Parul Rathaur
प्रयागराज
राष्ट्रसंत, मानस कथा मर्मज्ञ, पूज्य मोरारी बापू के श्रीमुख से हो रही दिव्य मानस कथा में आज आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज का पावन सान्निध्य

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने आचार्य सुधांशु जी को हिमालय की हरित भेंट रूद्राक्ष का पौधा किया भेंट
भारत की पूरी कैबिनेट संगम के तट पर एकत्र होकर सारे फासलों को दूर करने के लिये ले रही हैं संगम में डुबकी
आज 22 जनवरी अयोध्या श्रीराम मन्दिर प्राणप्रतिष्ठा की प्रथम वर्षगांठ के दिव्य अवसर पर पूज्य बापू ने मानस कथा में प्रभु श्रीराम जी के जन्म की कथा का किया गायन
श्रीराम जन्मोत्सव का दिव्य, भव्य, अलौकिक आयोजन
*💐सत्य, प्रेम और करूणा का मंत्र यूनाइटेड नेशन का मंत्र बने
💥प्रभु श्रीराम के चरण, शरण और आचरण हमारे जीवन का पाथेय बनें

परमार्थ निकेतन शिविर, अरैल प्रयागराज में स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, स्वामी संतोषदास जी (सतुआ बाबा), साध्वी भगवती सरस्वती जी और पूज्य संतों के पावन सान्निध्य में राष्ट्रसंत पूज्य मोरारी बापू के श्रीमुख से हो रही दिव्य मानस कथा में आज आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज का पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और पूज्य मोरारी बापू ने आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज को रूद्राक्ष का दिव्य पौधा भेंट कर मानस कथा में उनका अभिनन्दन किया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा आज से एक वर्ष पहले ठीक आज ही के दिन 22 जनवरी को अयोध्या में प्रभु श्रीराम जी की प्राणप्रतिष्ठा हुई थी, जिसके हम सभी साक्षी थे। वह सनातन संस्कृति का एक सिग्नेचर इवेंट था। सिग्नेचर इवेंट इसलिए भी था क्योंकि वह केवल राम मंदिर की प्राणप्रतिष्ठा नहीं, बल्कि राष्ट्र मंदिर की प्रतिष्ठा है, जो पूरे विश्व को संदेश दे रहा है कि भारत एक है और विविधता में एकता, भारत की विशेषता है और इसी का दर्शन आज का यह भव्य उत्सव करा रहा है। यह उत्सव भारत के भूगोल को बदलने वाला है; लोगों के दिमागों; लोगों के दिलों को बदलने वाला है जो दिलों को जोड़ेगा, दीवारों को तोड़ेगा और दरारों को भर देगा और सब को एक कर देगा।

स्वामी जी ने कहा कि मनुष्य के अन्दर की अच्छाई जब बाहर आती है तो रामराज्य की स्थापना होती है; समाज का उत्थान होता है और जब बुराई बाहर आती है तो रावण की तरह पतन होता है। लगभग 500 वर्षों की कड़ी तपस्या के पश्चात आज के ही दिन भगवान श्रीराम जी की प्राणप्रतिष्ठा हुई। अब समय है कि हम सब मिलकर हमारे समाज में श्रीराम जी के आदर्शों को भी स्थापित करें।
स्वामी जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति ऐसी है कि जो हमारे पास आया उसका हमने अभिनन्दन किया और जो हमारे मूल, मूल्य, संस्कृति व संस्कार हैं, उनका हम वंदन करें। हम सब बहुत भाग्यशाली हैं कि हमें पूज्य बापू के रूप में भारत का मूल प्राप्त हुआ है। हम भाग्यशाली हैं कि पूज्य बापू श्रीराम कथा के माध्यम से प्रभु श्रीराम के दर्शन हमें करा रहे हैं। आज की यह तारीख व तिथि इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखी जाएगी क्योंकि यह तिथि दीवारों पर नहीं, हमारे दिलों में अंकित है।

स्वामी जी ने सभी का आह्वान करते हुए कहा कि धनवान वह नहीं है जिसकी तिजोरी में धन भरा हुआ है, बल्कि धनवान तो वह है जिसकी जीवन रूपी तिजोरी सत्य, प्रेम, करूणा व इंसानियत से भरी हुई है।
आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज ने कहा कि पूज्य बापू, श्रीराम कथा के माध्यम से इस पवित्र तीर्थ को गरिमा प्रदान कर रहे हैं और इस तीर्थ में भक्ति धारा निरंतर प्रवाहित कर रहे हैं। बापू के दर्शन, श्रवण व मनन का आज हम सभी को अवसर प्राप्त हो रहा है। हम वास्तव में बहुत भाग्यशाली हैं कि हमें बापू के वचनों को श्रवण करने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है।
उन्होंने कहा कि एक बार तीर्थराज प्रयाग में ऋषि याज्ञावल्क्य के साथ अनेक ऋषि-महर्षि एकत्र हुए और चर्चा हो रही थी कि संसार में सबसे बड़ा अभागा कौन? जिसके पास धन नहीं, जिसके पास ज्ञान नहीं है, क्या वह सबसे बड़ा अभागा है? उसी समय व्यास ऋषि खड़े हुए और कहा कि जिसके पास प्रभु का नाम नहीं, वह सबसे बड़ा अभागा है। पूज्य बापू न केवल भारत, बल्कि पूरे विश्व में प्रभु का नाम पहुंचा रहे हैं। वर्तमान समय के राजऋषि व महर्षि हमारे पूज्य बापू हैं। बापू हर हृदय के रामनाम का संचार करने वाले तथा प्रेमरस प्रवाहित करने वाले हैं।

उन्होंने सभी का आह्वान करते हुए कहा कि हमारे जीवन में धैर्य, क्षमा और शांति सदैव होनी चाहिए। जीवन में दया हो वही तीर्थ है, जीवन में शांति है वही तीर्थ है, जीवन में करूणा है वही तीर्थ है। उन्होंने कहा कि परमात्मा हमें ऐसा हृदय प्रदान करें ताकि हम अपने गुरूजनों को सदैव सम्मान प्रदान करते रहें। यहां से हम संकल्प लेकर जाएं क्योंकि वर्तमान समय में सनातन नया रूप में अंगड़ाई ले रहा है, नया आकार ले रहा है, ऐसे में हर व्यक्ति व परिवार को वेदों से जुड़ना होगा। उन्होंने संदेश दिया कि अब हिंदू समाज को न कटना है, न बटना है, न घटना है, न मिटना है, हमें एक होना है, नेक होना है और सब को मिलकर चलना है।
आज के मानस महाकुंभ में पूज्य बापू ने श्रीराम जन्मोत्सव का अलौकिक वर्णन किया।


















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