकुर वृंदावन, जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी राम दिनेशाचार्य महाराज, महामंडलेश्वर बाल साध्वी पुष्पांजलि पुरी, संत बाबा रणजीत सिंह, आध्यात्मिक गुरु महामंडलेश्वर स्वामी कृष्णानंद, तन्मय वशिष्ठ, आचार्य विवेक मुनि, स्वामी योग भूषण महाराज, श्रीमहंत स्वामी ज्ञान देव सिंह, दीपक दास, हेरि दास, राम अहूजा आदि भी मौजूद रहे। दास धाम समागम में पहुंचे सभी संत महापुरुषों का फूलमाला पहनाकर स्वागत सम्मान किया गया।

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