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पंचकोसी परिक्रमा यात्रा का जगह-जगह स्वागत हुआ

Parul Rathaur
Haridwar

पंचकोसी परिक्रमा यात्रा का जगह-जगह स्वागत हुआ

पंचकोसी परिक्रमा यात्रा में तीसरे दिन बड़ी संख्या में युवा भी शामिल हुए


प्रयागराज की ऐतिहासिक पंचकोसी परिक्रमा यात्रा में तीसरे दिन बुधवार को हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। बड़ी संख्या में युवा भी यात्रा में शामिल हुए। जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि महाराज के दिशा.निर्देशन व नेेतृत्व में निकली पंचकोसी परिक्रमा यात्रा का जगह-जगह स्वागत किया गया। तीसरे दिन संगम स्नान के साथ यात्रा का शुभारंभ हुआ। यमुना पार के लालापुर स्थित प्राचीन मनकामेश्वर महादेव के दर्शन.पूजन के बाद बीकर गांव में पद्म माधव का दर्शन-पूजन किया गया।

 

सुजावन देव मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद पर्णास मुनि के आश्रम में महर्षि वाल्मीकि, पर्णास ऋषि व ज्वाला देवी का दर्शन.पूजन हुआ। ज्वाला देवी दर्शन-पूजन के बाद संगम तट पर त्रिवेणी मार्ग स्थित दत्तात्रेय शिविर में यात्रा ने रात्रि विश्राम किया। श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने कहा कि पंचकोसी परिक्रमा का बहंुत अधिक महत्व है। परिक्रमा करने से महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं को शुभ फलों की प्राप्ति होती है और जीवन में हमेशा सुख समृद्धि रहती है। जगद्गुरु शंकराचार्य सुमेरूमठ काशी स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि पंचकोसी परिक्रमा करने से पांच विकार. काम, क्रोध, मोह, मद और लोभ से मुक्ति मिलती है।

श्री दूघेश्वर पीठाधीश्वर व श्री पंच दशनाम जूना अखाडा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने कहा कि पंचकोसी परिक्रमा करने वाले भक्त का आध्यात्मिक विकास होता है और उसे आत्मिक शांति मिलती है। पंचकोसी परिक्रमा लगाने से सभी तीर्थों के दर्शन का फल भक्तों को प्राप्त होता है। साथ ही पितर भी संतुष्ट होकर अपनी कृपा की बारिश करते हैं। महामंडलेश्वर भवानी नंदन बाल्मीकि, प्राचीन देवी मंदिर दिल्ली गेट द्वारका पुरी के महंत गिरिशानंद गिरि महाराज, मुन्नी लाल पांडे आदि भी यात्रा में शामिल रहे।

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