पारुल राठौर
हरिद्वार
संत रविदास का मानना था कि जन्म से कोई ऊँचा या नीचा नही होता। सभी अपने कर्मों के कारण ही अच्छे बुरे और छोटे बड़े हो जाते हैं: मदन कौशिक

सन्त शिरोमणी श्री गुरु रविदास जी के 648वें प्रकटोत्सव पर श्री गुरु रविदास मन्दिर मौहल्ला कडच्छ ज्वालापुर में पहुँच कर हरिद्वार के यशस्वी विधायक माननीय मदन कौशिक जी ने सतगुरु रविदास जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और महापूजा में भाग लिया। इस अवसर गुरु रविदास जी को नमन करते हुऐ उन्होंने कहा कि आज से लगभग साढ़े छः सौ वर्ष पूर्व माघ पूर्णिमा के दिन गुरु रविदास जी का अवतरण हुआ। उन्होंने बाल्यकाल से ही ईश्वर भक्ति में स्वयं को समर्पित कर दिया और हर समय ईश्वर की भक्ति में लगे रहते थे। गुरु रविदास जी नें समाज में फैली जातिवादी मानसिकता ,छुआछूत और अश्पृश्यता को घोर विरोध किया और ऊँच नीच के भेदभाव को समाप्त करने के लिये संघर्ष किया। उनका मानना था कि जन्म से कोई ऊँचा या नीचा नही होता सभी अपने कर्मों के कारण ही अच्छे बुरे और छोटे बड़े हों जाते हैं।

“रविदास जन्म के कारणे होत कोऊ ना नीच ! नर को नीच कर डारि दे ओछे करम की कीच !!”
सन्त रविदास मानव मात्र को एक सामान मानते थे और समाज में व्याप्त वर्ण व्यवस्था की घोर निन्दा की। धर्म परिवर्तन के कठिन दौर में भी उन्होंने अपना धर्म नही छोड़ा और सनातन की रक्षा के लिये सिंकदर लोधी के कैदी बनकर भी घोर यातनाएँ सही, लेकिन धर्म परिवर्तन नही किया। रविदास जी सबके लिये एक समान अधिकारों की बात करते थे !
“ऐसा चाहूँ राज मैं ,जहाँ मिलें सबन को अन्न। छोट बड़े सब सम बसें ,रहे रैदास प्रसन्न।।”

सन्त रविदास जी की शिक्षायें समाज को एकसूत्र में बाँधकर समाज में फैली कुरीतियों और पाखण्डवाद को दूर करती हैं और आज के समय में बहुत ही प्रासंगिक हैं।
ऐसे महापुरुष के जन्मोत्सव की सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाऐं और बधाई दी।
इस अवसर पर श्यामल प्रधान, गुरु रविदास लीला समिति अध्यक्ष योगेंद्र पाल रवि जी, महामंत्री श्री गुरु रविदास लीला समिति सतीश कुमार, राजन कुमार जी, पवन कुमार, विजय कुमार जी, गोपाल सिंह, विक्रांत कुमार, विकास कुमार, सोनी कुमार, रमेश भूषण, रवि प्रकाश आदि कार्यकर्ता और रविदास भक्त उपस्थित रहे।


















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