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गोमाता के संरक्षण से ही भारत सोने की चिड़िया कहलाता था

गोमाता के संरक्षण से ही भारत सोने की चिड़िया कहलाता था

सत्यार्थी न्यूज़ संवाददाता

सुसनेर। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव द्वारा मध्य प्रदेश के निराश्रित गोवंश के संरक्षण हेतु सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में भारतीय नूतन संवत 2081 से घोषित “गोवंश रक्षा वर्ष” के तहत जनपद पंचायत सुसनेर की समीपस्थ ननोरा, श्यामपुरा, सेमली व सालरिया ग्राम पंचायत की सीमा पर मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित एवं श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा द्वारा संचालित विश्व के प्रथम श्री कामधेनु गो अभयारण्य मालवा में चल रहें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 276 वें दिवस पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती जी महाराज ने गोबर की महिमा का वर्णन करते हुए बताया कि भारत में जब मुगलकाल था उस समय गो हत्या पर पूर्ण प्रतिबन्ध था, अंग्रेजो के काल में कुछ गौहत्या होती थी लेकिन आजादी के समय तो गो हत्या को इतना बढ़ावा मिला कि आज प्रतिदिन 80 हजार गोवंश नित्य कट रहा है और भारत के सभी मत पंथ,सम्प्रदायों से आह्वान किया कि गोमाता की राजेश हम सभी संगठित होकर भारत की रीढ़ गोमाता के संरक्षण में जुटे।

*276 वें दिवस पर स्वामीनारायण सम्प्रदाय के पूज्य सन्त देवचरणदास जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में बताया कि गोभक्ति ऐसी भक्ति है जिससे कभी थकान नहीं होती है बल्कि आनन्द की अनुभूति होती है और वह भक्ति निष्काम भाव से हो तो कामधेनु मैया। कोई कमी नहीं आने देती है और त्रेतायुग में तो भगवान राम सूर्यवंशी गौत्र से थे और अपने पीछे सूर्यवंशी लगा सकते थे लेकिन उन्होंने अपने आपको रघुकुल वंशी माना क्योंकि उनके पूर्वज राजा रघु भगवती नंदिनी गोमाता की कृपा से इस धरती पर अवतरित हुए है इसलिए उनके गौत्र से ही गौसेवा दृष्टिगोचर होती है इसी प्रकार कन्हैया तो गोपालक वंश यदुवंश में प्रकट होकर उन्होंने गौसेवा का पथ दिखाया है और इसलिए स्वामीनारायण सम्प्रदाय के जितने भी संस्थान है उन सभी संस्थानों में गौसेवा के प्रकल्प है और विश्व के इस प्रथम गो अभयारण्य से पूज्य स्वामी गोपालानंद सरस्वती जी ने गोरक्षार्थ जो एकादश आयाम का शुभारंभ किया है उसके लिए स्वामीनारायण संस्थान पूरा सहयोग करेगा क्योंकि गाय मनुष्य भी श्रेष्ठ है इसलिए तो भगवान परशुराम ने गो हत्यारों का इस धरा से नामोनिशान मिटाया ।
स्वामीजी ने आगे बताया कि इस संसार में मानवता को बचाने का एक मात्र माध्यम भगवती गोमाता ही है और गाय ही ऐसा माध्यम है जो सभी को एक मंच में ला सकती है और उसके लिए प्रत्येक सनातनी को गोमाता को दूध की जगह उसके गोमूत्र एवं गोबर जैसी अमूल्य निधि को पहचानने की जरूरत है क्योंकि भारत को सोने की चिड़िया कहलाने का मूल आधार गोमाता ही रहा है *

*गुजरात से स्वामीनारायण संस्थान भुज से पूज्य देव चरण दास जी महाराज, पूज्य श्रीजीनंद जी महाराज ,पूज्य ब्रजबिहारी दास जी महाराज एवं रामजी भाई बडगांव, रवजी भाई वापी व नरेन्द्र भाई आनंद एवं सुसनेर नगर से राणा चितरंजन सिंह ,सरदार सिंह, राकेश कानूड़िया पार्षद ,ललित मोदी,विष्णु पाटीदार,फकीर मोहम्मद खान नेताजी, पप्पू कुरैशी, कयूम खान नगर अध्यक्ष कांग्रेस, मोसीन भाई, दीपक राठौर पत्रकार ,जुगल किशोर खंडेलवाल नलखेड़ा
आदि अतिथि उपस्थित रहें*
सुसनेर नगर से पधारे पत्रकार एवं समाजसेवियों ने सुसनेर नगर के निराश्रित गोवंश को गो अभयारण्य लाने के लिए उनकी छाया व्यवस्था के लिए प्रति व्यक्ति एक चद्दर एक पाइप जिसका खर्च 2100 रुपए के 1100 भामाशाह के माध्यम से संग्रह कर मकर संक्रांति के पुण्य पर्व तक इस लक्ष्य को पूर्ण करने भरोसा दिया जिसका पूज्य महाराज जी ने सुसनेर के सभी गो प्रेमी भामाशाह का आभार जताया

276 वे दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश एवं राजस्थान से

एक वर्षीय गोकृपा कथा के 276 वें दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश के सुसनेर नगर से प्रेस क्लब सुसनेर एवं न्यू आदर्श श्रमजीवी पत्रकार संघ की ओर से मुकेश हरदेनिया
अध्यक्ष प्रेस क्लब सुसनेर , गिरिराज बंजारिया
सचिव प्रेस क्लब सुसनेर, मनीष राठौर सदस्य प्रेस क्लब सुसनेर ,कपिल गर्ग प्रदेश अध्यक्ष न्यू आदर्श पत्रकार श्रमजीवी पत्रकार संघ, अर्पित हरदेनिया सदस्य प्रेस क्लब सुसनेर, गिरिराज शंकर श्रीवास्तव प्रदेश सचिव कायस्थ समाज मध्य प्रदेश, द्वारकादास लड्डा
समाजसेवी सुसनेर एवं नीमच जिले के अल्हेड ग्राम के कैलाश माली के नेतृत्व में डग की महिला मंडल व राजस्थान के डग से सज्जन सिंह के नेतृत्व में महिला मंडल एवं राजसमंद के हुकमीचंद,सूरज सिंह,मीनू कुंवर ने नीमच जिले के अल्हेड़ अपने ग्राम की और से सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।

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